ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित में दिखाई गई असाधारण वीरता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक को प्रतिष्ठित वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान युद्धकाल में दुश्मन के सामने असाधारण बहादुरी दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है। रिजवान मलिक की इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है, वहीं मणिपुर के लोगों के लिए यह गर्व का विशेष क्षण बन गया है। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि मणिपुर के एक बेटे को अपने समर्पण, साहस और राष्ट्रसेवा के बल पर देश के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मानों में से एक प्राप्त करते देखना पूरे राज्य के लिए गर्व और खुशी की बात है।
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मौत को चुनौती देने वाला मिशन
रात बेहद अंधेरी थी। आसमान में दुश्मन के ड्रोन सक्रिय थे और नीचे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात थे। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी फाइटर जेट के लिए मिशन पूरा करना अत्यंत कठिन माना जाता है। लेकिन स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक ने खतरे की परवाह किए बिना अपने सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान को मिशन पर उड़ाया। दुश्मन की निगरानी, रडार लॉक, ड्रोन के झुंड और एयर डिफेंस नेटवर्क के बीच उन्होंने अपने विमान को सुरक्षित तरीके से लक्ष्य तक पहुंचाया और पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। उनकी इसी असाधारण बहादुरी और पेशेवर दक्षता के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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मणिपुर के छोटे गांव से भारतीय वायु सेना तक का सफर
स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक का जन्म वर्ष 1995 में मणिपुर के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनका पैतृक गांव केइखु (Keikhu) है, जो इंफाल ईस्ट जिले में स्थित है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मणिपुर के एक स्थानीय विद्यालय में हुई। बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा के प्रति उनके भीतर विशेष लगाव था। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनका चयन सैनिक स्कूल में हुआ, जहां उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उनका चयन देश की प्रतिष्ठित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में हुआ। NDA से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद 20 जून 2015 को उन्हें भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में Su-30MKI फाइटर पायलट के रूप में कमीशन किया गया। वह भारतीय वायु सेना के 195वें फ्लाइंग कोर्स का हिस्सा रहे। अपनी उत्कृष्ट सेवाओं और नेतृत्व क्षमता के कारण वर्ष 2021 में उन्हें स्क्वाड्रन लीडर के पद पर पदोन्नत किया गया।
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मैतेई पांगल समुदाय से हैं रिजवान मलिक
रिजवान मलिक मणिपुर के मैतेई पांगल समुदाय से आते हैं। इस समुदाय को मुस्लिम मैतेई समुदाय के नाम से भी जाना जाता है। मणिपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि पूरे मैतेई पांगल समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बन गई है। राज्य के युवाओं के लिए वह प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरे हैं।
परिवार की पृष्ठभूमि
रिजवान मलिक के पिता अलहाज हफीजुद्दीन राज्य सरकार के हॉर्टिकल्चर विभाग में अधिकारी रहे हैं और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी माता का नाम अलहाजन वाहीदा रहमान है। परिवार के लोगों के अनुसार, रिजवान बचपन से ही बेहद अनुशासित, मेहनती और महत्वाकांक्षी थे। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार मेहनत की और कठिन प्रशिक्षण के बाद भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट बने।
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फाइटर पायलटों के बीच अलग पहचान
भारतीय वायु सेना में रिजवान मलिक की पहचान एक अत्यंत कुशल फाइटर पायलट के रूप में की जाती है। उन्हें विशेष रूप से डीप-स्ट्राइक मिशन और एयर सुपीरियरिटी ऑपरेशन में महारत हासिल है। ऐसे मिशन जिनमें दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक प्रवेश करना होता है और अत्यधिक दबाव में सटीक निर्णय लेने पड़ते हैं, उनमें उनकी दक्षता उल्लेखनीय मानी जाती है। उनकी ट्रेनिंग उन्हें अत्यंत जटिल युद्ध परिस्थितियों में भी शांत और प्रभावी बने रहने में सक्षम बनाती है।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई निर्णायक भूमिका
7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब देने का निर्णय लिया। इसके तहत शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना और वायु सेना ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाया।
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इस अभियान के दौरान जिन आतंकी संगठनों से जुड़े ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया, उनमें शामिल थे:
विशेषज्ञों के अनुसार यह कार्रवाई बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी गई।
बिना सुरक्षा घेरे के दुश्मन के इलाके में प्रवेश
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक को एक ऐसे स्ट्राइक पैकेज का हिस्सा बनाया गया था जिसे बिना किसी अतिरिक्त सुरक्षा घेरे के दुश्मन के अत्यधिक संरक्षित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करना था। उन्होंने अपना Sukhoi Su-30MKI उड़ाते हुए पाकिस्तान के मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क को पार किया। मिशन के दौरान लगातार रडार ट्रैकिंग, ड्रोन गतिविधियों और मिसाइल खतरे मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचकर आतंकी शिविरों पर अत्यंत सटीक मिसाइल हमले किए और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। यही प्रदर्शन उनके वीर चक्र सम्मान का प्रमुख आधार बना।
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मणिपुर और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा
इंफाल ईस्ट के छोटे से गांव केइखु से निकलकर भारतीय वायु सेना के फ्रंटलाइन फाइटर विमान के कॉकपिट तक पहुंचना अपने आप में एक प्रेरणादायक यात्रा है। रिजवान मलिक ने साबित किया है कि समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी युवा देश की सर्वोच्च सैन्य सेवाओं तक पहुंच सकता है। उनकी कहानी केवल एक सैन्य अधिकारी की सफलता नहीं, बल्कि उस युवा भारत की कहानी है जो कठिन परिस्थितियों से निकलकर राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च शिखर तक पहुंच रहा है। वीर चक्र से सम्मानित स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक आज न केवल भारतीय वायु सेना का गौरव हैं, बल्कि मणिपुर, मैतेई पांगल समुदाय और पूरे देश के लिए साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का जीवंत प्रतीक बन चुके हैं।