हज 2026: मिनटों में पहुंचेगी दवा, आसमान से मसीहा बनेंगे ड्रोन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 19-05-2026
Hajj 2026: Medicines to Arrive in Minutes; Drones to Act as Saviors from the Sky.
Hajj 2026: Medicines to Arrive in Minutes; Drones to Act as Saviors from the Sky.

 

गुलाम कादिर

सऊदी अरब इस बार हज 2026 को पूरी तरह ऐतिहासिक और हाईटेक बनाने की तैयारी में है। इस साल हज यात्रा पर आने वाले लाखों जायरीन के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। अब मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों पर किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों तक दवाइयां और मेडिकल सैंपल पहुँचाने का काम आसमान से होगा। सऊदी अरब सरकार ने इसके लिए ड्रोन तकनीक को पूरी तरह जमीन पर उतार दिया है।

सबसे राहत की बात यह है कि जिस मेडिकल सप्लाई को भीड़ और ट्रैफिक के कारण जमीन के रास्ते पहुँचने में 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे का समय लगता था, वह काम अब ड्रोन के जरिए मात्र छह मिनट में पूरा हो जाएगा।

यह पूरी व्यवस्था सऊदी अरब के विजन 2030के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मुहिम का एक बड़ा हिस्सा है। इस आधुनिक ड्रोन सेवा का संचालन मुख्य रूप से मक्का की मस्जिद अल-हरम, मदीना की मस्जिद अन-बनवी और हज के प्रमुख पड़ावों जैसे मीना, अराफात और मुजदलिफा में किया जाएगा। इतनी बड़ी भीड़ के बीच इस तरह की हवाई चिकित्सा सेवा शुरू करने वाला सऊदी अरब दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है।

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दो साल की कड़ी मेहनत और टेस्टिंग का नतीजा

हज जैसी विशाल भीड़ वाले आयोजन में ड्रोन उड़ाना और उनसे सुरक्षित डिलीवरी लेना कोई आसान काम नहीं था। सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्री फहद अल-जलाजेल के अनुसार इस सेवा को शुरू करने से पहले पिछले दो सालों तक लगातार कड़े परीक्षण और गहन अध्ययन किए गए हैं। इन परीक्षणों के दौरान इस बात की बारीकी से जांच की गई कि भारी भीड़ के बीच ड्रोन सुरक्षित तरीके से कैसे उड़ान भरेंगे और कैसे लैंड करेंगे।

इसके साथ ही खाड़ी देश की भीषण गर्मी को देखते हुए ड्रोन की कार्यक्षमता को भी परखा गया है। इन विशेष ड्रोन में कूलिंग सिस्टम यानी रेफ्रिजरेटर की सुविधा लगाई गई है। इस कूलिंग सिस्टम की वजह से तापमान के प्रति संवेदनशील दवाइयां, इंजेक्शन और खून के नमूने अत्यधिक गर्मी में भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे और खराब नहीं होंगे।

इस बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मक्का हेल्थ क्लस्टर और नेशनल यूनिफाइड प्रोक्योरमेंट कंपनी यानी नुप्को मिलकर संभाल रहे हैं। यह दोनों संस्थाएं पूरे क्षेत्र में जरूरी मेडिकल रिसोर्सेज की सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स का जिम्मा देखती हैं। पवित्र स्थलों के भीतर मौजूद अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से मिलने वाले मरीजों के डेटा और मांग के आधार पर ड्रोन की उड़ानों को नियंत्रित किया जाएगा।

पिछले साल हज के दौरान इसका एक सफल ट्रायल भी किया गया था। उस समय मीना के इमरजेंसी अस्पताल में धूप और भीषण गर्मी से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए ड्रोन के जरिए तुरंत आइस पैक भेजे गए थे। लू और हीट स्ट्रोक से पीड़ित जायरीन के लिए वह मदद बहुत कारगर साबित हुई थी।

जरूरी दवाओं के लिए नियम और अनुमति प्रक्रिया

स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक करने के साथ-साथ सऊदी अरब सरकार ने सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को लेकर भी कड़े नियम बनाए हैं। सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी यानी एसएफडीए ने उन जायरीन के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की है जो अपने साथ ऐसी दवाइयां लाना चाहते हैं जिनमें नशीले या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े तत्व शामिल होते हैं।

