बिहार के अज़हर इक़बाल ने कैसे खड़ी की इनशॉर्ट्स जैसी बड़ी कंपनी?

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 26-10-2026
How did Azhar Iqubal from Bihar build a major company like InShorts?
How did Azhar Iqubal from Bihar build a major company like InShorts?

 

ज़ेबा नसीम 

जो कभी एक प्रयोग था, उसे आज दुनिया 'इनशॉर्ट्स' (Inshorts) के नाम से जानती है। यह एक ऐसे युवा का विचार था जिसने महसूस किया कि दुनिया बहुत व्यस्त हो गई है। हर कोई अपनी जिंदगी में उलझा हुआ है। ऐसे में, खबरों के सार को संक्षिप्त रूप में पेश करने का विचार एक नया प्रयोग था। इसका श्रेय अज़हर इक़बाल को जाता है, जिन्होंने 2013 में यह प्रयोग शुरू किया और बाद में लोगों के समाचार पढ़ने का तरीका ही बदल दिया। 'न्यूज़ इन शॉर्ट्स' (News in Shorts) नाम से शुरू हुआ एक साधारण सा फेसबुक पेज, आज 'इनशॉर्ट्स' के रूप में एक बड़ी डिजिटल कंपनी बन चुका है।

बिहार का एक युवा और उसका बड़ा सपना

अज़हर इक़बाल बिहार के किशनगंज के रहने वाले हैं। उनका पालन-पोषण एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें नई चीजें सीखने और ज्ञान हासिल करने में गहरी रुचि थी। पढ़ाई-लिखाई में वे काफी अच्छे थे और IIT में दाखिले के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) पास करने के बाद, 2009 में उन्होंने IIT दिल्ली में प्रवेश लिया।
 
IIT दिल्ली में, उन्होंने गणित और कंप्यूटर साइंस से जुड़ा एक इंटीग्रेटेड हायर एजुकेशन प्रोग्राम पढ़ा। हालांकि, IIT में पढ़ाई के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि उनके सपने केवल पारंपरिक शिक्षा और एक सामान्य नौकरी तक सीमित नहीं हैं। इसी सोच के साथ, उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ देने का फैसला किया।
 
अज़हर इक़बाल का जन्म 18 जनवरी 1992 को हुआ था। बचपन से ही उनके मन में कुछ बड़ा करने की तीव्र इच्छा थी। उनकी आज की आर्थिक सफलता उसी दृढ़ संकल्प का नतीजा है। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, उनकी सालाना आय लगभग 114,143 अमेरिकी डॉलर (USD) थी।
 
 
फेसबुक से पहले कदम तक

2013 में, अज़हर इक़बाल ने अपने साथी छात्रों अनुनय अर्णव और दीपिट प्रकाशथा के साथ मिलकर 'न्यूज़ इन शॉर्ट्स' नाम से एक फेसबुक पेज शुरू किया। यह विचार बहुत सरल था, लेकिन इसने एक बड़ी जरूरत को पूरा किया।
 
इसमें महत्वपूर्ण खबरों को चुना जाता था और उन्हें सरल व संक्षिप्त भाषा में पेश किया जाता था। साथ ही, खबर का स्रोत भी दिया जाता था, ताकि पाठक मूल रिपोर्ट तक पहुँच सकें। उनका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि दुनिया में क्या हो रहा है, यह जानने के लिए लोगों को लंबे लेख पढ़ने में अपना बहुत समय न बिताना पड़े।
 
यह एक ऐसा दौर था जब सूचनाओं का प्रवाह बढ़ रहा था और लोगों के पास समय कम था। यह कॉन्सेप्ट कई पाठकों को काफी पसंद आया। टी-लैब्स (T-Labs) ने इस विचार को एक नई दिशा दी।
 
