ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी और तेज़ धूप सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि एक चुनौती की तरह होती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है और UV rays तेज़ होती जाती हैं, इंसान ने खुद को बचाने के लिए ऐसे-ऐसे तरीके खोज निकाले हैं जो कभी पारंपरिक हैं, कभी वैज्ञानिक और कभी बिल्कुल अनोखे और अजीब लगने वाले जुगाड़।
चीन के कुछ ग्रामीण इलाकों में लोग बड़े-बड़े कमल के पत्तों का इस्तेमाल प्राकृतिक छतरी की तरह करते हैं। खेतों में काम करते समय या नदी किनारे चलते हुए वे इन पत्तों को सिर के ऊपर पकड़ लेते हैं। यह न सिर्फ धूप रोकता है बल्कि हवा को भी थोड़ा ठंडा महसूस कराता है। वहीं शहरों में चीन में “facekini” नाम का एक अजीब मास्क भी लोकप्रिय है, जिसमें पूरा चेहरा ढका रहता है और सिर्फ आंखों के लिए छेद होता है। यह खास तौर पर समुद्र किनारे UV rays से बचने के लिए पहना जाता है।

जापान में गर्मी से बचने के लिए लोग मिनी इलेक्ट्रिक फैन को कपड़ों पर क्लिप कर लेते हैं। कुछ लोग छाते के अंदर UV-reflective coating लगवाते हैं ताकि बाहर निकलते समय सूरज की रोशनी वापस परावर्तित हो जाए। यहां तक कि गर्मियों में “cool biz” ड्रेस कोड अपनाया जाता है, जिसमें ऑफिस कर्मचारी बिना टाई और हल्के कपड़ों में काम करते हैं ताकि शरीर को कम गर्मी लगे।

दक्षिण कोरिया में स्किन केयर को लेकर काफी गंभीरता है। लोग सिर्फ सनस्क्रीन ही नहीं लगाते बल्कि पूरे चेहरे को ढकने वाले UV मास्क, हाथों के लिए UV gloves और यहां तक कि चेहरे को छिपाने वाले wide-brim hats भी इस्तेमाल करते हैं। कई लोग तो ऐसे जैकेट पहनते हैं जो पूरी तरह UV protection के लिए डिज़ाइन की जाती हैं।
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मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब और UAE में पारंपरिक सफेद थॉब और अबाया न सिर्फ सांस्कृतिक परिधान हैं, बल्कि गर्मी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका भी हैं। ढीले और हल्के कपड़े हवा को अंदर-बाहर घूमने देते हैं और शरीर को सीधे धूप से बचाते हैं। रेगिस्तानी क्षेत्रों में लोग अक्सर चेहरे को स्कार्फ या shemagh से ढकते हैं ताकि रेत और UV rays दोनों से सुरक्षा मिल सके।

अफ्रीका के सहारा क्षेत्र और आसपास के इलाकों में लोग प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं। कुछ समुदायों में मिट्टी और पौधों से बने लेप त्वचा पर लगाए जाते हैं, जो एक तरह की प्राकृतिक UV shield की तरह काम करते हैं। कई जगहों पर लोग पेड़ों की छांव में दिन का सबसे गर्म समय बिताते हैं और यात्रा भी सुबह या शाम को करते हैं।

भारत में भी गर्मी से बचने के कई अनोखे तरीके हैं। गांवों में लोग आज भी सिर पर गीला गमछा रखते हैं, मिट्टी के घड़े का ठंडा पानी पीते हैं और “आम पन्ना” या “बेल शरबत” जैसे पारंपरिक पेय से शरीर को ठंडा रखते हैं। राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में लोग ढीले सूती कपड़े और पगड़ी का इस्तेमाल करते हैं जो सिर को सूरज से बचाती है।

अमेरिका में भी गर्मी से बचने के लिए कई आधुनिक और कुछ अजीब तरीके देखने को मिलते हैं। लोग UV-blocking umbrellas का इस्तेमाल करते हैं, जो जापान की तरह ही अब वहां भी लोकप्रिय हो रहे हैं। कुछ लोग outdoor cooling scarves पहनते हैं, जिन्हें पानी में भिगोकर गले में लपेटा जाता है। शहरों में air-conditioned bus stops और cooling shelters बनाए जाते हैं ताकि लोग हीटवेव से बच सकें।

यूरोप के देशों जैसे स्पेन, इटली और ग्रीस में लोग दोपहर के समय “siesta” यानी आराम करने की परंपरा अपनाते हैं। इस दौरान सबसे तेज़ धूप में बाहर काम करना बंद कर दिया जाता है। इसके अलावा लोग हल्के रंग के लिनन कपड़े पहनते हैं जो गर्मी को कम अवशोषित करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में UV rays दुनिया में सबसे तेज़ मानी जाती हैं, इसलिए यहां सन प्रोटेक्शन को लेकर बहुत सख्ती है। लोग SPF 50+ सनस्क्रीन, wide-brim hats और UV protective sunglasses का उपयोग करते हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए “no hat, no play” नियम भी लागू होता है, यानी टोपी के बिना बाहर खेलना मना है।

लैटिन अमेरिका के देशों जैसे मेक्सिको और पेरू में लोग पारंपरिक चौड़ी टोपी और हल्के कपड़े पहनते हैं। एंडीज़ क्षेत्रों में ऊंचाई के कारण UV exposure ज्यादा होता है, इसलिए वहां के लोग विशेष प्रकार के ऊनी कपड़े और face coverings का उपयोग करते हैं। इन सभी देशों और तरीकों को देखकर एक बात साफ होती है कि गर्मी से बचाव सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि इंसानी रचनात्मकता का एक बड़ा उदाहरण है। कहीं लोग कमल के पत्तों की छाया लेते हैं, कहीं high-tech UV मास्क पहनते हैं, और कहीं सदियों पुरानी परंपराओं को अपनाते हैं। अलग-अलग संस्कृतियाँ, अलग-अलग जुगाड़, लेकिन मकसद एक ही—तेज धूप और UV rays से सुरक्षित रहना और जीवन को आरामदायक बनाना।