सानिया अंजुम
कभी-कभी कोई कहानी लिखने से बहुत पहले ही जन्म ले लेती है। लेखक को बस यह एहसास बाद में होता है कि उसके पास कहने के लिए एक कहानी है। सारा महमूद के लिए भी इसकी शुरुआत पढ़ने से हुई। एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दुनिया भर के युवा लेखक अपनी कहानियां अध्याय-दर-अध्याय प्रकाशित करते थे। सारा उनकी कहानियों में खो गईं। लेकिन इस दौरान उन्होंने एक कमी भी महसूस की ऐसा मुस्लिम फिक्शन, जिसकी जड़ें भारतीय संदर्भ में हों और जिसमें खास तौर पर युवा मुस्लिम महिलाओं के जीवन और उनके सपनों को जगह मिले। सारा याद करती हैं, “मैं संयोग से लेखन की दुनिया में आई।”
एक पाठक की जिज्ञासा जल्द ही उन कहानियों को खुद लिखने की इच्छा में बदल गई, जिन्हें वह खुद पढ़ना चाहती थीं। उनका मकसद सिर्फ मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व बढ़ाना नहीं था, बल्कि उसे वास्तविक और प्रामाणिक रूप में पेश करना था।
वह कहती हैं, “मैं मुस्लिम प्रतिनिधित्व को इस तरह सामने लाना चाहती थी, जो सकारात्मक और वास्तविक लगे। साथ ही, मैं अपने दौर की युवा महिलाओं को ऐसे किरदार देना चाहती थी, जिनसे वे खुद को जोड़ सकें और प्रेरणा ले सकें।”
इसका मतलब था पुराने और आम स्टीरियोटाइप से आगे बढ़ना। सारा ने ऐसी महिलाओं की कल्पना की, जो अपने पहनावे में सादगी पसंद कर सकती हैं, अपने रब के प्रति समर्पित हो सकती हैं और फिर भी अपने भविष्य को लेकर महत्वाकांक्षी हो सकती हैं। ऐसी महिलाएं, जो अपनी आस्था का बिना झिझक पालन करें, लेकिन उनकी पूरी पहचान सिर्फ उनके धर्म तक सीमित न हो।
उनका फिक्शन युवा रिश्तों और प्रेम को इस्लामी नजरिए से देखता है। लेकिन उनके किरदार एक और सार्वभौमिक संघर्ष से भी गुजरते हैं समाज उनसे जैसा बनने की उम्मीद करता है और वे वास्तव में जैसा बनना चाहती हैं, उनके बीच का अंतर। यह संघर्ष उनकी किताब ‘Bowled Over by the Broken’ में खास तौर पर दिखाई देता है।
यह किताब सारा की उस इच्छा से पैदा हुई कि फिक्शन को वास्तविक जिंदगी के थोड़ा और करीब लाया जाए। उन्होंने कई पाठकों को किताबों में दिखाई गई परिस्थितियों को यह कहकर खारिज करते देखा था “लेकिन ऐसा तो सिर्फ कहानियों में होता है।” सारा यह साबित करना चाहती थीं कि ऐसा जरूरी नहीं है। वह कहती हैं, “अगर पाठक अपना समय किताब पढ़ने में लगा रहे हैं, तो मैं चाहती थी कि उनका अनुभव सार्थक और उपयोगी हो।”
इसीलिए उन्होंने ऐसी परिस्थितियों को अपनी कहानी का हिस्सा बनाया, जिनसे दक्षिण एशिया की कई युवा महिलाएं खुद को जोड़ सकती हैं गेहुंए रंग को लेकर ताने सुनना, पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद शादी के लिए दबाव, और यह मान लेना कि शादी के बाद किसी तरह दो लोगों के बीच अनुकूलता पैदा की जा सकती है।
ये कोई असाधारण घटनाएं नहीं हैं। और शायद यही इन्हें ज्यादा प्रभावशाली बनाता है। रोजमर्रा की टिप्पणियां, उम्मीदें और परिवार में होने वाली बातचीत धीरे-धीरे यह तय करने लगती हैं कि एक युवा महिला खुद को और अपने भविष्य को किस तरह देखती है।
सारा इन वास्तविकताओं को सिर्फ एक रोमांटिक कहानी का हिस्सा नहीं बनातीं, बल्कि रिश्तों और शादी से जुड़ी धारणाओं पर सवाल भी उठाती हैं। सबसे खास बात यह है कि वह शादी को कहानी का अंत मानने से इनकार करती हैं। वह कहती हैं, “ज्यादातर कहानियां शादी पर खत्म हो जाती हैं। लेकिन इस किताब में सबसे ज्यादा घटनाएं शादी के बाद शुरू होती हैं।”
कहानी कहने के तरीके में यह एक छोटा बदलाव लग सकता है, लेकिन इसका महत्व बड़ा है। शादी का जश्न भले ही वहीं खत्म हो जाए, लेकिन असली जिंदगी, आपसी समझ, उम्मीदें, समझौते और रिश्ते को मजबूत बनाने की कोशिश वहीं से शुरू होती है। हालांकि सारा की तीनों सेल्फ-पब्लिश्ड किताबों में एक गहरी बात समान है आस्था को जीवन से अलग करके देखने के बजाय उसे जीवन का हिस्सा बनाना। वह कहती हैं, “मेरी सभी किताबों का मूल विचार यही है कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपको अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है।”
