नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में क़तर की सांस्कृतिक चमक, रिकॉर्ड संख्या में उमड़े दर्शक

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 14-01-2026
Qatar's grand presence at the New Delhi World Book Fair 2026, as the 'Guest of Honour', became a major attraction.
Qatar's grand presence at the New Delhi World Book Fair 2026, as the 'Guest of Honour', became a major attraction.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर में कतर के बूथ पर रिकॉर्ड संख्या में लोग आ रहे हैं, क्योंकि यह देश गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर हिस्सा ले रहा है, जो उसकी संस्कृति और सोच-समझकर पेश की गई साहित्यिक चीज़ों में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है। संस्कृति मंत्रालय के लाइब्रेरी विभाग के डायरेक्टर जसीम अहमद अल बुऐनैन ने कतर न्यूज़ एजेंसी (QNA) को बताया कि संस्कृति मंत्रालय का बूथ मंत्रालय की रिलीज़ को दिखाकर कतर के सांस्कृतिक माहौल की पूरी तस्वीर पेश करता है, जिनमें से कई का भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है ताकि भारतीय दर्शकों को कतर के सांस्कृतिक प्रोडक्शन से परिचित कराया जा सके और दोनों देशों के बीच क्रॉस-कल्चरल कम्युनिकेशन को बढ़ावा दिया जा सके। 

नई दिल्ली में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 (NDWBF 2026) इस समय पूरे जोश के साथ जारी है, जहाँ दुनिया भर से आए पाठक, लेखक, प्रकाशक और संस्कृति प्रेमी बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कतर राज्य गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भाग ले रहा है, जिसकी उपस्थिति मेले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

कतरी आभूषण: विरासत, शान और शिल्पकला का अनूठा संगम

कतरी आभूषण केवल सजावट का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे कतर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समुद्री इतिहास और पारंपरिक शिल्पकला की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह आभूषण परंपरा अरब संस्कृति की शान, गरिमा और सौंदर्यबोध को दर्शाती है।
 
समुद्र और मोतियों से जुड़ी विरासत

कतर का ऐतिहासिक संबंध समुद्र से रहा है, और इसका प्रभाव पारंपरिक आभूषणों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्राचीन काल में मोती निकालना (पर्ल डाइविंग) कतर की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार था। इसी कारण कतरी आभूषणों में प्राकृतिक मोतियों का विशेष स्थान रहा है, जिन्हें सोने और चांदी के साथ बेहद कलात्मक ढंग से जड़ा जाता था।
 
सोने की कारीगरी और पारंपरिक डिज़ाइन

कतरी आभूषणों में उच्च शुद्धता वाले सोने का प्रयोग किया जाता है। पारंपरिक डिज़ाइनों में ज्यामितीय आकृतियाँ, पुष्प अलंकरण और अरबी नमूने देखने को मिलते हैं। ये डिज़ाइन न केवल सौंदर्यपूर्ण होते हैं, बल्कि कतरी पहचान और सांस्कृतिक प्रतीकों को भी दर्शाते हैं।
 
 
महिलाओं के पारंपरिक आभूषण

कतरी महिलाओं के आभूषण खास अवसरों और पारंपरिक समारोहों से जुड़े होते हैं। हार, झुमके, कंगन, नथ और सिर पर पहनने वाले गहने पारंपरिक पोशाक के साथ एक संपूर्ण और गरिमामय रूप प्रस्तुत करते हैं। इन आभूषणों में बारीक नक़्क़ाशी और हाथ से की गई कारीगरी विशेष आकर्षण होती है.
 
 
शिल्पकला और कारीगरों की भूमिका

कतरी आभूषणों की पहचान कुशल कारीगरों की मेहनत और कला से जुड़ी है। पारंपरिक कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी कला को आगे बढ़ाते आए हैं। हाथ से बनाए गए ये आभूषण न केवल अद्वितीय होते हैं, बल्कि कतरी सांस्कृतिक स्मृति का भी हिस्सा होते हैं।
 
आधुनिकता के साथ परंपरा का मेल

आज के समय में कतरी आभूषण पारंपरिक शैली के साथ आधुनिक डिज़ाइन का भी समावेश कर रहे हैं। समकालीन कतरी ज्वेलरी डिज़ाइनर पारंपरिक तत्वों को नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे ये आभूषण वैश्विक मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
 
कतरी आभूषण: पहचान और गौरव

कतरी आभूषण कतर की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक हैं। वे न केवल सौंदर्य को बढ़ाते हैं, बल्कि अतीत की कहानियों और परंपराओं को भी जीवित रखते हैं। 

