खिलाड़ियों से हाथ जोड़कर टी20 विश्व कप खेलने की गुहार लगाता था : ललित मोदी का खुलासा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-06-2026
‘I used to plead with the players, with folded hands, to play in the T20 World Cup’ — Lalit Modi’s major revelation.
‘I used to plead with the players, with folded hands, to play in the T20 World Cup’ — Lalit Modi’s major revelation.

 

नई दिल्ली:

आज टी20 क्रिकेट दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल प्रारूपों में से एक बन चुका है। खिलाड़ियों से लेकर प्रशंसकों और प्रसारकों तक, हर कोई इसकी लोकप्रियता का हिस्सा है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब क्रिकेट के बड़े सितारे इस प्रारूप को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं थे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष Lalit Modi ने 2007 के पहले टी20 विश्व कप से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि उन्हें भारतीय खिलाड़ियों से इस टूर्नामेंट में भाग लेने की गुजारिश करनी पड़ी थी।

एक विशेष बातचीत में ललित मोदी ने बताया कि 2007 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर थी, तब उन्होंने खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में जाकर उनसे टी20 विश्व कप खेलने का अनुरोध किया था। लेकिन उस समय कई वरिष्ठ खिलाड़ी इस नए प्रारूप को लेकर उत्साहित नहीं थे।

मोदी के अनुसार, अधिकांश खिलाड़ियों का मानना था कि यह क्रिकेट का गंभीर प्रारूप नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं इंग्लैंड में भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में गया और खिलाड़ियों से कहा कि कृपया टी20 विश्व कप खेलिए। लेकिन कई खिलाड़ियों ने मुझसे कहा, ‘ललित, क्या आप मजाक कर रहे हैं? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसे नहीं खेलना चाहते।’”

उन्होंने बताया कि लंबे दौरे के बाद खिलाड़ी अपने परिवारों के साथ समय बिताना चाहते थे और टी20 विश्व कप को प्राथमिकता नहीं दे रहे थे। मोदी ने कहा कि आज के दौर में अगर कोई खिलाड़ी विश्व कप खेलने से इनकार करे तो देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा।

ललित मोदी ने यह भी दावा किया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने 2007 के टी20 विश्व कप में अपनी पूरी ताकत वाली टीम नहीं भेजी थी। उस समय MS Dhoni के नेतृत्व में एक युवा और अपेक्षाकृत अनुभवहीन टीम को दक्षिण अफ्रीका भेजा गया था।

उन्होंने कहा, “उस समय Sachin Tendulkar, Rahul Dravid और Sourav Ganguly जैसे बड़े खिलाड़ी टीम का हिस्सा नहीं थे। आज क्या कोई विश्व कप में बी टीम भेजने की कल्पना भी कर सकता है? न जनता इसे स्वीकार करेगी और न ही बोर्ड।”

मोदी ने कहा कि शुरुआती दौर में भारत में टी20 क्रिकेट को लेकर लोगों का उत्साह बहुत कम था। टेलीविजन दर्शक नहीं थे, इसलिए विज्ञापनदाता और प्रसारण कंपनियां भी इसमें खास रुचि नहीं दिखा रही थीं।

उन्होंने कहा, “अगर दर्शक नहीं हैं तो विज्ञापन नहीं होंगे और अगर विज्ञापन नहीं होंगे तो पैसा भी नहीं आएगा। आज टी20 क्रिकेट इसलिए सफल है क्योंकि करोड़ों लोग इसे देखते हैं।”

पूर्व आईपीएल प्रमुख ने यह भी कहा कि 2007 का पहला टी20 विश्व कप शुरुआत में ज्यादा लोकप्रिय नहीं था। उनके मुताबिक टूर्नामेंट की लोकप्रियता तब अचानक बढ़ी जब Yuvraj Singh ने इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के जड़ दिए।

मोदी ने कहा कि युवराज की उस ऐतिहासिक पारी ने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी। इसके बाद दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ी और दुनिया भर का ध्यान टी20 क्रिकेट की ओर गया।

गौरतलब है कि 2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पहला आईसीसी टी20 विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया था। उस जीत ने न केवल भारतीय क्रिकेट को नई दिशा दी, बल्कि टी20 क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।