It is important to strike a balance to promote young sports talent rapidly.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उनके नाम पर स्कोरबोर्ड पर रन दिखते हैं। चयनकर्ताओं को उनमें अपार प्रतिभा नजर आती है। लोगों को वह असाधारण खिलाड़ी लगता है। लेकिन हेलमेट के नीचे और बढ़ती प्रसिद्धि के पीछे कहीं एक 15 वर्षीय लड़का भी छिपा है जो अब भी किशोरावस्था की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
भारत वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेट जगत में तेजी से आगे बढ़ने का जश्न मना रहा है और बेसब्री से उनके पदार्पण का इंतजार कर रहा है। दूसरी तरफ उनकी साहसिक बल्लेबाजी और शानदार संयम से इतर भी गुपचुप एक चर्चा चल रही है।
यह एक ऐसा मुद्दा है जिससे खेल जगत दशकों से जूझ रहा है। जब असाधारण प्रतिभा वाले बच्चे वयस्कों की दुनिया में प्रवेश करते हैं, तो यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि उनकी असाधारण प्रतिभा एक सामान्य और साधारण बचपन की कीमत पर न आए। इसका जवाब आसान नहीं है।
अगर चयन का आधार केवल कौशल ही हो तो सूर्यवंशी अगर अभी भारत की तरफ से खेलने की स्थिति में है तो वह उसके हकदार हैं। आईपीएल और अन्य टूर्नामेंटों में उनके हाल के प्रदर्शन ने इस बात को स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है।
इसके बावजूद सीनियर टीम के साथ पहली बार दौरे पर गए सूर्यवंशी के लिए जो व्यवस्था की गई है उसे पता चलता है कि क्रिकेट का यह नया सितारा कानूनी तौर पर अभी भी बच्चा है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने उनके माता-पिता को उनके साथ जाने की अनुमति दी है। दूसरी तरफ इंग्लैंड में सुरक्षा नियमों के तहत नाबालिगों के लिए अलग चेंजिंग रूम की व्यवस्था करना अनिवार्य है।