आवाज़ द वॉयस /नई दिल्ली
Islamic Centre of India, Farangi Mahal ने शब-ए-बरात के मुबारक मौके पर एक विस्तृत और संवेदनशील एडवाइजरी जारी करते हुए मुसलमानों से अपील की है कि वे इस पाक रात को पूरी तरह इबादत, दुआ, तौबा और आत्मसंयम के साथ गुज़ारें। इस्लामिक सेंटर ने स्पष्ट किया है कि शब-ए-बरात 3 फरवरी 2026 की रात होगी, जबकि इसके अगले दिन 4 फरवरी 2026 को रोज़ा रखना रसूल-ए-अकरम हज़रत मोहम्मद ﷺ की सुन्नत है। जारी की गई यह एडवाइजरी न केवल धार्मिक चेतना को मज़बूत करती है, बल्कि समाज में अनुशासन, कानून के पालन और सामाजिक ज़िम्मेदारी के संदेश को भी रेखांकित करती है।
फरंगी महल ने अपने संदेश में कहा है कि शब-ए-बरात इस्लामी कैलेंडर की उन चुनिंदा रातों में से एक है, जब अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआएं क़ुबूल फरमाते हैं, गुनाहों की माफी के दरवाज़े खोलते हैं और रहमत व बरकत नाज़िल होती है। इसलिए यह रात शोर-शराबे, दिखावे या गैर-ज़रूरी गतिविधियों में गंवाने के बजाय पूरे ख़ुलूस और तवज्जो के साथ अल्लाह की इबादत में बिताई जानी चाहिए।
एडवाइजरी में विशेष रूप से अपील की गई है कि लोग इस रात नमाज़, तिलावत-ए-कुरआन, ज़िक्र-ओ-अज़कार और दुआओं में अधिक से अधिक समय लगाएं। साथ ही अपने पिछले गुनाहों पर सच्चे दिल से तौबा करें और आने वाले समय में नेक और पाक ज़िंदगी अपनाने का संकल्प लें। इस्लामिक सेंटर ने कहा है कि शब-ए-बरात आत्ममंथन, आत्मशुद्धि और खुद को बेहतर इंसान बनाने की रात है, न कि फिजूलखर्ची या कानून तोड़ने की।
कब्रिस्तानों में जाने वाले लोगों के लिए भी फरंगी महल ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एडवाइजरी में कहा गया है कि कब्रिस्तान जाते समय लोग अपने वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़ा करें, ताकि यातायात व्यवस्था बाधित न हो और आम नागरिकों या आपातकालीन सेवाओं को किसी तरह की परेशानी न हो। अव्यवस्थित पार्किंग से अक्सर जाम की स्थिति बनती है, जो समाज के लिए नुकसानदेह है। इसलिए हर व्यक्ति का यह दायित्व है कि वह कानून का पालन करे और प्रशासन का सहयोग करे।
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने शब-ए-बरात के मौके पर आतिशबाज़ी से पूरी तरह परहेज़ करने की सख़्त अपील की है। बयान में कहा गया है कि पटाखे फोड़ना न तो इस्लामी शिक्षाओं का हिस्सा है और न ही इसका कोई धार्मिक महत्व है। इसके अलावा, बाइक स्टंट, तेज़ रफ्तार ड्राइविंग और किसी भी तरह की कानून-विरोधी गतिविधियों को भी सख़्ती से गलत ठहराया गया है। फरंगी महल ने चेताया है कि इस तरह की हरकतें न केवल दूसरों की जान के लिए ख़तरा बनती हैं, बल्कि खुद करने वालों के लिए भी गंभीर परिणाम ला सकती हैं।
एडवाइजरी में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया है कि शब-ए-बरात की असल रूह गरीबों, ज़रूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद में निहित है। लोगों से अपील की गई है कि वे इस मौके पर सदक़ा-खैरात दें, भूखों को खाना खिलाएं, ज़रूरतमंदों की मदद करें और समाज के कमजोर तबकों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं। ऐसी नेकियों से न केवल अल्लाह की रज़ा हासिल होती है, बल्कि समाज में भाईचारा, इंसानियत और आपसी सौहार्द भी मज़बूत होता है।
इस्लामिक सेंटर ने यह भी याद दिलाया है कि 4 फरवरी 2026 को रोज़ा रखना सुन्नत है और जिन लोगों को सेहत और हालात इजाज़त दें, उन्हें इस दिन रोज़ा ज़रूर रखना चाहिए। रोज़ा केवल इबादत का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह इंसान को सब्र, संयम और आत्मनियंत्रण की शिक्षा भी देता है।
फरंगी महल ने खास तौर पर युवाओं से अपील की है कि वे शब-ए-बरात को सोशल मीडिया पर दिखावे, वीडियो बनाने या गैर-ज़रूरी भीड़-भाड़ में न बदलें। यह रात शांति, सादगी और आध्यात्मिकता की है। युवाओं को चाहिए कि वे मस्जिदों में या अपने घरों में इबादत करें, बुजुर्गों की इज़्ज़त करें और समाज में सकारात्मक व जिम्मेदार संदेश फैलाएं।
अंत में, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया, फरंगी महल ने प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों के सहयोग की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि लोग इस एडवाइजरी का पालन करेंगे और शब-ए-बरात को अमन, कानून और इंसानियत के साथ मनाएंगे। यह रात हर मुसलमान के लिए अपने रब से रिश्ता मज़बूत करने, ग़लतियों से तौबा करने और एक बेहतर इंसान बनने का अनमोल अवसर है, जिसे पूरे एहतराम और ज़िम्मेदारी के साथ बिताया जाना चाहिए।