जुडोका इशरूप नारंग ने पदक चूक से लिया बड़ा सबक

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 10-08-2026
Judoka Ishroop Narang learns a valuable lesson from missing out on a medal.
Judoka Ishroop Narang learns a valuable lesson from missing out on a medal.

 

चंडीगढ़।

भारत की युवा जुडोका इशरूप नारंग 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने से बेहद करीब आकर चूक गईं। ग्लासगो में अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल अभियान में महिलाओं के -78 किलोग्राम वर्ग में चौथे स्थान पर रहने वाली 19 वर्षीय इशरूप अब इस अनुभव को आगे की तैयारी का आधार बनाना चाहती हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में जगह बनाना है।

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने जूडो के 12 मुकाबलों में हिस्सा लिया और चार पदक जीते। इनमें दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक शामिल हैं। 2022 के मुकाबले यह भारत का बेहतर प्रदर्शन रहा, जब देश को जूडो में तीन पदक मिले थे और कोई स्वर्ण नहीं मिला था। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने जूडो में भारत के लिए पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास बनाया।

क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं इशरूप

प्रतियोगिता के अंतिम दिन इशरूप भारत की ऐसी एकमात्र जुडोका रहीं, जिन्होंने शुरुआती दौर से आगे बढ़कर पदक मुकाबलों तक जगह बनाई। उन्होंने राउंड ऑफ 16 में स्कॉटलैंड की निकोल वुड को हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड की एमा रीड से हुआ। रीड राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता थीं। दोनों के बीच मुकाबला पूरे चार मिनट चला, लेकिन इशरूप को हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद इशरूप ने शानदार वापसी की। रेपेचेज मुकाबले में वह कैमरून की जॉर्जिका वेस्ली जेंग्यू माउने के खिलाफ शुरुआती दौर में 0-2 से पीछे थीं। उन्होंने मुकाबले में जबरदस्त वापसी करते हुए 10-2 से जीत दर्ज की और पदक मुकाबले में जगह बनाई।

हालांकि, कांस्य पदक के मुकाबले में कनाडा की कोराली गोडबाउट के खिलाफ गोल्डन स्कोर में उन्हें करीबी हार मिली। इस तरह इशरूप पदक से महज एक कदम दूर रहकर चौथे स्थान पर रहीं।

पदक चूकना दिल तोड़ने वाला था

अपने प्रदर्शन को याद करते हुए इशरूप ने कहा कि ग्लासगो का अनुभव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। उनके वजन वर्ग में कई वरिष्ठ खिलाड़ी थीं और उन्हें कुल चार मुकाबले खेलने का मौका मिला।

उन्होंने माना कि कांस्य पदक मुकाबले में हार बेहद निराशाजनक रही। पदक के इतने करीब पहुंचकर चूकना उनके लिए दिल तोड़ने वाला अनुभव था। हालांकि, इसी अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा को बेहतर ढंग से समझने का मौका भी दिया।

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इशरूप ने फ्रांस में तीन सप्ताह के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया था। अब उनकी नजर ओलंपिक क्वालीफिकेशन पर है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वह 2030 के अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन

इशरूप ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को भारत की उभरती हुई युवा जुडोकाओं में स्थापित किया है। उनके प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों में जूनियर एशियाई चैंपियनशिप का रजत पदक और जूनियर एशियन कप का कांस्य पदक शामिल हैं।

उनकी तैयारी में उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने विवेक ठाकुर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया और इसके बाद इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में भी ट्रेनिंग की। वह चंडीगढ़ में भी लगातार अभ्यास करती हैं, जहां राज्य के खेल विभाग से उन्हें सहयोग मिलता है।

अमेच्योर जूडो एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के महासचिव एनएस ठाकुर ने इशरूप की प्रतिभा और प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि 19 साल की उम्र में इशरूप के पास आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त समय है और वह लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार कर रही हैं।

2030 पर नजर, ओलंपिक भी लक्ष्य

ग्लासगो में पदक से चूकने के बावजूद इशरूप का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है। अब वह इस अनुभव को अपनी कमियों को दूर करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को और मजबूत बनाने में इस्तेमाल करना चाहती हैं।

भारत ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल रहे। इन खेलों के समापन समारोह में 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत भी हुई और राष्ट्रमंडल खेलों का झंडा अहमदाबाद को सौंपा गया।

इशरूप के लिए ग्लासगो का चौथा स्थान मंजिल नहीं, बल्कि आगे की बड़ी सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।