Which lentil has the highest protein content? Find out all the details.
नई दिल्ली।
भारतीय भोजन में दाल का महत्वपूर्ण स्थान है। आमतौर पर हमारे रोजाना के भोजन में कम से कम एक बार दाल जरूर शामिल होती है। दालें न केवल स्वाद और विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये पौधों से मिलने वाले प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत हैं। खासकर शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों के लिए दालें प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
हालांकि, सभी दालों में प्रोटीन की मात्रा समान नहीं होती। कुछ दालें दूसरी किस्मों की तुलना में अधिक प्रोटीन प्रदान करती हैं। ऐसे में यदि आप अपने रोजाना के भोजन में कोई बड़ा बदलाव किए बिना प्रोटीन का सेवन बढ़ाना चाहते हैं, तो अलग-अलग दालों की पोषण सामग्री के बारे में जानना उपयोगी हो सकता है।
किस दाल में सबसे ज्यादा प्रोटीन?
2023 में Frontiers in Microbiology में प्रकाशित एक अध्ययन में विभिन्न दालों की पोषण संरचना की तुलना की गई थी। अध्ययन में प्रति 100 ग्राम के आधार पर कुछ प्रमुख दालों में प्रोटीन की मात्रा इस प्रकार बताई गई:
काला चना: 25.21 ग्राम प्रोटीन
मसूर दाल: 24.63 ग्राम
मूंग दाल: 23.86 ग्राम
राजमा: 22.53 ग्राम
सफेद चना: 20.47 ग्राम
इन आंकड़ों के अनुसार, इस तुलना में काले चने में सबसे अधिक प्रोटीन पाया गया। इसके बाद मसूर और मूंग का स्थान रहा। हालांकि, किसी भोजन की वास्तविक पोषण मात्रा उसकी किस्म, प्रसंस्करण और पकाने के तरीके के अनुसार बदल सकती है।
मसूर और उड़द के पोषण गुण
मसूर दाल को भी पोषक तत्वों से भरपूर दाल माना जाता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर के साथ कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं, काली उड़द दाल भी प्रोटीन, फाइबर और खनिजों का अच्छा स्रोत है।
हालांकि किसी विशेष दाल को किसी बीमारी के इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। संतुलित आहार में अलग-अलग दालों को शामिल करना ज्यादा बेहतर विकल्प है। किसी खास स्वास्थ्य समस्या या चिकित्सकीय स्थिति में आहार में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
क्या केवल दाल खाने से पूरा प्रोटीन मिलेगा?
दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत जरूर हैं, लेकिन अकेले दाल को पूर्ण प्रोटीन का स्रोत नहीं माना जाता। प्रोटीन बनाने वाले 20 अमीनो अम्लों में से नौ ऐसे हैं जिन्हें हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता और उन्हें भोजन के जरिए प्राप्त करना जरूरी होता है।
दालों में लाइसिन नामक अमीनो अम्ल अच्छी मात्रा में पाया जाता है, लेकिन इनमें मेथियोनीन अपेक्षाकृत कम होता है। दूसरी ओर, चावल और गेहूं जैसे अनाजों में मेथियोनीन मिलता है, लेकिन लाइसिन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
इसी वजह से भारतीय भोजन में दाल-चावल, दाल-रोटी और खिचड़ी जैसे संयोजन पोषण की दृष्टि से भी उपयोगी माने जाते हैं। दाल और अनाज को एक साथ खाने से अलग-अलग खाद्य पदार्थों के अमीनो अम्ल एक-दूसरे की कमी को काफी हद तक पूरा करते हैं।
इसलिए रोजाना के भोजन में केवल एक ही दाल पर निर्भर रहने के बजाय काला चना, मसूर, मूंग, राजमा, चना और उड़द जैसी अलग-अलग दालों को शामिल करना बेहतर हो सकता है। संतुलित आहार में दालों के साथ अनाज, सब्जियां, फल, मेवे और अन्य प्रोटीन स्रोत शामिल करने से भोजन अधिक पौष्टिक बनता है।