फीफा विश्व कप ट्रॉफी: वो अनसुनी कहानियाँ जो बहुत कम लोग जानते हैं

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-01-2026
The FIFA World Cup Trophy: The untold stories that very few people know.
The FIFA World Cup Trophy: The untold stories that very few people know.

 

आवाज़ द वॉयस

फीफा विश्व कप ट्रॉफी केवल फुटबॉल की सबसे बड़ी पहचान ही नहीं है, बल्कि यह इतिहास, रोमांच, रहस्य और गौरव से जुड़ी अनगिनत कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए है। हर चार साल में जब दुनिया भर की निगाहें विश्व कप पर टिकती हैं, तब इस ट्रॉफी की चमक खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देती है। आने वाले महीनों में जब मैक्सिको, कनाडा और अमेरिका में अगला फीफा विश्व कप आयोजित होगा, तो एक बार फिर यह ट्रॉफी वैश्विक आकर्षण का केंद्र बनेगी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी का सफर जितना शानदार है, उतना ही उतार-चढ़ाव और रहस्यों से भरा हुआ भी है।

आज जिस फीफा विश्व कप ट्रॉफी को हम देखते हैं, वह पहली ट्रॉफी नहीं है। जब 1930 में विश्व कप की शुरुआत हुई थी, तब विजेता टीम को जूल्स रिमेट ट्रॉफी दी जाती थी। यह ट्रॉफी फीफा के तत्कालीन अध्यक्ष जूल्स रिमेट के नाम पर रखी गई थी और इसमें ग्रीक विजय देवी नाइके की मूर्ति थी, जो अपने सिर के ऊपर एक कप उठाए हुए थीं। यह ट्रॉफी 1970 तक इस्तेमाल में रही। नियम के अनुसार, जो देश तीन बार विश्व कप जीत ले, उसे यह ट्रॉफी स्थायी रूप से दे दी जाती थी। ब्राज़ील ने 1958, 1962 और 1970 में खिताब जीतकर यह गौरव हासिल किया और जूल्स रिमेट ट्रॉफी हमेशा के लिए उसके पास चली गई।

इसके बाद फीफा को 1974 विश्व कप के लिए एक नई ट्रॉफी बनानी पड़ी। लेकिन जूल्स रिमेट ट्रॉफी का इतिहास यहीं खत्म नहीं होता। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में हालात बेहद खराब थे और इस ट्रॉफी पर भी खतरा मंडरा रहा था। उस समय फीफा के इतालवी उपाध्यक्ष ओटोरिनो बारासी ने इसे रोम के एक बैंक वॉल्ट से निकालकर अपने घर ले आए और अपने बिस्तर के नीचे एक जूते के डिब्बे में छुपा दिया। माना जाता है कि युद्ध के उस भयावह दौर में यही जगह इस ट्रॉफी के लिए सबसे सुरक्षित साबित हुई।

इस ट्रॉफी के साथ जुड़ी सबसे चौंकाने वाली कहानियों में चोरी की घटनाएं भी शामिल हैं। जूल्स रिमेट ट्रॉफी को दो बार चुराया गया। पहली बार 1966 में इंग्लैंड में विश्व कप से पहले एक प्रदर्शनी के दौरान ट्रॉफी गायब हो गई। पूरे देश में हड़कंप मच गया, लेकिन एक हफ्ते बाद ‘पिकल्स’ नाम के एक पालतू कुत्ते ने दक्षिण लंदन में एक पेड़ के नीचे से इसे खोज निकाला। यह घटना आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे दिलचस्प कहानियों में गिनी जाती है। दूसरी चोरी 1983 में हुई, जब ब्राज़ील फुटबॉल महासंघ के कार्यालय से ट्रॉफी चुरा ली गई। दुर्भाग्यवश, यह ट्रॉफी आज तक बरामद नहीं हो सकी और माना जाता है कि इसे पिघला दिया गया।

1974 से जिस नई ट्रॉफी का इस्तेमाल हो रहा है, वह इतालवी मूर्तिकार सिल्वियो गज़ानिगा द्वारा डिजाइन की गई थी। इसके लिए सात देशों के कलाकारों ने कुल 53 डिज़ाइन पेश किए थे, जिनमें से गज़ानिगा का डिज़ाइन चुना गया। इस ट्रॉफी में दो खिलाड़ी जीत के क्षण में पूरी दुनिया को ऊपर उठाते हुए दिखाए गए हैं। इसके आधार से निकलती सर्पिल रेखाएं पृथ्वी को घेरती हुई प्रतीत होती हैं, जो फुटबॉल की वैश्विक एकता और शक्ति का प्रतीक हैं।

समय के साथ फीफा ने ट्रॉफी को लेकर नियमों में भी बदलाव किया। 2006 से पहले तक विश्व कप जीतने वाली टीम को अगला टूर्नामेंट होने तक असली ट्रॉफी अपने पास रखने की अनुमति थी। लेकिन सुरक्षा कारणों से यह व्यवस्था बदल दी गई। अब विजेता टीम को सोने की परत चढ़ी कांस्य की एक प्रतिकृति दी जाती है, जबकि असली ट्रॉफी फीफा के पास ही रहती है। मूल ट्रॉफी को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख स्थित फीफा विश्व फुटबॉल संग्रहालय में अत्यंत कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच रखा गया है और इसे केवल विशेष मौकों जैसे ट्रॉफी टूर, ड्रॉ समारोह और फाइनल मैच के बाद ही बाहर लाया जाता है।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मौजूदा ट्रॉफी के निचले हिस्से पर अब तक के सभी विश्व कप विजेता देशों के नाम और वर्ष खुदे हुए हैं। अर्जेंटीना की हालिया जीत के बाद अब इसमें केवल चार और नाम जोड़ने की जगह बची है। इसका अर्थ यह है कि 2038 तक यह ट्रॉफी पूरी तरह भर जाएगी और संभव है कि 2042 विश्व कप के लिए फीफा को एक नई ट्रॉफी बनानी पड़े।

 

कुल मिलाकर, फीफा विश्व कप ट्रॉफी सिर्फ सोने से बनी एक मूर्ति नहीं है। यह युद्ध के दौर से बचकर निकली, चोरी हुई, खोई और फिर बदली गई एक ऐसी विरासत है, जो फुटबॉल के इतिहास, जुनून और सपनों की गवाह रही है। जब कोई कप्तान इसे अपने हाथों में उठाता है, तो वह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों की उम्मीदों, संघर्षों और जीत की कहानियों को थामे होता है।