किशोर सिंह सोलंकी / अजमेर
अजमेर। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें देश के प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। देश की तरक्की तभी संभव है, जब समाज के अलग अलग वर्ग मिलकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। यह बात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़े हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प पूरे देश का संकल्प है। इसे किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। देश की अर्थव्यवस्था, तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैश्विक भूमिका में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में नागरिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए केवल योजनाएं और नीतियां पर्याप्त नहीं हैं। इनके सफल क्रियान्वयन के लिए लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
विकसित भारत 2047 पूरे देश का लक्ष्य
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य देश की भावी दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकल्प है। वर्ष 2047 में भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस अवसर तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की बात कही जा रही है।
उनके अनुसार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार और जनता को साथ चलना होगा। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, तकनीक, उद्योग, कृषि और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में लगातार काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपने स्तर पर भी राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। कोई व्यक्ति शिक्षा के क्षेत्र में काम कर सकता है। कोई रोजगार पैदा कर सकता है। कोई सामाजिक सेवा से जुड़ सकता है। युवा नई तकनीक और नए विचारों के साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।
चिश्ती ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। देश के गांवों, कस्बों और शहरों के बीच विकास की दूरी कम करना भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
देशसेवा को सबसे ऊपर रखने की जरूरत
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि भारत का इतिहास बताता है कि जब नेतृत्व व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर देशसेवा को प्राथमिकता देता है, तब राष्ट्र को आगे बढ़ने की नई दिशा मिलती है।
उन्होंने कहा कि देशसेवा की भावना किसी एक वर्ग या विचार तक सीमित नहीं है। भारत की ताकत उसकी विविधता में है। अलग अलग धर्म, समुदाय, भाषाएं और संस्कृतियां देश की पहचान का हिस्सा हैं। राष्ट्र निर्माण में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि लंबे सार्वजनिक जीवन का मूल्यांकन सेवा और विकास के आधार पर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की सेवा और विकास को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और कार्यों पर चर्चा होती रहनी चाहिए। लेकिन देश के विकास से जुड़े बड़े लक्ष्यों को लेकर समाज में सकारात्मक भागीदारी भी जरूरी है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि आज दुनिया के बड़े मंचों पर भारत की आवाज पहले की तुलना में अधिक मजबूती से सुनी जा रही है। भारत ने विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति में वैश्विक सहयोग, आर्थिक साझेदारी और कूटनीतिक संवाद को महत्व मिला है। दुनिया के अलग अलग देशों के नेताओं के साथ भारत की उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं। इन संवादों के जरिए भारत ने अपने हितों और प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की है।
चिश्ती के अनुसार भारत की वैश्विक भूमिका केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है। अर्थव्यवस्था, तकनीक, डिजिटल क्षेत्र, अंतरिक्ष, शिक्षा और नवाचार में भी भारत अपनी क्षमता दिखा रहा है।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत के लिए आत्मनिर्भरता के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है। देश को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ दुनिया के अन्य देशों के साथ सहयोग के रास्ते भी खुले रखने होंगे।
तकनीक और अर्थव्यवस्था में बदलाव
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि भारत तेजी से बदल रहा है। तकनीक ने आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। डिजिटल सेवाओं का विस्तार हुआ है। कारोबार और संचार के तरीके बदले हैं। युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में तकनीक भारत के विकास में बड़ी भूमिका निभाएगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, आधुनिक उद्योग और नए रोजगार के क्षेत्र देश की आर्थिक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
हालांकि उन्होंने इस बदलाव में आम लोगों की भागीदारी को भी जरूरी बताया। उनके अनुसार तकनीकी विकास का लाभ समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों तक पहुंचना चाहिए। डिजिटल सुविधाओं के साथ शिक्षा और कौशल विकास पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर मिलेंगे तो वे विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सामाजिक एकता के बिना विकास अधूरा
चिश्ती ने कहा कि मजबूत राष्ट्र के लिए सामाजिक एकता जरूरी है। आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति के साथ समाज में आपसी विश्वास भी मजबूत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविध संस्कृति और साझा विरासत से बनी है। अलग अलग समुदायों ने देश के निर्माण में योगदान दिया है। इसलिए विकास की प्रक्रिया में सभी वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है।
उनके अनुसार सामाजिक सद्भाव, भाईचारा और आपसी सम्मान विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकते हैं। देश के विकास को केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं देखा जाना चाहिए। लोगों के जीवन में सुधार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार और सुरक्षित वातावरण भी विकास के महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि किसी भी बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य की सफलता में नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सरकार नीतियां बना सकती है और योजनाएं शुरू कर सकती है। लेकिन उन्हें जमीन पर सफल बनाने में जनता की भागीदारी जरूरी होती है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। कानून का सम्मान, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में शांति बनाए रखना भी राष्ट्र निर्माण का हिस्सा है।
उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आगे आने की अपील की। उनका कहना है कि युवा भारत के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं। नई सोच, मेहनत और जिम्मेदारी के साथ युवा देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
2047 की नींव आज रखनी होगी
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य भविष्य की बात जरूर है, लेकिन उसकी नींव आज रखनी होगी। इसके लिए देश को लगातार मेहनत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ समाज, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण किसी एक दिन का काम नहीं है। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें हर व्यक्ति का छोटा योगदान भी महत्वपूर्ण हो सकता है।उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति तभी टिकाऊ होगी, जब विकास के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी रहे। आर्थिक मजबूती के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सद्भाव और नागरिक जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता देनी होगी।
बदलते भारत के लिए सामूहिक संकल्प
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि आज भारत जिस तेजी से बदल रहा है, वह आने वाले समय की संभावनाओं का संकेत है। लेकिन इस बदलाव को स्थायी और व्यापक बनाने के लिए देश को एकजुट होकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि 2047 का विकसित भारत केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। जब देश का हर नागरिक इसे अपनी जिम्मेदारी समझेगा, तभी यह लक्ष्य वास्तविक रूप ले सकेगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत विकास, तकनीक, अर्थव्यवस्था और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में और मजबूत होगा। इसके साथ सामाजिक एकता और साझा विरासत को भी देश की ताकत बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मजबूत भारत की पहचान केवल उसकी आर्थिक शक्ति से नहीं होगी। उसकी पहचान इस बात से भी होगी कि उसके नागरिक कितने जिम्मेदार, जागरूक और एकजुट हैं। यही सोच विकसित भारत 2047 की मजबूत नींव तैयार कर सकती है।

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य क्या है?
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र के रूप में मजबूत करना है।
हजरत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम किस संदर्भ में आयोजित किया गया?
‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा है।
विकसित भारत के लिए नागरिकों की क्या भूमिका है?
शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सद्भाव, कानून का सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत की वैश्विक भूमिका पर चिश्ती ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज मजबूत हुई है और विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंध तथा सहयोग बढ़े हैं।