आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए साल 2026 की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। टीम हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप की चैंपियन बनकर उभरी थी। आईपीएल के तुरंत बाद खिलाड़ी पूरे जोश के साथ आयरलैंड के दौरे पर गए थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वहां एक ऐसा उलटफेर होगा जो इतिहास में दर्ज हो जाएगा। बेलफास्ट में खेली गई दो मैचों की टी20 सीरीज में आयरलैंड ने भारत को 2-0 से हराकर सूपड़ा साफ कर दिया। इस शर्मनाक हार के बाद पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज कमेंटेटर सुनील गावस्कर का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने इस हार को भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक बताया है।
सुनील गावस्कर ने 'स्पोर्टस्टार' के अपने मशहूर कॉलम में भारतीय टीम के रवैये की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि 28 जून को भारतीय क्रिकेट के सबसे बुरे दिनों में से एक माना जाएगा। गावस्कर का मानना है कि क्रिकेट में मैच हारना कोई नई बात नहीं है।
खेल में हार-जीत चलती रहती है। लेकिन आप किस टीम से हार रहे हैं और किस तरह से हार रहे हैं, यह बात सबसे ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने याद दिलाया कि वह खुद अपने लंबे करियर में भारतीय क्रिकेट के कई उतार-चढ़ाव वाले दौर का हिस्सा रहे हैं। लेकिन आयरलैंड जैसी अनुभवहीन टीम से इस तरह सीरीज हार जाना भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे निचला स्तर है।

ओवरकॉन्फिडेंस और लापरवाही ने डुबोई लुटिया
बेलफास्ट के स्टॉर्मोंट क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इन दोनों मैचों में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। पहले टी20 मैच में आयरलैंड ने भारत को 34 रनों के बड़े अंतर से मात दी थी। इसके बाद दूसरे मैच में भी भारतीय टीम संभल नहीं पाई और बेहद रोमांचक मुकाबले में महज 1 रन से मैच हार गई। यह किसी भी फॉर्मेट में आयरलैंड की भारत के खिलाफ पहली द्विपक्षीय सीरीज जीत है। गावस्कर इस बात से ज्यादा दुखी हैं कि भारत यह मैच विपक्षी टीम के असाधारण खेल की वजह से नहीं हारा। बल्कि यह हार भारतीय खिलाड़ियों के जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास और लापरवाही की वजह से हुई है।
गावस्कर ने भारतीय बल्लेबाजों के खेलने के तरीके की तुलना 1983 के वर्ल्ड कप फाइनल की वेस्टइंडीज टीम से कर दी। उन्होंने कहा कि उस ऐतिहासिक फाइनल में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय टीम को बहुत कमजोर और हल्का समझ लिया था।
नतीजा यह हुआ कि वे सभी लापरवाही में अपने विकेट गंवाते चले गए। ठीक वैसा ही नजारा आयरलैंड के खिलाफ इन दोनों मैचों में भारतीय बल्लेबाजों ने दिखाया। टीम के खिलाड़ी परिस्थितियों और विरोधी टीम का सम्मान करना पूरी तरह भूल गए थे। उन्हें लग रहा था कि वे आसानी से मैच जीत जाएंगे और इसी सोच की उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।
पिच के मिजाज को समझने में नाकाम रहे बल्लेबाज
पूर्व कप्तान ने टीम मैनेजमेंट और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीतियों पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। बेलफास्ट की पिच पर अतिरिक्त उछाल और कैरी देखने को मिल रहा था। ऐसे हालात में समझदारी से क्रीज पर टिककर खेलने की जरूरत थी।
लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने अंधाधुंध और जरूरत से ज्यादा आक्रामक शॉट खेलने का तरीका अपनाया। गावस्कर के मुताबिक खिलाड़ी अपनी स्टार इमेज के जाल में फंस गए थे। वे भूल गए कि खेल की स्थिति के अनुसार खुद को ढालना सबसे जरूरी होता है। स्मार्ट गेंदबाजी और शानदार कैचिंग के दम पर आयरलैंड ने भारतीय बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
इस शर्मनाक हार के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी माना कि यह परिणाम पूरी टीम के लिए बेहद निराशाजनक था। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम को उम्मीद नहीं थी कि आयरलैंड इतना शानदार प्रदर्शन करेगा। आयरिश टीम ने मैदान के आयामों और पिच के मिजाज को बेहतर तरीके से समझा था। भारतीय टीम रणनीतिक तौर पर और मैदान का आकलन करने में पूरी तरह फेल साबित हुई।

वैभव सूर्यवंशी को मौका न देने पर उठे सवाल
इस दौरे पर एक और बड़ा विवाद 15 साल के युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने को लेकर हुआ। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए वैभव ने 16 पारियों में 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए थे। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे। इसके पहले अंडर-19 वर्ल्ड कप में भी उनका प्रदर्शन बेमिसाल था। इतने शानदार फॉर्म में चल रहे युवा खिलाड़ी को बेंच पर बिठाए रखने के फैसले से गावस्कर और पूर्व कोच रवि शास्त्री बेहद खफा नजर आए।
रवि शास्त्री ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर वैभव को मौका मिलता तो वह आयरलैंड की टीम के छक्के छुड़ा देते। गावस्कर ने अपने कॉलम में लिखा कि भले ही नतीजा कुछ भी रहता लेकिन यह सीरीज इस युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव कराने का सबसे बेहतरीन मौका थी।
टीम मैनेजमेंट द्वारा संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी पर ही भरोसा बनाए रखने का फैसला किसी के गले नहीं उतरा। इस मुद्दे पर उपजे विवाद के बाद बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला को भी सामने आकर टीम मैनेजमेंट का बचाव करना पड़ा।
यह सीरीज आयरलैंड के क्रिकेट इतिहास का सबसे सुनहरा पन्ना बन गई है। वहीं वर्ल्ड चैंपियन भारतीय टीम के लिए यह एक बड़ा सबक है। गावस्कर की यह तीखी आलोचना बताती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी विरोधी को कमजोर आंकना कितना आत्मघाती साबित हो सकता है। अब टीम इंडिया के सामने इंग्लैंड का बड़ा दौरा है जहां उन्हें इस हार के सदमे से उबरकर वापसी करनी होगी।