अजहर इकबाल और उनके साथियों के सफर में एक अहम मोड़ तब आया, जब उनके प्रोजेक्ट को 'टी-लैब्स' के लिए चुन लिया गया। यह स्टार्टअप्स के लिए एक इनक्यूबेशन प्रोग्राम है, जिसे टाइम्स इंटरनेट ग्रुप का समर्थन प्राप्त है।
 
इन तीन युवा उद्यमियों के लिए, यह मौका सिर्फ आर्थिक मदद का जरिया नहीं था। इससे उन्हें बिजनेस खड़ा करने, किसी संस्था को चलाने और एक विचार को एक सफल कंपनी में बदलने के बारे में सीखने का भी मौका मिला। इस समर्थन की बदौलत, 'न्यूज इन शॉर्ट्स' (News in Shorts) का कॉन्सेप्ट आगे बढ़ा और बाद में 'इनशॉर्ट्स' (Inshorts) नाम के एक पूरे प्लेटफॉर्म में तब्दील हो गया। यह वह दौर था जब एक साधारण फेसबुक पेज धीरे-धीरे एक बड़े बिजनेस वेंचर में बदलने लगा।
 
इनशॉर्ट्स (Inshorts) की औपचारिक शुरुआत

शुरुआती प्रयोग की सफलता के बाद, अज़हर इक़बाल और उनके साथियों ने अपने प्रोजेक्ट को एक औपचारिक व्यवसाय में बदल दिया। इनशॉर्ट्स का उद्देश्य शुरुआत से ही स्पष्ट था: व्यस्त लोगों को कम से कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा ज़रूरी समाचार उपलब्ध कराना। यह एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बन गया, जिसके ज़रिए लोग अलग-अलग क्षेत्रों की महत्वपूर्ण ख़बरों पर जल्दी से नज़र डाल सकते थे।
 
इनशॉर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता ने निवेशकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा। शुरुआती दौर में, 2013 में टी-लैब्स (T-Labs) ने 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी। इसके बाद, कंपनी ने निवेश के विभिन्न दौरों के ज़रिए बड़ी धनराशि जुटाई। 2015 में मिले निवेश ने कंपनी की विकास गति को और तेज़ कर दिया। बाद के वर्षों में, अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भी इस प्लेटफ़ॉर्म में दिलचस्पी दिखाई। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने टाइगर ग्लोबल (Tiger Global) और टाइम्स इंटरनेट (Times Internet) सहित कई निवेशकों से लाखों डॉलर का निवेश जुटाया।
 
 
लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुँच

जो विचार कभी एक फ़ेसबुक पेज के रूप में शुरू हुआ था, वह कुछ ही वर्षों में लाखों, और अंततः करोड़ों उपयोगकर्ताओं तक पहुँच गया। इनशॉर्ट्स के सक्रिय उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या और इसके डाउनलोड्स ने यह साबित कर दिया कि संक्षिप्त समाचारों की माँग कोई अस्थायी चलन नहीं थी।
 
इस सफलता ने डिजिटल समाचार वितरण के एक नए दृष्टिकोण को मज़बूत किया। लोगों को समझ आया कि हर ख़बर को समझने के लिए बहुत ज़्यादा समय की ज़रूरत नहीं होती। अगर जानकारी को सावधानी से चुना जाए और उसे व्यापक ढंग से प्रस्तुत किया जाए, तो कुछ शब्दों में भी बहुत कुछ कहा जा सकता है।
 
जनता से जुड़ने का एक प्लेटफ़ॉर्म

इनशॉर्ट्स की सफलता के बाद, अज़हर इक़बाल और उनकी टीम ने अपने काम को केवल संक्षिप्त समाचारों तक ही सीमित नहीं रखा। कंपनी ने 'पब्लिक' (Public) प्लेटफ़ॉर्म का विस्तार किया, ताकि लोगों को उनके आस-पास स्थानीय स्तर पर हो रही घटनाओं से जोड़ा जा सके। इस तरह, कंपनी इनशॉर्ट्स के ज़रिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों को संक्षिप्त रूप में पहुँचाती रही। साथ ही, 'पब्लिक' ने स्थानीय समाचारों और समुदाय के साथ संवाद के लिए एक नया प्लेटफ़ॉर्म प्रदान किया।
 
