नई दिल्ली
हृदय रोग को अक्सर धूम्रपान, मोटापा या बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन कई ऐसी रोजमर्रा की आदतें भी हैं जो देखने में सामान्य लगती हैं, पर धीरे-धीरे दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर दिल को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग घंटों तक ऑफिस की कुर्सी पर, कार में या टीवी के सामने बैठे रहते हैं। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से रक्त संचार धीमा पड़ जाता है और शरीर कम कैलोरी खर्च करता है। इससे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 30 से 60 मिनट के बीच कुछ देर के लिए उठकर टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
रोजाना सात घंटे से कम नींद लेना हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकता है। नींद की कमी से रक्तचाप बढ़ने, शरीर में सूजन बढ़ने और ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में कठिनाई हो सकती है। स्वस्थ हृदय के लिए हर रात 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेना जरूरी है। सोने का नियमित समय तय करना और सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी फायदेमंद रहता है।
अचार, पापड़, पैकेटबंद स्नैक्स, सॉस और प्रोसेस्ड फूड में छिपा अतिरिक्त नमक शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा देता है। इससे शरीर में पानी रुकने लगता है, रक्तचाप बढ़ता है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह नींबू, हरी जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
लगातार तनाव भी हृदय के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं और पारिवारिक जिम्मेदारियां तनाव बढ़ाती हैं, जिससे रक्तचाप और हृदय गति बढ़ सकती है। इसके साथ ही अधिक खाना, धूम्रपान या शराब जैसी अस्वस्थ आदतें भी विकसित हो सकती हैं। योग, ध्यान, गहरी सांस लेने का अभ्यास, नियमित सैर और परिवार के साथ समय बिताना तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।
सॉफ्ट ड्रिंक, मीठे फलों के जूस, एनर्जी ड्रिंक और अधिक चीनी वाली चाय या कॉफी शरीर में अतिरिक्त शर्करा पहुंचाते हैं। इनका नियमित सेवन वजन बढ़ने, मधुमेह और हृदय रोग के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके बजाय पानी, नारियल पानी, बिना चीनी की चाय या कॉफी और कम चीनी वाले पेय बेहतर विकल्प हैं।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ जिम जाना जरूरी नहीं है। शारीरिक गतिविधियों की कमी से हृदय कमजोर पड़ सकता है और हाई ब्लड प्रेशर तथा खराब कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम करने की सलाह देते हैं। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी, नृत्य या सीढ़ियों का इस्तेमाल करना भी पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकता है।
उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मधुमेह जैसी समस्याएं अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होती हैं। कई बार इनका पता तब चलता है जब गंभीर जटिलताएं पैदा हो चुकी होती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक परीक्षण करवाना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें अपनाकर हृदय रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटी-छोटी जीवनशैली संबंधी सावधानियां भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।