वैश्विक मंच पर कतर की सांस्कृतिक पहचान का सशक्त प्रदर्शन

कतर के संस्कृति मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मेले में भागीदारी वैश्विक स्तर पर देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसके माध्यम से कतर अपनी स्थानीय बौद्धिक, साहित्यिक और रचनात्मक विधाओं को एक विविध अंतरराष्ट्रीय दर्शक वर्ग के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। यह पहल कतर को नवाचार, विचारों और सांस्कृतिक-सभ्यतागत विविधता के वैश्विक संगम के रूप में स्थापित करती है।

 

अरब और वैश्विक सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़ाव

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में कतर की भागीदारी अरब और वैश्विक सांस्कृतिक परिदृश्य के समर्थन में देश के निरंतर प्रयासों की कड़ी है। इस सहभागिता के ज़रिए सांस्कृतिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन गृहों के साथ सहयोग को सुदृढ़ किया जा रहा है। साथ ही, यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वैश्विक अनुभवों के प्रति खुलेपन और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

पारंपरिक कतरी वास्तुकला से प्रेरित आकर्षक पवेलियन

मेले में कतर का पवेलियन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पारंपरिक कतरी वास्तुकला से प्रेरित इस पवेलियन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आगंतुकों को एक समग्र और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त हो। यहाँ आगंतुक कतरी संस्कृति की झलक पा रहे हैं, देश के नवीनतम प्रकाशनों को देख रहे हैं और पारंपरिक हस्तशिल्प से परिचित हो रहे हैं।

विश्व पुस्तक मेले में क़तर का एक विशेष स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल पर आधुनिक तकनीक और रचनात्मकता का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉडल मौजूद है। यहां आगंतुक अपनी पसंद के केवल तीन शब्द चुनते हैं और एआई तुरंत उन्हीं शब्दों के आधार पर एक सुंदर कविता रच देता है। तकनीक के माध्यम से साहित्य को नए अंदाज़ में प्रस्तुत करने वाला यह स्टॉल खासतौर पर युवाओं और साहित्य प्रेमियों को खूब भा रहा है।

कतरी लोक विरासत का जीवंत और इंटरैक्टिव अनुभव

कतरी पवेलियन केवल पुस्तकों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत सांस्कृतिक मंच के रूप में उभर रहा है। इंटरैक्टिव अनुभवों के माध्यम से आगंतुकों को कतरी लोककथाओं, परंपराओं और समय-सम्मानित सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिल रहा है। यह प्रस्तुति कतर की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत रूप में सामने लाती है।

संस्कृति संवाद का प्रभावी सेतु

दोहा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के निदेशक जासिम अहमद अल-बुऐनैन ने कहा कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में कतर की मौजूदगी उसकी वैश्विक सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को दर्शाती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्कृति विभिन्न सभ्यताओं के बीच संवाद और मानवीय समझ को बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है, विशेष रूप से भारत जैसे देश में, जो विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक रहा है और जिसने वैश्विक ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया है।

साहित्य, विचार और कला की व्यापक प्रस्तुति

अल-बुऐनैन ने आगे बताया कि यह भागीदारी साहित्य, कविता, विचार और कला के क्षेत्रों में कतरी बौद्धिक सृजन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर रही है। इसके साथ ही यह वैश्विक मंचों पर अरब संस्कृति की उपस्थिति को सशक्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

अतीत और वर्तमान का संतुलित संगम

कतरी पवेलियन की रूपरेखा देश की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित है, जो राष्ट्रीय पहचान को दर्शाने के साथ-साथ अतीत और वर्तमान के बीच के संबंध को भी उजागर करती है। इसमें प्रामाणिकता और आधुनिक रचनात्मकता का संतुलित मेल देखने को मिलता है, जो आगंतुकों को गहराई से प्रभावित कर रहा है।

विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी मेले की रौनक

मेले के दौरान कतर की ओर से एक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें विचार-गोष्ठियाँ, साहित्यिक व्याख्यान और बौद्धिक चर्चाएँ शामिल हैं। इसके अलावा कतरी लोक नृत्य मंडली द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा पारंपरिक अर्धा नृत्य और अन्य लोक कलाएँ दर्शकों को कतरी सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अनुभूति करा रही हैं।

पारंपरिक हस्तशिल्प का सजीव प्रदर्शन

कतरी पवेलियन में पारंपरिक हस्तशिल्प का सजीव प्रदर्शन भी किया जा रहा है। यहाँ आगंतुक कारीगरों को काम करते हुए देख रहे हैं, उनकी बारीक कारीगरी को नजदीक से समझ रहे हैं और उनसे सीधे संवाद कर रहे हैं। यह अनुभव दर्शकों को कतरी शिल्प परंपरा से भावनात्मक रूप से जोड़ रहा है।

ज्ञान और संस्कृति के वैश्विक संवाद की मिसाल

कुल मिलाकर, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में कतर की भागीदारी ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के वैश्विक संवाद को नई दिशा दे रही है। यह न केवल कतरी बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर कर रही है, बल्कि भारत और कतर के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी और अधिक सुदृढ़ बना रही है।