Calls raised for FIFA President Infantino's resignation.
मैड्रिड
स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लीगा के अध्यक्ष जेवियर टेबास ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनसे पद छोड़ने की मांग की है। टेबास का कहना है कि इन्फेंटिनो का कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है और फीफा को नए नेतृत्व की जरूरत है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके इस्तीफा देने की संभावना बेहद कम दिखाई देती है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, टेबास ने कहा कि फीफा की वर्तमान व्यवस्था ऐसी बन गई है, जिसमें इन्फेंटिनो के खिलाफ कोई मजबूत उम्मीदवार सामने नहीं आता। उनका मानना है कि कई लोग निजी तौर पर फीफा अध्यक्ष की नीतियों और फैसलों से असहमत हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उनका विरोध करने का साहस नहीं जुटा पाते।
टेबास ने कहा, "मेरी राय में इन्फेंटिनो का समय पूरा हो चुका है। उन्हें अब इस पद पर नहीं रहना चाहिए। लेकिन मौजूदा व्यवस्था ऐसी है कि उनके जाने की संभावना नहीं दिखती।"
'फीफा की व्यवस्था में खामियां हैं'
ला लीगा प्रमुख ने कहा कि फीफा में नेतृत्व परिवर्तन आसान नहीं है, क्योंकि संगठन की चुनावी व्यवस्था संभावित उम्मीदवारों को आगे आने से हतोत्साहित करती है। उनके अनुसार, कोई भी ऐसा चुनाव नहीं लड़ना चाहता जिसमें हार पहले से तय मानी जाए।
उन्होंने कहा, "इन्फेंटिनो के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं है। कोई भी केवल हारने के लिए चुनाव नहीं लड़ना चाहता। यही मौजूदा व्यवस्था है और इसकी खामियां शुरुआत से ही मौजूद हैं।"
टेबास का दावा है कि कई फुटबॉल प्रशासक और अधिकारी निजी बातचीत में इन्फेंटिनो की कार्यशैली की आलोचना करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाते।
फोलारिन बालोगुन मामले पर भी उठाए सवाल
जेवियर टेबास ने फीफा के उस फैसले की भी कड़ी आलोचना की, जिसमें अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का एक मैच का निलंबन वापस ले लिया गया था।
बालोगुन को विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ मुकाबले में रेड कार्ड मिलने के बाद एक मैच के लिए प्रतिबंधित किया गया था। बाद में फीफा ने यह प्रतिबंध हटा दिया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में खेलने के पात्र हो गए।
टेबास ने इस फैसले को "बेहद गंभीर मामला" बताया और कहा कि इससे फीफा की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
'बेल्जियम की जीत से दब गया विवाद'
टेबास ने कहा कि फीफा के लिए यह राहत की बात रही कि बेल्जियम ने अमेरिका को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। उनके अनुसार, यदि अमेरिका आगे बढ़ जाता तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता था।
उन्होंने कहा, "वे भाग्यशाली रहे कि बेल्जियम ने अमेरिका को बाहर कर दिया। अगर ऐसा नहीं होता तो यह मामला इतना बड़ा बन सकता था कि इन्फेंटिनो की कुर्सी तक खतरे में पड़ जाती।"
टेबास ने यह भी कहा कि बालोगुन का मामला केवल "हिमखंड का ऊपरी हिस्सा" है और फीफा के प्रशासन से जुड़े कई अन्य गंभीर मुद्दे भी मौजूद हैं।
बेल्जियम की आपत्ति हुई थी खारिज
फीफा द्वारा बालोगुन का निलंबन हटाए जाने के बाद बेल्जियम फुटबॉल संघ ने इस फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि फीफा ने बेल्जियम की आपत्ति खारिज कर दी और बालोगुन को खेलने की अनुमति बरकरार रखी।
इसके बावजूद बेल्जियम ने मुकाबला जीतकर अमेरिका को विश्व कप से बाहर कर दिया। इसके साथ ही अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको—तीनों मेजबान देशों का अभियान समाप्त हो गया।
फीफा प्रशासन पर फिर छिड़ी बहस
टेबास के इन बयानों के बाद फीफा की कार्यप्रणाली और नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हालांकि फीफा या अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो की ओर से टेबास के आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खेल जगत की नजर अब इस बात पर रहेगी कि इन बयानों के बाद फीफा के भीतर नेतृत्व और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर क्या नई चर्चा शुरू होती है।