अल्फिया शेख, मुंबई
सरकारी योजनाएं ऐलान तो की जाती हैं, लेकिन क्या वे सच में ज़रूरतमंदों तक पहुंचती हैं? यह सवाल सालों से बना हुआ है। खासतौर पर सूबे के मुस्लिम पसमांदा समाज और दूसरी छोटी जातियों के मामले में कई नेताओं ने सरकार के सामने यही दुख ज़ाहिर किया था। इन पिछड़े तबकों का विकास सिर्फ कागज़ों पर न रहकर उनकी असल ज़िंदगी में भी हो, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार के अल्पसंख्यक विकास विभाग ने अब एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
सूबे के मुस्लिम पसमांदा समाज और छोटी जातियों के चौतरफा विकास के लिए सरकार ने आखिरकार एक राज्य-स्तरीय स्टडी कमेटी बना दी है। इस अहम कमेटी के अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी बीजेपी नेता इदरीस मुलतानी को सौंपी गई है।
उन्हें सीधे राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। मंत्रालय से इस बारे में ऑफिशियल गवर्नमेंट रेज़ोल्यूशन (GR) जारी कर दिया गया है। उम्मीद है कि इस कमेटी के ज़रिए अब मुस्लिम समाज के पिछड़े तबकों के विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

कमेटी बनाने के पीछे सरकार का मकसद
सरकार के अलग-अलग विभागों के ज़रिए मुस्लिम समाज के लिए कई भलाई की योजनाएं चलाई जाती हैं। लेकिन यह बात सामने आई थी कि इन योजनाओं का फायदा सही मायनों में ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है।
इस परेशानी की असली वजह तलाशना और उस पर पक्के उपाय सुझाना ही इस कमेटी का मुख्य मकसद है। यह कमेटी सूबे के मुस्लिम पसमांदा समाज और छोटी जातियों के मौजूदा हालात का बारीकी से जायज़ा लेगी। मौजूदा योजनाओं में क्या कमियां हैं, यह पता लगाकर उनमें ज़रूरी सुधार सुझाएगी और उनकी माली और सामाजिक तरक्की के लिए सीधे सरकार को अपनी सिफारिशें देगी।
इन मुद्दों पर होगी तफ्सीली स्टडी
मंत्रालय की तरफ से जारी जीआर (GR) के मुताबिक, इस नई स्टडी कमेटी के काम का दायरा बहुत बड़ा रखा गया है:
इसके अलावा, कमेटी यह भी पता लगाएगी कि सरकारी योजनाओं का फायदा इस समाज तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। उन कमियों को दूर करने के लिए सही उपाय सुझाए जाएंगे। सरकार की तरफ से मिलने वाला फंड सही लोगों तक कैसे और असरदार तरीके से पहुंचे, इसकी भी पॉलिसी तय की जाएगी। इन सारी कोशिशों का आखिरी मकसद इस पिछड़े समाज को विकास की मुख्य धारा में लाना है।

कैसे काम करेगी यह कमेटी?
इस कमेटी का काम सिर्फ ऑफिस में बैठकर नहीं, बल्कि सीधे मैदान में उतरकर होगा।
इस राज्य-स्तरीय स्टडी कमेटी का कार्यकाल 1 साल का होगा। बनने के 1 साल के अंदर इस कमेटी को अपनी तफ्सीली रिपोर्ट और सिफारिशें अल्पसंख्यक विकास विभाग को सौंपना ज़रूरी होगा।
ऐसा होगा प्रशासनिक इंतज़ाम
कमेटी के काम में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सीधे सूबे के मुख्य सचिव प्रशासनिक कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम देखेंगे। डिविजनल लेवल पर संबंधित डिविजनल कमिश्नर और ज़िला लेवल पर ज़िलाधिकारी इन बैठकों का इंतज़ाम करेंगे। ज़िला नियोजन अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे।
कमेटी का हेडक्वार्टर मुंबई में तय किया गया है, और रोज़मर्रा के काम का तालमेल छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के अल्पसंख्यक आयुक्तालय के कमिश्नर करेंगे। इस काम का पूरा खर्च सरकार के खास फंड से मंज़ूर किया गया है।
कौन हैं कमेटी के अध्यक्ष इदरीस मुलतानी?
इस बेहद अहम कमेटी की कमान जिन्हें सौंपी गई है, वे इदरीस मुलतानी फिलहाल महाराष्ट्र की सियासत में 'जायंट किलर' के तौर पर जाने जाते हैं। किसी भी बड़े सियासी बैकग्राउंड के बिना, उन्होंने सिल्लोड-सोयगांव विधानसभा क्षेत्र में शिवसेना के कद्दावर नेता अब्दुल सत्तार की एकतरफा सत्ता को सीधे चुनौती दी।
हाल ही में हुए ज़िला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों में मुलतानी ने सत्तार की रिवायती सियासत का रथ रोक दिया। सोयगांव तालुका में बीजेपी की ताकत बढ़ाते हुए उन्होंने सत्तार के गढ़ में बड़ी सेंध लगाई।
उनके इस शानदार काम और मुस्लिम समाज में बीजेपी की पकड़ मज़बूत करने की मेहनत के ईनाम के तौर पर पार्टी ने उन्हें लगातार दूसरी बार सूबे के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी है। अब सीधे राज्य मंत्री के दर्जे के साथ इस स्टडी कमेटी का अध्यक्ष बनाकर सरकार ने उनके काम पर मोहर लगा दी है।