पल्लब भट्टाचार्य
भारत ने नई दिल्ली में 16वें ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी की। इसी बैठक के दौरान 22जून 2026को एक बहुत महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
अजित डोभाल ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव गदीर निजामीपुर के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। यह दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 22और 23जून को आयोजित किया गया था। इसमें चीन, ब्राजील और इथियोपिया जैसे देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए थे।
यह बैठक इसलिए भी खास थी क्योंकि यह अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते के तुरंत बाद हुई। दोनों देशों ने 14सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते ने 110 दिनों से चल रहे विनाशकारी सैन्य संघर्ष को खत्म कर दिया। अजित डोभाल और निजामीपुर की इस मुलाकात से साफ है कि भारत इस बदलते दौर में पश्चिम एशिया के साथ अपने रिश्तों को नए सिरे से मजबूत कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध इसी साल 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। तब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था।
यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। दुनिया का 20प्रतिशत तेल और एलएनजी व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसके बंद होने से आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो गया था। फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज फंस गए थे। जहाजों का बीमा बहुत महंगा हो गया था और पूरी दुनिया में सामान के दाम बढ़ गए थे।
भारत पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा था। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। भारत अपनी जरूरत का 40प्रतिशत कच्चा तेल और 90प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से मंगाता है। इस नाकेबंदी के कारण भारत का आयात बिल बहुत बढ़ गया था। इससे देश में महंगाई का खतरा पैदा हो गया था।
अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेशेशक्यान के बीच वर्साय में एक समझौता हुआ है। 19 जून 2026 को इस समझौते की पुष्टि की गई। इसके तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत रोक दी गई हैं।
अमेरिका अगले 30दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा लेगा। ईरान ने भी वादा किया है कि वह कम से कम 60दिनों तक इस समुद्री रास्ते से जहाजों को बिना किसी शुल्क के जाने देगा।
ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की देखरेख में रखेगा। अमेरिका भी ईरान के तेल व्यापार और बैंकिंग सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का फंड बनाया जाएगा। दोनों पक्षों के पास अंतिम समझौते के लिए 60दिनों का समय है।

इस समझौते से भारत को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है। सबसे बड़ी राहत यह है कि भारत को अब बिना किसी बाधा के तेल और गैस मिल सकेगी। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 80डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है।
इससे भारत में महंगाई कम होगी और रुपया मजबूत होगा। विमानन, पेट्रोकेमिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को इससे बहुत मदद मिलेगी। विश्व बैंक ने पहले ही भारत की विकास दर 6.6प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। इस शांति समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ेगी।
India has welcomed the US-Iran Memorandum of Understanding, with National Security Adviser Ajit Doval calling it a significant step towards regional peace, energy security and global economic stability. Speaking at the BRICS National Security Advisers' meeting, Doval said the… pic.twitter.com/05fpjFJFhL
— Mojo Story (@themojostory) June 23, 2026
ऊर्जा सुरक्षा के अलावा भारत के लिए चाबहार बंदरगाह को दोबारा शुरू करने का यह बेहतरीन मौका है। भारत ने चाबहार के शहीद बेहिश्ती टर्मिनल को विकसित करने में 120मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
यह मार्ग पाकिस्तान को दरकिनार कर भारत को सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस से जोड़ता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह काम रुक गया था। भारत ने अपने इस साल के बजट में चाबहार के लिए कोई पैसा भी आवंटित नहीं किया था।
लेकिन अब अमेरिकी प्रतिबंध हटने से चाबहार परियोजना को दोबारा नई जिंदगी मिलेगी। भारत इसके जरिए 7,200 किलोमीटर लंबे अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) के काम में तेजी ला सकता है। इससे मुंबई से मॉस्को तक सामान भेजने का समय स्वेज नहर के मुकाबले आधा हो जाएगा।
अजित डोभाल और ईरानी अधिकारी की यह मुलाकात भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दर्शाती है। भारत किसी भी एक महाशक्ति के दबाव में काम नहीं करता है। भारत ने सात साल के अंतराल के बाद अप्रैल 2026 में ही ईरान से फिर से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया था। ब्रिक्स की बैठक भी यह साबित करती है कि भारत दुनिया में एक स्वतंत्र और मजबूत शक्ति के रूप में उभर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक व्यापार को बड़ी राहत मिली है। युद्ध के दौरान इस रास्ते से होने वाला व्यापार 95 प्रतिशत तक गिर गया था। इसे पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ महीने लगेंगे। हालांकि इस समझौते की खबर से एशियाई शेयर बाजारों में भारी तेजी देखी गई है। ईरान का तेल बाजार में वापस आने से विकासशील देशों को सस्ती ऊर्जा मिलेगी।
आने वाले 60 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण हैं क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजरायल की भूमिका जैसे कई पेंच फंसे हैं। भारत ब्रिक्स के मंच से शुरू हुई इस बातचीत को आगे बढ़ाते हुए इस शांति प्रक्रिया में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।