Changing the colour of hockey team's jersey is another example of falling standards: Sibal
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर केसरिया किए जाने की शनिवार को आलोचना करते हुए इसे ‘‘गिरते स्तर का एक और उदाहरण’’ बताया तथा कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया।
अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम अपनी पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय केसरिया रंग की जर्सी में नजर आएंगी। इस बदलाव पर पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं, जबकि हॉकी इंडिया ने इसे तकनीकी आवश्यकता बताते हुए इसका बचाव किया है।
सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘एफआईएच हॉकी विश्व कप : टीम की पारंपरिक नीली जर्सी अब भगवा हो गई। न हॉकी इंडिया के अध्यक्ष को इसकी जानकारी थी और न ही कार्यकारी बोर्ड को।’’
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘‘तर्क यह है कि अगर जर्सी केसरिया होगी तो दिमाग भी भगवा हो जाएगा। गिरते स्तर का ऐसा उदाहरण पहले कभी नहीं देखा।’’
‘हॉकी इंडिया’ ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि इसका डिजाइन और रंग ‘एक कहानी बयां करने’ तथा ‘भारत के गौरव’ को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। संस्था ने कहा कि खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ से विचार-विमर्श के बाद इस जर्सी को अंतिम रूप दिया गया।
हालांकि, हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि यह फैसला उनकी जानकारी के बिना लिया गया। वहीं, महासचिव भोला नाथ सिंह ने इससे अलग रुख अपनाते हुए दावा किया कि ‘‘इस बदलाव की जानकारी सभी अधिकारियों को थी।’’
इस फैसले की वासुदेवन भास्करन, वीरेन रासकिन्हा, अजीत पाल सिंह और परगट सिंह जैसे कई पूर्व खिलाड़ियों ने भी तीखी आलोचना की। उनका कहना है कि इस तरह का फैसला दशकों में बनी टीम की पहचान को प्रभावित कर सकता है और इसकी कोई ठोस वजह समझ में नहीं आती।