 
इनशॉर्ट्स से शार्क टैंक (Shark Tank) तक

अज़हर इक़बाल ने इनशॉर्ट्स की स्थापना और विकास में अहम भूमिका निभाई। लंबे समय तक उन्होंने कंपनी के प्रबंधन का नेतृत्व किया और बाद में चेयरमैन की ज़िम्मेदारी संभाली। इस बीच... दीपित प्रकाशथा ने मुख्य कार्यकारी (CEO) का पद संभाला। यह बदलाव कंपनी के उस सफर को भी दर्शाता है, जो तीन छात्रों द्वारा शुरू किए गए एक प्रोजेक्ट से एक स्थापित संगठन बनने तक का था। अज़हर इक़बाल की व्यावसायिक सफलता ने उन्हें एक जाना-माना सार्वजनिक व्यक्तित्व भी बना दिया।
 
वे 'शार्क टैंक इंडिया' के तीसरे सीज़न में निवेशकों के पैनल में शामिल हुए। इस कार्यक्रम के ज़रिए, उन्हें देश भर के नए उद्यमियों और युवा संस्थापकों के साथ सीधे बातचीत करने का मौका मिला। एक ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसने छात्र रहते हुए फेसबुक पर एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था, अन्य युवा उद्यमियों के व्यावसायिक सपनों को समझना और उन्हें निवेश तथा मार्गदर्शन प्रदान करना, उनके सफर का एक अहम पड़ाव था।
 
युवा उद्यमियों के लिए एक मिसाल

अज़हर इक़बाल को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों और सूचियों में जगह मिली है। वे 'बिज़नेस वर्ल्ड 40 अंडर 40', 'फॉर्च्यून इंडिया 40 अंडर 40', 'बिज़नेस वर्ल्ड यंग एंटरप्रेन्योर अवार्ड', 'फोर्ब्स इंडिया 30 अंडर 30' और 'फोर्ब्स एशिया 30 अंडर 30' जैसी सूचियों और पुरस्कारों से जुड़े रहे हैं। हालाँकि, उनकी कहानी का असली महत्व केवल पुरस्कारों या आर्थिक सफलता में नहीं है। उनकी सबसे बड़ी पहचान शायद यह है कि उन्होंने एक ऐसी समस्या को पहचाना, जिसका सामना रोज़ाना लाखों लोग करते थे। लोग ख़बरों से अपडेट रहना चाहते थे, लेकिन उनके पास समय बहुत कम था।
 

 
एक सफर, एक मिसाल

अज़हर इक़बाल की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। एक छोटे से फेसबुक पेज से शुरू हुआ उनका सफर अब इनशॉर्ट्स (Inshorts) और पब्लिक (Public) जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच चुका है। IIT दिल्ली में अपनी पढ़ाई छोड़ने से लेकर एक सफल उद्यमी बनने तक, और फिर 'शार्क टैंक इंडिया' (Shark Tank India) में युवाओं के बिज़नेस सपनों को दिशा देने तक उनका सफर कई पड़ावों से होकर गुज़रा है।
 
बिहार के एक युवा से लेकर भारत के प्रमुख स्टार्टअप उद्यमियों में से एक बनने तक, अज़हर इक़बाल का सफर जुनून, संघर्ष, दृढ़ता और एक विचार पर अटूट विश्वास की कहानी है। उन्होंने साबित कर दिया है कि जब किसी इंसान में कुछ नया करने की चाहत हो, और वह असफलता या अनिश्चितता से न डरे, तो एक छोटे से फेसबुक पेज से शुरू हुआ सफर लाखों लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन सकता है।