चंदन साहब की कहानियाँ हिंदी पाठकों तक पहुँचीं, गोष्ठी में पढ़ी गईं मार्मिक रचना

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 03-02-2026
Chandan Sahab's stories reached Hindi readers; his poignant works were read at the literary gathering.
Chandan Sahab's stories reached Hindi readers; his poignant works were read at the literary gathering.

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

ग़ालिब अकादमी की मासिक गद्य गोष्ठी का जनवरी 2026का सत्र साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। इस अवसर पर पत्रकार और अफ़साना-निगार जी.डी. चंदन की कहानियों के हिंदी अनुवाद का विमोचन हुआ। चंदन साहब की उर्दू में लिखी गई कहानियों का संकलन प्रसिद्ध अफ़साना-निगार स्वर्गीय अंजुम उस्मानी ने किया था, जिसे ग़ालिब अकादमी ने 2017में प्रकाशित किया था। इसी संग्रह का हिंदी अनुवाद डॉ. रख़्शंदा रूही मेहदी ने किया और इसे जनवरी 2026में ग़ालिब अकादमी द्वारा प्रकाशित किया गया।

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इस संग्रह के विमोचन के लिए आयोजित गोष्ठी में साहित्यिक और पत्रकारिता की दुनिया के कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हुए। गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. जी.आर. कंवल ने की। उन्होंने कहा कि चंदन साहब की कहानियों का अनुवाद डॉ. रूही ने हिंदी में बहुत ही सहज और सुंदर तरीके से किया है।

उन्होंने बताया कि “कहानी वह होती है जो हैरत में डाल दे, जो नींद हराम कर दे। पहले हिंदी की किताबें उर्दू में इसी मकसद से छपी करती थीं, क्योंकि उर्दू समझना आम था। हिंदू और सिख धर्म की किताबें भी उर्दू में अधिक पढ़ी जाती थीं।”

इस अवसर पर उर्दू के प्रसिद्ध अफ़साना-निगार खुर्शीद हयात ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. रूही भाषाई एकता की पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हिंदी और उर्दू के बीच पुल बनाने में उनका अनुवाद एक महत्वपूर्ण कड़ी है। डॉ. रूही ने इस अवसर पर चंदन साहब की कहानी ‘जसवंत सिंह’ पढ़कर श्रोताओं को प्रभावित किया।

प्रसिद्ध पत्रकार सुहेल अंजुम ने चंदन साहब की पत्रकारिता की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चंदन साहब मूल रूप से पत्रकार थे और पत्रकारिता के शोधकर्ता भी। उनकी किताब ‘जाम-ए-जहाँ-नुमा’ उनके शोध का दुर्लभ नमूना है। उन्होंने बताया कि चंदन साहब ने अफ़सानों के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को गहराई से उकेरा है।

मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर अबू बकर अबाद ने कहा कि चंदन साहब उर्दू के प्रसिद्ध पत्रकार और अच्छे अफ़साना-निगार थे। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि डॉ. रूही ने उनके उर्दू अफ़सानों को हिंदी में बहुत ही खूबसूरती से अनुवादित किया। उन्होंने कहा कि अनुवाद में डॉ. रूही ने उर्दू के शब्दों को बरकरार रखा और हिंदी के दिलचस्प एवं मधुर शब्दों को भी शामिल किया, जिससे भाषा का सौंदर्य और अर्थ दोनों कायम रहे।

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इस अवसर पर क़ाज़ी राग़िब ने कहा कि डॉ. रूही दोनों भाषाओं हिंदी और उर्दू में अच्छी तरह वाकिफ़ हैं। उन्होंने अनुवाद में दोनों भाषाओं के शब्दों का संतुलित उपयोग किया है, जो पाठक को सहज रूप से कहानी से जोड़ता है। इसी तरह, प्रवीण व्यास ने कहा कि हर भाषा का अनुवाद अलग होता है और डॉ. रूही ने चंदन साहब की कहानियों का अनुवाद उत्कृष्ट ढंग से किया है।

