15 वर्षीय तनाज सैकिया की कलम में दिखती है विचारों की गहराई

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 05-11-2026
The depth of thought is evident in the writing of 15-year-old Tanaz Saikia.
The depth of thought is evident in the writing of 15-year-old Tanaz Saikia.

 

आरिफुल इस्लाम/गुवाहाटी

प्रतिभा किसी उम्र या भौगोलिक सीमाओं की मोहताज नहीं होती। असम के कामरूप जिले के रंगिया की 15 वर्षीय प्रतिभाशाली किशोरी ने यह साबित कर दिया है कि कड़ी मेहनत, लगन, दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से इंसान किसी भी परिस्थिति में सफलता हासिल कर सकता है। कामरूप (ग्रामीण) जिले के रंगिया महकुमे के तहत आने वाले साहन गांव की बहुमुखी प्रतिभा की धनी तनाज सैकिया ने अपनी असाधारण रचनात्मकता से पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

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अथक प्रयास और साहित्य के प्रति अगाध प्रेम से प्रेरित होकर तनाज ने 'द बर्निंग लाइट' शीर्षक से अपना एक कविता संग्रह प्रकाशित किया। इस किताब को साहित्यिक गलियारों में काफी सराहना मिली और इसने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई। हाल ही में उन्हें इस कविता संग्रह के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित 'लेगेसी ऑफ लिटरेसी' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। स्कूल में पढ़ते हुए इतनी छोटी सी उम्र में ऐसी पहचान हासिल करना एक दुर्लभ और सराहनीय उपलब्धि है।

वर्तमान में रंगिया के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा तनाज ने अपनी इस उपलब्धि से हर तरफ ध्यान आकर्षित किया है, जिससे पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है।

'आवाज - द वायस' के साथ बातचीत में तनाज ने कहा: “मैंने एक साल पहले अपना कविता संग्रह 'द बर्निंग लाइट' प्रकाशित किया था। इसमें लगभग 50 कविताएं हैं। हाल ही में, मैंने 'लिटरेचर टाइम्स' द्वारा आयोजित 'लेगेसी ऑफ लिटरेसी' पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था।

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मेरे कविता संग्रह को नामांकित किया गया और अंततः मुझे यह पुरस्कार मिला। जब मैंने आवेदन किया था, तो मुझे जीतने की उम्मीद नहीं थी। इस सम्मान ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया है और साहित्य के क्षेत्र में आगे भी बेहतरीन काम करते रहने के लिए प्रेरित किया है।”

तनाज ने आगे बताया, “मैंने 5वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान कविताएं लिखना शुरू किया था। मुझे शुरुआती प्रेरणा अपने बड़े भाई से मिली। वह कविताएं लिखते हैं और उन्हें देखकर ही मुझे भी लिखने की प्रेरणा मिली। मैं अपनी सोच और भावनाओं को कविताओं के जरिए व्यक्त करने की कोशिश करती हूं।

हमारे जैसे युवा अक्सर अपने दिल की हर बात दूसरों से साझा नहीं कर पाते। इसलिए मैंने उन अनकही बातों को कविता के रूप में पिरोना शुरू कर दिया। अब तक मैं 200 से अधिक कविताएं लिख चुकी हूं। जिनमें से 50 प्रकाशित हो चुकी हैं और मुझे उम्मीद है कि मैं बाकी बची 150 कविताओं को भी जल्द ही प्रकाशित करवा पाऊंगी।”

उनकी प्रतिभा सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बचपन से ही साहित्य और संस्कृति की ओर गहरा रुझान रखने वाली तनाज अंग्रेजी में बेहद खूबसूरत कविताएं लिखती हैं। उनकी कविताएं जीवन की सच्चाइयों, प्रकृति की सुंदरता और मानवीय भावनाओं को इतनी संवेदनशीलता के साथ दर्शाती हैं कि वे सीधे पाठकों के दिल को छू लेती हैं।

साहित्य के साथ-साथ तनाज की संगीत और कला में भी गहरी रुचि और पकड़ है। कविताओं के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करने के अलावा, वह एक बेहतरीन गायिका और वाद्ययंत्र वादक भी हैं। वह फिलहाल संगीत की औपचारिक शिक्षा ले रही हैं और लगातार अपनी आवाज पर काम कर रही हैं। वाद्ययंत्र बजाने में भी उनकी अच्छी कुशलता है और खाली समय में गिटार और हरमोनियम बजाकर उन्हें एक अलग ही आंतरिक आनंद मिलता है।

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तनाज कहती हैं, “मैं खुद गाने लिखना चाहती हूं, उनका संगीत तैयार करना चाहती हूं और उन्हें खुद ही गाना चाहती हूं। मुझे उम्मीद है कि निकट भविष्य में मैं अपना एक म्यूजिक एलबम भी रिलीज करूंगी। मैं अभी संगीत सीख रही हूं और मुझे विश्वास है कि सही प्रशिक्षण के साथ मैं अपने इस सपने को जरूर पूरा कर पाऊंगी।”

शायरी, गायकी और वाद्ययंत्र बजाना तनाज को न केवल आनंद देता है, बल्कि उनकी पढ़ाई पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा, “ये सभी गतिविधियां मुझे मानसिक रूप से शांत रखती हैं और मेरी पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाती हैं। इनसे मुझे हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (HSLC) परीक्षा की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलती है।”

उनकी इस सफलता में उनके माता-पिता के योगदान और त्याग की सबसे बड़ी भूमिका रही है। एक साधारण से गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की पहचान बनाने तक का सफर तनाज के लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके माता-पिता के निरंतर प्रयासों, अपार मेहनत और अटूट भावनात्मक संबल ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की। उन्होंने हर कदम पर अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया और उसकी प्रतिभा को निखारने के लिए जरूरी साधन और अवसर प्रदान किए। उनका निस्वार्थ त्याग और प्रोत्साहन ही तनाज के जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।

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तनाज के पिता, डॉ.अब्दुल सलाम ने कहा, “माता-पिता के रूप में हम बेहद खुश हैं। जब तनाज ने लिखना शुरू किया, तो हमें लगा कि वह बस अपने शौक के लिए कविताएं लिख रही है। शुरुआत में हमने इस पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन जिस उम्र में बच्चे तितलियों के पीछे भागते हैं, उस उम्र में उसने जो पहचान हासिल की है, उसे देखकर मुझे यकीन है कि वह बहुत आगे जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं उसकी कविताएं पढ़ता हूं, तो मैं भी हमेशा उन्हें पूरी तरह नहीं समझ पाता। जब भी मैं उसकी कोई कविता पढ़ता हूं, तो मुझे कुछ शब्दों के अर्थ उससे पूछने पड़ते हैं। उसकी कविताएं बहुत गूढ़ और विचारशील होती हैं। मुझे सबसे ज्यादा जो बात प्रभावित करती है, वह है इस उम्र में उसकी कविताओं की गहराई। वह निश्चित रूप से भविष्य में एक लंबा सफर तय करेगी।”

“हम अक्सर अपने बच्चों को एक तय दायरे या बंदिशों में पालने की कोशिश करते हैं। यह सही बात नहीं है। हमारा समाज बच्चों को ऐसी सीमाओं में बांधता आ रहा है, और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। कई बच्चे अपने माता-पिता से अपने विचार खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, और इसके परिणामस्वरूप कई प्रतिभाएं खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं।”

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अपने भविष्य के लक्ष्यों और सपनों के बारे में बात करते हुए तनाज ने कहा कि वह एक स्थापित और सफल लेखिका बनना चाहती हैं। वह अपने लेखन के माध्यम से समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ना चाहती हैं और साहित्य में अपना सार्थक योगदान देना चाहती हैं। उनका यह सफर निसंदेह उनकी उम्र के कई अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत है।