सारा के लिए यह सोच सिर्फ उनकी कहानियों तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि उनके पाठक इस बारे में सोचें कि रिश्तों, महत्वाकांक्षाओं और मुश्किल परिस्थितियों में लिए जाने वाले रोजमर्रा के फैसलों में उनकी आस्था किस तरह भूमिका निभा सकती है।
वह कहती हैं, “जब पाठक किताब बंद करें, तो मैं चाहती हूं कि वे इस बारे में सोचें कि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और फैसलों में अपनी आस्था को किस तरह उतार सकते हैं।” यह नजरिया सिर्फ उनकी व्यक्तिगत मान्यताओं से नहीं बना है, बल्कि उनके अकादमिक जीवन ने भी इसे आकार दिया है।
सारा फूड साइंस और न्यूट्रिशन की पृष्ठभूमि वाली असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और रिसर्च उनके पेशेवर सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी अकादमिक शिक्षा ने उन्हें परिस्थितियों को ध्यान से देखने, सवाल उठाने, विश्लेषण करने और चीजों की सतह से आगे जाकर समझने की आदत दी है।
वह कहती हैं, “मेरी पूरी शिक्षा ने उस नजरिए को आकार दिया है, जिसे मैं अपनी लेखनी के जरिए सामने रखती हूं। इससे मुझे परिस्थितियों को आलोचनात्मक तरीके से देखने और उन्हें उस समझ के साथ परखने में मदद मिलती है, जो शायद मुझे किसी और तरीके से नहीं मिलती।”
शिक्षण, रिसर्च और लेखन के बीच संतुलन बनाने वाली सारा की जिंदगी में खाली समय की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। लेकिन वह अपने रचनात्मक काम को हमेशा अपने पेशेवर जीवन से प्रतिस्पर्धा करने वाली एक और जिम्मेदारी नहीं मानतीं। कई बार यही लेखन उन्हें बाकी चीजों से निपटने में मदद करता है।
वह कहती हैं, “जिन दिनों मुझे लगता है कि काम के अलावा किसी और चीज के लिए मेरे पास समय नहीं है, अक्सर वही दिन होते हैं जब मैं अपने विचारों को लिखने के लिए बेचैन हो जाती हूं। यह मेरे लिए तनाव कम करने का एक तरीका बन जाता है।”
यह स्वीकारोक्ति काफी सहज और ईमानदार है। लेखन हमेशा ऐसा काम नहीं है, जिसे वह अपने पेशेवर जीवन के बीच व्यवस्थित तरीके से समय निकालकर करती हैं। कई बार लेखन खुद अपनी जगह बना लेता है।
शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि सारा के लिए लेखन सिर्फ उपलब्धियों की सूची में एक और उपलब्धि जोड़ना नहीं है। यह उनके लिए अपने विचारों को समझने, नए विचार तलाशने और कुछ ऐसा रचने का माध्यम है, जिससे कोई और भी खुद को जोड़ सके।
वह इसे बहुत सरल शब्दों में कहती हैं: “चित्रकार चित्र बनाते हैं, बेकर बेक करते हैं और लेखक लिखते हैं।” यह उस रचनात्मक प्रवृत्ति का बिल्कुल सही वर्णन है, जो जिंदगी कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, खत्म नहीं होती।
एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पाठक के रूप में शुरुआत करने से लेकर सेल्फ-पब्लिश्ड लेखिका और अकादमिक बनने तक सारा का सफर किसी तय योजना के मुताबिक नहीं चला। उन्होंने कभी कोई बड़ी योजना बनाकर फिक्शन, रिसर्च और अकादमिक करियर को एक साथ जोड़ने की शुरुआत नहीं की थी। यह सफर बस एक कमी को पहचानने से शुरू हुआ और फिर यह सोचने से कि अगर वह खुद उस कमी को भरने की कोशिश करें तो क्या होगा।
आज उनका काम व्यक्तिगत और सार्वभौमिक के बीच एक जगह बनाता है आस्था और महत्वाकांक्षा, कल्पना और वास्तविकता, परंपरा और व्यक्तिगत पहचान के बीच। शायद यही वजह है कि उनकी कहानियां ध्यान खींचती हैं।
उनकी कहानियां युवा मुस्लिम महिलाओं से यह नहीं कहतीं कि उन्हें अपनी किसी एक पहचान को चुनकर दूसरी को छोड़ना होगा। इसके बजाय, वे जटिलताओं के लिए जगह बनाती हैं आस्था के साथ सपने, मूल्यों के साथ महत्वाकांक्षा और ‘हैप्पीली एवर आफ्टर’ के बाद की वास्तविक जिंदगी के साथ प्रेम। सारा ने लिखना इसलिए शुरू किया क्योंकि उन्हें ऐसी पर्याप्त कहानियां नहीं मिल रही थीं, जिनमें उन्हें अपनी झलक दिखाई दे। अब वह ऐसी कहानियां लिख रही हैं, जिनमें शायद दूसरी युवा महिलाएं भी पहली बार खुद को पहचान सकें।