अथॉरिटी ने साफ किया है कि ऐसे यात्रियों को सऊदी अरब की सीमा में प्रवेश करने से पहले एक क्लियरेंस परमिट यानी मंजूरी पत्र लेना होगा। इसके लिए यात्रियों को अपने जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इन दस्तावेजों में पासपोर्ट की कॉपी, पिछले छह महीने के भीतर डॉक्टर द्वारा लिखा गया वैध पर्चा या मेडिकल रिपोर्ट और उस दवा के रैपर या पैकेट की साफ तस्वीरें शामिल हैं।

इसके अलावा आवेदकों को अथॉरिटी के ऑनलाइन सिस्टम पर जाकर एक इलेक्ट्रॉनिक डिक्लेरेशन फॉर्म भी भरना होगा। इस नियम के तहत कोई भी हाजी अपने साथ अधिकतम 30दिनों की दवा या फिर सऊदी अरब में अपने रुकने की अवधि के बराबर की दवा ही ला सकता है।

दोनों में से जो भी समय कम होगा, दवा की मात्रा उसी हिसाब से तय की जाएगी। इसके लिए यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल्ड ड्रग्स सिस्टम पर जाकर अपना एक पर्सनल अकाउंट बनाना होगा और वहीं से आवेदन करना होगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी हाजी सुरक्षित रहें और पवित्र स्थलों पर नियंत्रित दवाओं का कोई दुरुपयोग न हो।

हज 2026 के लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी तैयारी

इस बार हज यात्रा में दुनिया भर से लगभग 15लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सिर्फ ड्रोन ही नहीं बल्कि जमीन पर भी स्वास्थ्य सेवाओं का एक बहुत बड़ा ढांचा खड़ा किया गया है।

सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस सीजन के लिए 20हजार से अधिक अस्पताल बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें से 3हजार 800बेड विशेष रूप से पवित्र स्थलों के भीतर बने अस्थाई और स्थाई अस्पतालों में लगाए गए हैं। इसके अलावा 25अर्जेंट केयर सेंटर भी चौबीसों घंटे काम करेंगे।

आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सड़कों पर 3हजार से अधिक एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। वहीं गंभीर रूप से बीमार मरीजों को तुरंत एयरलिफ्ट करने के लिए 11एयर एम्बुलेंस यानी हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं। इस पूरे तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए 7 हजार 700 पैरामेडिक्स और 52हजार से अधिक अनुभवी स्वास्थ्य कर्मी और डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इस पूरे विशाल नेटवर्क को आपस में जोड़े रखने के लिए सऊदी अरब ने सभी पवित्र स्थलों पर हाई-स्पीड 5जी नेटवर्क कवरेज को पूरी तरह सुनिश्चित कर दिया है, जिससे ड्रोन के सिग्नल और अस्पतालों के कम्युनिकेशन में एक सेकंड की भी देरी न हो।

डिलीवरी के क्षेत्र में क्यों जरूरी है ड्रोन तकनीक

सऊदी अरब में मेडिकल ड्रोन का यह प्रयोग केवल एक ट्रायल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की डिलीवरी व्यवस्था की एक बड़ी शुरुआत है। लॉजिस्टिक्स की भाषा में इसे 'लास्ट माइल डिलीवरी' यानी अंतिम छोर तक सामान पहुँचाना कहा जाता हैI

दुनिया भर के विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी सामान को उसके आखिरी ठिकाने तक पहुँचाने का खर्च और समय सबसे ज्यादा होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुल शिपिंग लागत का 50से 53प्रतिशत हिस्सा इसी आखिरी मील की डिलीवरी में खर्च हो जाता है।

आज के समय में जब तुरंत या एक घंटे के भीतर डिलीवरी की मांग बढ़ रही है, तब ड्रोन तकनीक एक मसीहा बनकर उभरी है। आंकड़ों की मानें तो साल 2024 में वैश्विक ड्रोन डिलीवरी बाजार लगभग 528 मिलियन डॉलर का था, जिसके आने वाले समय में बढ़कर 10.5 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।

सऊदी अरब इसी बदलती तकनीक का उपयोग अपने यहाँ आने वाले मेहमानों की जान बचाने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए कर रहा है। कुल मिलाकर हज 2026 में विज्ञान और आस्था का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलेगा जहाँ तकनीक सीधे तौर पर इंसानी जीवन की सेवा करेगी।