गोष्टि में उर्दू के वरिष्ठ अफ़साना-निगार डॉ. नईमा जाफ़री ने अपनी कहानी ‘नाम गुम जाएगा’ पढ़ी, जिसे श्रोताओं ने अत्यधिक सराहा। हिंदी के प्रसिद्ध अफ़साना-निगार कवि कैवेश्वर ने अपनी कहानी ‘जीत और जस्सी’ में एक फौजी की गहन और मार्मिक कहानी प्रस्तुत की। इस अवसर पर अन्य लेखक और कहानीकार भी उपस्थित थे।

सीमा कोशिक ने अपनी कहानी ‘सब का भला करने वाला’, संजीव द्विवेदी ने ‘बाएँ हाथ को मालूम न हो’, शग़फ़्ता सलीम ने ‘ख़्वाहिशों का आशियाना’, थरूत उस्मानी ने ‘अंधेरा’ और सर्ताज़ सबीना ने ‘अंजाम-ए-ज़िंदगी’ नामक कहानियाँ प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर चश्मा फ़ारूकी ने ‘आज का नौजवान बा-इख़्तियार है या दबाव का शिकार’ शीर्षक से एक लेख पढ़ा, जिसमें आधुनिक युवा पीढ़ी के सामाजिक और मानसिक दृष्टिकोण को बारीकी से दर्शाया गया।इस गोष्ठी में उपस्थित थे डॉ. शमा अफ़रोज़ ज़ैदी, डॉ. शादाब तबस्सुम, नरगिस सुल्ताना, जावेद हसन, सरफ़राज़ अहमद फ़राज़, अबू नोमान, कमालुद्दीन, श्रीकांत कोहली, पवन कुमार तोमर और कई अन्य सम्मानित साहित्यकार। उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत कर साहित्यिक चर्चाओं को और समृद्ध किया।

इस मौके पर यह स्पष्ट हुआ कि ग़ालिब अकादमी न केवल उर्दू साहित्य के संरक्षण में लगी हुई है, बल्कि हिंदी भाषा में अनुवाद और साहित्यिक विस्तार के माध्यम से नई पीढ़ी तक उर्दू साहित्य पहुँचाने का कार्य भी कर रही है। डॉ. रख़्शंदा रूही का अनुवाद इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके प्रयास से हिंदी पाठक अब चंदन साहब की सूक्ष्म और मार्मिक कहानियों से जुड़ पाएंगे, जो पहले केवल उर्दू पाठकों के लिए सुलभ थीं।

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इस आयोजन ने यह भी प्रमाणित किया कि कहानी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई संवाद का भी माध्यम होती है। चंदन साहब की कहानियों के माध्यम से पाठक समाज के विभिन्न पहलुओं-राजनीति, संस्कृति, समाज और मानव संवेदनाओं से परिचित होते हैं।

कार्यक्रम का समापन सभी वक्ताओं और लेखकों के विचारों के आदान-प्रदान और कहानियों के पाठ से हुआ। उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं ने इस अवसर को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। गोष्ठी का यह सत्र हिंदी और उर्दू साहित्य के संगम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में याद रखा जाएगा।

इस प्रकार, ग़ालिब अकादमी की यह मासिक गद्य गोष्ठी साहित्य प्रेमियों, अनुवादकारों और कहानीकारों के लिए यादगार अवसर साबित हुई। डॉ. रूही के अनुवाद और कहानी पाठ ने यह साबित किया कि भाषाई एकता और साहित्यिक विरासत को आधुनिक पाठक तक पहुँचाना संभव है। इस आयोजन ने हिंदी और उर्दू के बीच पुल बनाते हुए दोनों भाषाओं के पाठकों के लिए समृद्ध साहित्यिक अनुभव प्रदान किया।