नई दिल्ली
चार एशियाई खेलों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारतीय सेलर नेत्रा कुमारन ने महाद्वीपीय स्तर पर पदक जीतने का सपना पूरा कर लिया। आइची नागोया एशियाई खेलों में महिला डिंगी स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली नेत्रा ने अपना पहला एशियाई खेल पदक माता-पिता और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके लंबे सफर में उनका साथ दिया और उन पर भरोसा बनाए रखा।
29 वर्षीय नेत्रा बुधवार को भारत लौटीं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उन्होंने एएनआई से बातचीत में अपनी खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक और अविश्वसनीय पल है।
नेत्रा ने कहा, “मैं यह पदक अपने माता-पिता और उन सभी लोगों को समर्पित करना चाहती हूं, जो शुरुआत से मेरे साथ खड़े रहे और मुझ पर विश्वास किया। यह बहुत लंबा सफर रहा है। यह मेरा चौथा एशियाई खेल था और आखिरकार मैं पदक लेकर घर लौटी हूं। यह मेरे लिए अविश्वसनीय है।”
नेत्रा कुमारन का एशियाई खेलों का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में सातवां स्थान हासिल किया था। इसके बाद 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में वह पांचवें स्थान पर रहीं।
हांगझोउ एशियाई खेलों में भी वह पदक से चूक गई थीं और चौथे स्थान पर रही थीं। लगातार तीन खेलों में पोडियम से बाहर रहने के बाद आइची नागोया में उन्होंने आखिरकार कांस्य पदक जीत लिया।
कैयोह यॉट हार्बर में हुई महिला डिंगी स्पर्धा के फाइनल में नेत्रा ने कुल 14 अंक हासिल किए। पहले फाइनल रेस में वह छठे स्थान पर रहीं। इसके बाद दूसरी फाइनल रेस में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और कुल मिलाकर तीसरे स्थान पर पहुंच गईं।
थाईलैंड की सोफिया मॉन्टगोमरी और सिंगापुर की जेनिया एंग ने उनसे आगे रहते हुए क्रमशः पहला और दूसरा स्थान हासिल किया।
कांस्य पदक जीतने के बावजूद नेत्रा को लगता है कि वह स्वर्ण पदक की दौड़ में भी थीं। उन्होंने कहा कि उनके प्रदर्शन में सोना जीतने की क्षमता थी, लेकिन कुछ गलतियों ने उन्हें पीछे कर दिया।
उन्होंने कहा कि नौकायन में छोटी गलतियां भी मुकाबले का परिणाम बदल सकती हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने कुछ ज्यादा गलतियां कीं और इसी वजह से स्वर्ण पदक से चूक गईं। हालांकि, कांस्य पदक के साथ भारत लौटकर वह खुश हैं।
नेत्रा ने कहा कि वह अगली बार देश को और गौरवान्वित करने की कोशिश करेंगी।
एशियाई खेलों के बाद नेत्रा की नजर अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर है। वह कुछ समय आराम करने के बाद दोबारा ट्रेनिंग शुरू करेंगी।
उन्होंने बताया कि वह कम से कम दो सप्ताह का ब्रेक लेना चाहती हैं। इसके बाद उनका प्रशिक्षण फिर शुरू होगा। लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए पहला क्वालीफायर जनवरी में ब्राजील में होना है।
नेत्रा की कोशिश होगी कि वह ब्राजील में ही ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लें। अगर वहां मौका नहीं मिला तो अगले महाद्वीपीय क्वालीफायर में स्थान हासिल करने की कोशिश करेंगी।
नेत्रा टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला सेलर बनी थीं। टोक्यो में उन्होंने 35वां स्थान हासिल किया था। इसके बाद पेरिस 2024 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और 21वें स्थान पर रहीं।
अब उनका लक्ष्य सिर्फ ओलंपिक में पहुंचना नहीं, बल्कि लॉस एंजिलिस में बेहतर प्रदर्शन करना है।
आइची नागोया एशियाई खेलों में भारतीय नौकायन टीम का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। नेत्रा कुमारन का कांस्य भारत का इन खेलों में नौकायन का तीसरा पदक था।
इससे पहले पुरुष स्किफ स्पर्धा में मनु फ्रांसिस और प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने रजत पदक जीता था। महिला स्किफ में हर्षिता तोमर और शीतल वर्मा ने कांस्य पदक हासिल किया।
इस तरह भारतीय सेलर्स ने जापान में हुए एशियाई खेलों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और आगामी ओलंपिक क्वालीफिकेशन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
भारतीय सेलर विष्णु सरवनन पुरुष डिंगी स्पर्धा में 21 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे। वह लगातार दूसरे एशियाई खेलों में पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गए।हांगझोउ एशियाई खेलों में विष्णु ने कांस्य पदक जीता था। इस बार वह उस प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके।
27 वर्षीय विष्णु भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं। वह टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।उन्होंने बताया कि आइची नागोया में मौसम और ज्वार की स्थिति ने प्रतियोगिता को काफी मुश्किल बना दिया था। उनके मुताबिक, यह सामान्य नौकायन स्थल नहीं था। वहां ज्वार काफी तेज था और आसमान में बादल रहने के कारण हवा का पैटर्न भी सामान्य नहीं रहा।
इन परिस्थितियों में रेस का अनुमान लगाना बेहद मुश्किल था और किसी भी समय स्थिति बदल सकती थी।
पदक से चूकने के बावजूद विष्णु सरवनन ने नेत्रा कुमारन की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि नेत्रा को एशियाई खेलों का पदक जीतने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ा।
विष्णु ने महिला स्किफ में कांस्य पदक जीतने वाली हर्षिता तोमर की भी सराहना की। उन्होंने हर्षिता को अपनी छोटी बहन जैसा बताया और कहा कि वह अब दो बार एशियाई खेलों में पदक जीत चुकी हैं।
विष्णु सरवनन के लिए आइची नागोया का चौथा स्थान मंजिल नहीं है। उनकी नजर भी अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर है।उन्होंने कहा कि ओलंपिक उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है और वह वहां पदक जीतना चाहते हैं। उनके मुताबिक, लॉस एंजिलिस ओलंपिक ज्यादा दूर नहीं है। इसलिए कुछ दिन आराम करने के बाद वह फिर से ट्रेनिंग शुरू करेंगे।
जनवरी में ब्राजील में होने वाला पहला ओलंपिक क्वालीफायर उनके लिए अगली बड़ी चुनौती होगा।
आइची नागोया एशियाई खेलों ने भारतीय नौकायन खिलाड़ियों के सामने अब अगला लक्ष्य भी साफ कर दिया है। एशियाई स्तर पर पदक जीतने के बाद नेत्रा कुमारन और विष्णु सरवनन की नजर अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के टिकट और वहां भारत के लिए पदक जीतने पर है।