आवाज़ द वॉयस:/नई दिल्ली
फीफा विश्व कप 2026 के आगाज में अब केवल एक सप्ताह का समय बचा है। दुनिया की 48 सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीमें इस महाकुंभ के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और अभ्यास के साथ-साथ टीमों की जर्सी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन इस बार विश्व कप में कई देशों को अपनी पसंदीदा या विशेष जर्सी पहनने की अनुमति नहीं मिलेगी।
फीफा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, ग्रुप चरण के मुकाबलों के लिए प्रत्येक टीम की जर्सी पहले ही निर्धारित कर दी गई है। इस फैसले के कारण लगभग 18 देशों की कुछ विशेष जर्सियां शुरुआती दौर में मैदान पर दिखाई नहीं देंगी। इनमें अधिकांश अवे (Away) और थर्ड किट (Third Kit) शामिल हैं, जिन्हें टीमों ने विशेष रूप से टूर्नामेंट के लिए तैयार किया था।
48 टीमों ने जारी कीं 108 जर्सियां
विश्व कप से पहले सभी 48 देशों ने मिलकर कुल 108 जर्सियां लॉन्च की हैं। इसमें गोलकीपर किट शामिल नहीं हैं। आमतौर पर हर टीम के पास दो मुख्य जर्सियां होती हैं, जिन्हें होम और अवे किट कहा जाता है। इसके अलावा 12 देशों ने तीसरी जर्सी भी तैयार की है ताकि जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।
हालांकि फीफा ने ग्रुप चरण के 72 मैचों के लिए पहले से तय कर दिया है कि किस टीम को किस मुकाबले में कौन-सी जर्सी पहननी होगी। यही वजह है कि कई नई और आकर्षक जर्सियां शुरुआती दौर में देखने को नहीं मिलेंगी।
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इन देशों की अवे जर्सी नहीं दिखेगी
फीफा के निर्णय के अनुसार, कई प्रमुख फुटबॉल देशों को अपने तीनों ग्रुप मैचों में अवे जर्सी पहनने की अनुमति नहीं दी गई है।इन देशों में पुर्तगाल, सेनेगल, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, कुराकाओ, डीआर कांगो, ईरान, आइवरी कोस्ट, जापान और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इन टीमों की अवे किट भले ही प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय हो, लेकिन ग्रुप चरण में वे मैदान पर नजर नहीं आएंगी।
तीसरी जर्सी भी नहीं पहन पाएंगे कुछ देश
कुछ देशों ने अपनी थर्ड किट को लेकर काफी उत्साह दिखाया था, लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लगी है।इक्वाडोर, हैती, इराक और जॉर्डन को ग्रुप चरण के किसी भी मुकाबले में तीसरी जर्सी पहनने की अनुमति नहीं मिली है। इसका अर्थ है कि इन टीमों को केवल अपनी प्राथमिक या निर्धारित वैकल्पिक किट में ही खेलना होगा।
घाना और उज्बेकिस्तान के लिए अलग स्थिति
सबसे दिलचस्प स्थिति घाना और उज्बेकिस्तान की है। इन दोनों देशों को ग्रुप चरण के किसी भी मैच में अपनी पारंपरिक होम जर्सी पहनने का अवसर नहीं मिलेगा। यानी उनके प्रशंसकों को टीम को किसी अन्य किट में खेलते हुए देखना होगा।
कुछ देशों को मिली पूरी छूट
जहां कई देशों की जर्सियों पर प्रतिबंध जैसा प्रभाव पड़ा है, वहीं कुछ टीमों को अधिक लचीलापन मिला है।कनाडा, मेक्सिको, पनामा और केप वर्डे को ग्रुप चरण के दौरान अपनी तीनों जर्सियों का उपयोग करने की अनुमति दी गई है। इससे इन देशों की विभिन्न डिजाइनों वाली किट मैदान पर दिखाई देंगी।
वहीं इंग्लैंड और स्कॉटलैंड को अपनी दोनों मुख्य जर्सियां पहनने की मंजूरी मिली है। विशेष रूप से स्कॉटलैंड के गोलकीपर को ग्रुप चरण के तीनों मैचों में अलग-अलग जर्सी पहनने की अनुमति दी गई है।
जर्सी से जुड़ी रणनीति भी अहम
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि जर्सी केवल पहचान का प्रतीक नहीं होती, बल्कि टीम की ब्रांड वैल्यू, मार्केटिंग और प्रशंसकों की भावनाओं से भी जुड़ी होती है। इसलिए फीफा का यह फैसला कई देशों के लिए निराशाजनक हो सकता है।
हालांकि नॉकआउट चरण में पहुंचने वाली टीमों को अपनी अन्य जर्सियों का उपयोग करने का मौका मिल सकता है। लेकिन इसके लिए पहले ग्रुप चरण की चुनौती पार करनी होगी।विश्व कप शुरू होने से पहले जर्सियों को लेकर हुई यह चर्चा एक बार फिर साबित करती है कि फुटबॉल केवल खेल नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी उत्सव है