विश्व का सबसे बड़ा जलवायु खतरा जो दिखता नहीं

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-06-2026
The world's biggest climate threat is invisible.
The world's biggest climate threat is invisible.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 अटलांटिक महासागर की गहराइयों में पानी का एक विशाल प्रवाह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्मी को ग्रीनलैंड की ओर ले जाता है। इसे ‘अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन’ (एएमओसी) कहा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया अधिकांशतः हमारी नजरों से दूर होती है, इसलिए वर्षावनों, ध्रुवीय हिम आवरण या जलवायु को नियंत्रित करने वाली अन्य विशाल प्रणालियों जैसी सार्वजनिक पहचान इसे नहीं मिली।
 
हाल के अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि यह प्रणाली कमजोर पड़ रही है। यदि इसकी गति और धीमी होती है तो दुनिया के लगातार गर्म होने के बावजूद उत्तरी यूरोप में सर्दियां कहीं अधिक ठंडी हो सकती हैं। इसके साथ ही उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की मानसून प्रणालियों में बदलाव हो सकते हैं और अमेरिका के पूर्वी तट पर समुद्र का स्तर अचानक बढ़ सकता है।
 
वैज्ञानिकों की लगातार चेतावनियों के बावजूद एएमओसी बिरले ही सुर्खियों में आ पाता है। इसका एक कारण मीडिया स्वामित्व और संपादकीय सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन इसके पीछे एक और वजह भी है।
 
दरअसल, एएमओसी आधुनिक पत्रकारिता के सामने एक अनोखी चुनौती पेश करता है। इसे समझना ही नहीं, इसकी कल्पना करना भी कई लोगों के लिए मुश्किल है, क्योंकि यह हमारी दुनिया से बहुत नीचे, अटलांटिक महासागर की गहराइयों में धीरे-धीरे और लगभग खामोशी से संचालित होता है।
 
जलवायु संबंधी मुद्दों को समझने में तस्वीरें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पत्रकारिता में दशकों के दौरान एक खास दृश्य संस्कृति विकसित हुई है-जलते हुए जंगल, टूटते हिमखंड, सूर्यास्त की पृष्ठभूमि में तेल रिग, चक्रवात और प्लास्टिक की बोतलों से भरे समुद्र तट।
 
ये दृश्य उन जटिल प्रणालियों का प्रतीक बन जाते हैं जिन्हें सीधे देखना कठिन या लगभग असंभव होता है। जलवायु पत्रकारिता ने इसका ‘विजुअल फिल्टर’ नहीं बनाया।
 
‘द ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच’ इसका अच्छा उदाहरण है। अक्सर समुद्र में तैरते कचरे के एक विशाल द्वीप के रूप में इसकी कल्पना की जाती है, जबकि वास्तविकता में यह लाखों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सूक्ष्म प्लास्टिक कणों का एक बिखरा समूह है जो समुद्र की सतह से लगभग दिखाई ही नहीं देता।
 
फिर भी यह खबरों में बना रहता है क्योंकि कुछ ‘‘विजुअल प्रॉक्सी’’ इसे एक पहचानने योग्य रूप दे देते हैं-जैसे समुद्र से निकाली गई प्लास्टिक की बोतलें और जाल, या लंबी समुद्री यात्रा के दौरान आंकड़े जुटाने वाला कोई तैराक।