आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
राष्ट्रवाद का मतलब सिर्फ झंडा फहराना या किसी की देशभक्ति पर सवाल उठाना नहीं होता। असली देशभक्ति वह है जो जरूरत पड़ने पर अपने देशवासियों के काम आए। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेल 2026 के दौरान ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जब भारतीय खिलाड़ियों को आवास की किल्लत का सामना करना पड़ा, तो नागोया में रह रहे लगभग 2,000 प्रवासी भारतीयों ने अपने घरों के दरवाजे एथलीटों के लिए खोल दिए।
जापान में 19 सितंबर 2026 से शुरू हुए एशियाई खेलों में भारतीय दल के पहुंचते ही आधिकारिक व्यवस्था में भारी चूक सामने आई। नागोया में खेल गांव के बजाय क्रूज जहाज, दूर-दराज के होटलों और अस्थाई केबिनों में ठहराव की व्यवस्था की गई थी।

इस अव्यवस्था के कारण बैडमिंटन, शूटिंग और अन्य खेलों से जुड़े लगभग 30 से 35 भारतीय एथलीटों के नाम अचानक आवास सूची से गायब मिले। खिलाड़ियों को घंटों इंतजार करना पड़ा और भारतीय दल के सामने ठहरने का बड़ा संकट खड़ा हो गया।इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए भारतीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास ने मिलकर एक त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की।
हवाई अड्डा सहायता केंद्र: नागोया एयरपोर्ट पर दो समर्पित अधिकारियों की तैनाती की गई, जो पहुंचने वाले हर भारतीय खिलाड़ी को तुरंत मार्गदर्शन दे रहे हैं।
एथलीट वेलकम सेंटर: तीन अधिकारियों को स्वागत केंद्र पर रखा गया है, जो मान्यता पत्र और स्थानीय बस व ट्रेन पास से जुड़ी समस्याओं को हल कर रहे हैं।
स्थानीय समुदाय का बैकअप नेटवर्क: सबसे अनोखा कदम नागोया के भारतीय समुदाय को एकजुट करना रहा। लगभग 2,000 एनआरआई परिवारों को स्टैंडबाय पर रखा गया ताकि किसी भी खिलाड़ी को सड़क पर या परेशानी में न रहना पड़े।
Indian athletes arrived in Japan for the Asian Games. They waited 14 hrs for an accommodation.
— Gabbar (@GabbbarSingh) September 17, 2026
If this were India, people would have opened their homes, 5 star hotels would have been booked. Still we would have been hauled over coals. Very few cultures respect guests more than…
होटलों की तुरंत व्यवस्था और मौजूदा स्थिति
भारतीय दल के शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने बताया कि स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया है। खेल मंत्रालय और दल के अधिकारियों ने तुरंत 18 अतिरिक्त होटल कमरे बुक किए और 10 अन्य कमरों का आरक्षण सुनिश्चित किया। वर्तमान में सभी भारतीय खिलाड़ियों को सुरक्षित और आरामदायक होटल के कमरे आवंटित कर दिए गए हैं।
हालांकि, किसी भी खिलाड़ी को निजी घरों में रहने की नौबत नहीं आई, लेकिन नागोया में बसे प्रवासी भारतीयों का यह जज्बा पूरे देश का दिल जीत रहा है। स्थानीय भारतीयों ने अपने घरों के बाहर स्वागत के संदेश भी तैयार रखे हैं। यदि आधिकारिक व्यवस्था दोबारा विफल होती है, तो यह बैकअप प्लान तुरंत लागू किया जा सकता है।
खेल आयोजकों की प्रशासनिक नाकामी
एशियाई खेल 2026 के आयोजकों ने लागत कम करने के लिए एकीकृत खेल गांव नहीं बनाया। इसके बदले नागोया पोर्ट पर खड़े एक इतालवी क्रूज जहाज और बिखरे हुए होटलों का सहारा लिया गया। इसके कारण न केवल भारत, बल्कि दक्षिण कोरिया, चीन, वियतनाम और थाईलैंड के दलों ने भी कमरों के आकार, खान-पान और यातायात की समस्याओं की शिकायत की है।
भारतीय निशानेबाजों का अभ्यास स्थल उनके ठहरने के स्थान से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर है, जिससे उन्हें आने-जाने में दो घंटे का समय गंवाना पड़ रहा है। खेल मंत्री मनसुख मंडाविया और आईओए अध्यक्ष पी.टी. उषा ने स्थिति की समीक्षा की है और खिलाड़ियों की सहायता के लिए अपने स्वयं के परिवहन वाहन भी तैनात किए हैं।
विदेशों में रहने वाले भारतीयों की यह तत्परता दर्शाती है कि सीमा पार भी भारत का सामाजिक ताना-बाना और भाईचारा कितना मजबूत है। नागोया के प्रवासी भारतीयों ने यह साबित कर दिया कि जब देश के सम्मान और खिलाड़ियों की सुविधा की बात आती है, तो पूरा भारत एक साथ खड़ा हो जाता है।
इनपुट: एजेंसीज