मलिक असगर हाशमी
गुरु और शिष्य के रिश्ते की पावन परंपरा भारतीय संस्कृति की पहचान रही है। जब भी क्रिकेट की दुनिया में इस अटूट संबंध की बात होती है, तो भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा और उनके बचपन के कोच तारक सिन्हा का नाम बड़े आदर और प्यार के साथ लिया जाता है।
यह किस्सा दिल्ली की प्रसिद्ध सोनेट क्रिकेट एकेडमी का है, जहाँ से नेहरा जी ने अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की थी। भारतीय टीम का हिस्सा बनने और अपार सफलता हासिल करने के बाद भी, आशीष नेहरा का लगाव अपनी एकेडमी और गुरु से कभी कम नहीं हुआ। वे अक्सर अभ्यास के लिए वहाँ जाया करते थे।

एक दिन की बात है, कोच तारक सिन्हा एकेडमी आने में थोड़ा देर हो गए। अपने बेबाक और मज़ाकिया अंदाज़ के लिए जाने जाने वाले नेहरा जी ने तुरंत पूछ लिया, "क्या सर! आप ही लेट आएंगे, तो इन बच्चों को समय की पाबंदी क्या सिखाएंगे?"
कोच साहब ने मुस्कुराते हुए थोड़ा उदास मन से जवाब दिया, "बेटा, तुम तो अपने महल में रहते हो, पर मैं तो किराए के मकान में रहता हूँ। मकान मालिक ने दो दिन में घर खाली करने का नोटिस दे दिया है। नया ठिकाना ढूँढने में वक्त तो लगेगा ही।"
कोच की यह मजबूरी नेहरा जी के दिल में घर कर गई। उन्होंने मन ही मन एक बड़ा फैसला ले लिया। इत्तेफाक से अगले दो दिनों तक तेज़ बारिश के कारण नेट प्रैक्टिस नहीं हो सकी। तीसरे दिन जब मौसम साफ हुआ और नेट प्रैक्टिस शुरू हुई, तो इस बार आशीष नेहरा तीन घंटे की देरी से पहुँचे।

उन्हें देखते ही कोच साहब ने मुस्कुराते हुए टोका, "हाँ भाई टेस्ट प्लेयर! उस दिन मुझे वक्त पर आने का बड़ा ज्ञान दे रहे थे, आज खुद इतना लेट?"नेहरा जी ने कोई लंबा-चौड़ा जवाब नहीं दिया। उन्होंने बहुत ही सादगी से अपनी जेब में हाथ डाला, एक चाबी निकाली और उसे अपने गुरु के हाथों में रख दिया। चाबी देते हुए नेहरा जी ने बड़े सम्मान से कहा:
"सर, जिस खिलाड़ी के गुरुदेव खुद किराए के घर में रहते हों, उनके लिए नया घर खरीदने में तीन दिन का समय तो लग ही जाता है! यह आपके नए घर की चाबी है। अभी थोड़ा मरम्मत और रेनोवेशन का काम चल रहा है, आप 10दिनों के अंदर इसमें शिफ्ट हो जाइएगा।"
आशीष नेहरा का यह रूप देखकर कोच तारक सिन्हा भावुक हो गए। एक शिष्य ने अपने गुरु की परेशानी दूर करने के लिए बिना सोचे, पलक झपकते ही उन्हें एक नया घर गुरुदक्षिणा में भेंट कर दिया था।

इस खूबसूरत घटना के कई चश्मदीद आज भी इस पल को याद करके गदगद हो जाते हैं। हाल ही में खेल टिप्पणीकार (कमेंटेटर) और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर पदमजीत सहरावत ने एक इंटरव्यू में इस पूरी घटना का ज़िक्र करते हुए दुनिया को इस अनोखी गुरुदक्षिणा की कहानी सुनाई।
आज आशीष नेहरा भारतीय क्रिकेट के एक सफल कोच के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में गुजरात टाइटंस ने अपने पहले ही सीज़न (2022) में आईपीएल का खिताब जीतकर इतिहास रचा था। मैदान पर रणनीतियाँ बनाने से लेकर अपने गुरु के लिए बड़ा दिल दिखाने तक, आशीष नेहरा ने हमेशा साबित किया है कि एक सच्चा खिलाड़ी वही है जो अपनी जड़ों और अपने गुरु के सम्मान को कभी नहीं भूलता।
ALSO WATCH: