कायमखानी वोटों पर भाजपा की नजर, मुख्यमंत्री संवाद के बाद पंचायत चुनाव में दो महिलाओं को टिकट

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 05-11-2026
BJP eyes Kayamkhani votes in Shekhawati; two women get tickets for Panchayat elections after Chief Minister's interaction
BJP eyes Kayamkhani votes in Shekhawati; two women get tickets for Panchayat elections after Chief Minister's interaction

 

अशफाक कायमखानी/सीकर(राजस्थान)

राजस्थान की राजनीति में शेखावटी जनपद का अलग महत्व है। यहां का कायमखानी मुस्लिम समुदाय लंबे समय से सियासी समीकरण बदलने में बड़ी भूमिका निभाता आया है। हाल ही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जयपुर स्थित सरकारी आवास पर कायमखानी बिरादरी के साथ हुआ जन संवाद कार्यक्रम अब राज्य की राजनीति में नए संकेत दे रहा है। पंचायत चुनाव 2026 के बीच हुए इस कार्यक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सीकर और झुंझुनू जिला परिषद चुनाव में कायमखानी समाज की दो महिलाओं को मैदान में उतारा है। इससे साफ है कि भाजपा की नजर अब इस प्रभावशाली मुस्लिम वोट बैंक पर टिक गई है।

ffशेखावटी के सीकर, झुंझुनू और चूरू जिलों में कायमखानी मतदाताओं का मजबूत प्रभाव है। ऐतिहासिक रूप से इस समुदाय का झुकाव कांग्रेस की तरफ अधिक रहा है। हालांकि भाजपा ने भी समय-समय पर इस क्षेत्र में मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं।

जिला परिषद के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो दोनों ही प्रमुख दलों से मुस्लिम सदस्य जीतकर आते रहे हैं। लेकिन कांग्रेस ने कभी इस क्षेत्र से किसी मुस्लिम सदस्य को जिला प्रमुख या उप जिला प्रमुख की जिम्मेदारी नहीं दी। वहीं 2010 से 2015 के कार्यकाल में भाजपा ने चूरू जिला परिषद से जीते रफीक खान को उप जिला प्रमुख बनाया था।

वर्तमान पंचायत चुनाव 2026 में भाजपा ने सीकर जिला परिषद के वार्ड 47 से जरीना खान को प्रत्याशी बनाया है। दूसरी तरफ झुंझुनू जिला परिषद के वार्ड 1 से जमीला खान को टिकट दिया है। इन दोनों सीटों पर उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के मुस्लिम उम्मीदवारों से हो रहा है। चूरू जिला परिषद में इस बार दोनों मुख्य दलों ने किसी मुस्लिम प्रत्याशी को मौका नहीं दिया है। वहीं सीकर में कांग्रेस ने एक और झुंझुनू में दो मुस्लिम चेहरे उतारे हैं।

जयपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम के पीछे कई प्रमुख सामाजिक हस्तियों का प्रयास रहा। बेसवा गांव की पूर्व सरपंच और पुलिस अधिकारी अरशद अली खान की पत्नी जरीना खान, राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत खान तथा शिक्षक नेता आमीन कायमखानी के प्रयासों से यह आयोजन संभव हुआ। इसमें प्रदेश भर से आए कायमखानी समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

ffकार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कायमखानी समाज के गौरवशाली इतिहास को याद किया। उन्होंने देश की रक्षा, सेना में योगदान, शहादत और कर्तव्यनिष्ठा के लिए समाज की सराहना की।

इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अन्य पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में कायमखानी समुदाय को शामिल करने मांग रखी। पंचायत चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होने के कारण मुख्यमंत्री ने कोई घोषणा नहीं की। हालांकि उन्होंने सकारात्मक संकेत देकर समाज की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिलाया।

राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में भजनलाल शर्मा पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं जिन्होंने अपने सरकारी आवास पर कायमखानी समाज को आमंत्रित कर प्रत्यक्ष संवाद किया। इस पहल की समाज में काफी सराहना हो रही है। इस घटनाक्रम से जरीना खान का सियासी प्रभाव भी बढ़ा है। जरीना खान शेखावाटी के बड़े गांव बेसवा में दो बार सरपंच रह चुकी हैं और अब सीकर जिला परिषद से अपनी किस्मत आजमा रही हैं।

कायमखानी बिरादरी का इतिहास बेहद दिलचस्प है। राजपूत से मुस्लिम बनी यह बिरादरी पारंपरिक रूप से खेती, पुलिस और सैन्य सेवाओं में सक्रिय रही है। भारतीय थल सेना में कायमखानी बटालियन का अपना विशिष्ट स्थान है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा का स्तर बढ़ने से इस समाज के युवा प्रशासनिक सेवाओं और नागरिक सेवाओं में भी आगे आ रहे हैं।

राजनीतिक धरातल पर कायमखानी समाज हमेशा व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता रहा है। इस बिरादरी से जुड़े नेताओं ने कांग्रेस के अलावा स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी और भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता है।

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फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से आलम अली खां स्वतंत्र पार्टी और जनता पार्टी के टिकट पर विधायक रहे। वहीं रमजान खां और यूनुस खां ने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर राज्य सरकार में मंत्री पद संभाला। यूनुस खां ने राजस्थान की राजनीति में नया इतिहास रचा जब वे डीडवाना सीट से राज्य के पहले निर्दलीय मुस्लिम विधायक चुने गए।

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पंचायत चुनाव 2026 के इस दौर में भाजपा का यह कदम शेखावटी के सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है। 14 अक्टूबर को होने वाले मतदान के बाद मतपेटी से निकलने वाले नतीजे तय करेंगे कि मुख्यमंत्री के इस संवाद का कितना असर धरातल पर पड़ा है। चुनाव परिणाम के बाद यह भी देखना होगा कि जीत दर्ज करने वाले कायमखानी प्रतिनिधियों को उनकी पार्टियां संगठन और सत्ता में क्या स्थान देती हैं।