कैलिफोर्निया/नई दिल्ली।
फीफा विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका का ऐतिहासिक सफर समाप्त होने के बाद टीम के मुख्य कोच Hugo Broos ने संकेत दिया है कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप हो सकता है। कनाडा के खिलाफ अंतिम क्षणों में मिली हार के बाद निराश नजर आए ब्रूस ने कहा कि वह आने वाले दिनों में अपने भविष्य को लेकर फैसला करेंगे, लेकिन एक बात तय है कि बतौर कोच यह उनका अंतिम विश्व कप है।
लॉस एंजिल्स में खेले गए राउंड ऑफ 32 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को कनाडा के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। मैच के 92वें मिनट में कनाडा के मिडफील्डर Stephen Eustáquio ने निर्णायक गोल दागकर दक्षिण अफ्रीका के सपनों को तोड़ दिया।
हालांकि हार के बावजूद दक्षिण अफ्रीका की टीम ने इस विश्व कप में इतिहास रच दिया। पहली बार टीम फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण तक पहुंचने में सफल रही। यह उपलब्धि दक्षिण अफ्रीकी फुटबॉल के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
मैच के बाद ह्यूगो ब्रूस ने कहा, "निराशा की स्थिति में कोई फैसला लेना समझदारी नहीं होगी। आने वाले कुछ दिनों में मैं अपने भविष्य को लेकर विचार करूंगा। लेकिन इतना तय है कि यह मेरा आखिरी विश्व कप है।"
साल 2021 में दक्षिण अफ्रीका की कमान संभालने वाले ब्रूस ने टीम को पूरी तरह बदल दिया। उनके नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका एक अनुशासित और प्रतिस्पर्धी टीम के रूप में उभरा। उन्होंने ऐसी टीम तैयार की, जो 2010 के बाद पहली बार विश्व कप में पहुंचने में सफल रही और नॉकआउट दौर तक भी पहुंची।
ब्रूस की कोचिंग शैली की खास बात यह रही कि उन्होंने विदेशी लीगों में खेलने वाले खिलाड़ियों के बजाय घरेलू खिलाड़ियों पर अधिक भरोसा जताया। उन्होंने टीम में सामंजस्य, अनुशासन और सामूहिक खेल को प्राथमिकता दी। इसी रणनीति ने दक्षिण अफ्रीका को विश्व फुटबॉल के बड़े मंच पर नई पहचान दिलाई।
विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। टीम को अपने पहले मैच में मैक्सिको के खिलाफ 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। यह मुकाबला काफी नाटकीय रहा, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के दो खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिखाया गया था।
हालांकि इसके बाद टीम ने शानदार वापसी की। दूसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने चेक गणराज्य के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेला, जबकि तीसरे मैच में दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में जगह बनाई।
यह पहली बार था जब दक्षिण अफ्रीका विश्व कप के ग्रुप चरण को पार करने में सफल रहा। इससे पहले टीम 1998, 2002 और 2010 विश्व कप में ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी। वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका ने मेजबान देश के रूप में विश्व कप की मेजबानी भी की थी, लेकिन तब भी वह अगले दौर में जगह नहीं बना पाई थी।
हालांकि इस बार टीम का सफर समाप्त हो गया, लेकिन ह्यूगो ब्रूस और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि दक्षिण अफ्रीकी फुटबॉल अब वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।