नई दिल्ली
अक्सर लोग एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स को एक ही बीमारी समझ लेते हैं। रोजमर्रा की भाषा में दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक जैसे किया जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इनमें अंतर है। एसिडिटी दरअसल एक लक्षण है, जबकि एसिड रिफ्लक्स वह प्रक्रिया है जिसमें पेट का एसिड ऊपर भोजन नली यानी ग्रासनली तक पहुंच जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, कभी-कभार सीने में जलन या खट्टी डकार आना सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यह समस्या लगातार बनी रहे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। लंबे समय तक एसिड रिफ्लक्स रहने पर यह गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD का रूप ले सकता है, जो गंभीर बीमारी मानी जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार एंटासिड दवाएं लेते रहते हैं। इससे कुछ समय के लिए आराम जरूर मिलता है, लेकिन असली बीमारी छिपी रह जाती है। अगर एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या दो से चार सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, रोजाना दवा लेनी पड़े या लक्षण बार-बार लौटें, तो डॉक्टर से जांच करानी जरूरी हो जाती है।
कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि निगलने में परेशानी हो, खाना खाते समय दर्द महसूस हो, बिना वजह वजन कम होने लगे, लगातार उल्टी आए, खांसी बनी रहे या आवाज में बदलाव महसूस हो, तो यह गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई बार पेट से रक्तस्राव या भोजन नली में सूजन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
डॉक्टर ऐसे मामलों में ऊपरी जीआई एंडोस्कोपी कराने की सलाह देते हैं। यह एक ऐसी जांच है जिसमें एक पतली कैमरा ट्यूब के जरिए भोजन नली और पेट को अंदर से देखा जाता है। इससे सूजन, अल्सर, बैरेट्स इसोफेगस और कुछ मामलों में भोजन नली के कैंसर तक का शुरुआती पता लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंडोस्कोपी एक सुरक्षित और तेज प्रक्रिया है। आमतौर पर यह कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और मरीज को ज्यादा परेशानी नहीं होती। समय पर जांच होने से बीमारी का सही इलाज संभव हो पाता है।
एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स से बचाव के लिए खानपान और जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी माना जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि एक बार में बहुत ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए। भारी भोजन पेट पर दबाव बढ़ाता है, जिससे एसिड ऊपर की ओर आने लगता है। इसलिए कम मात्रा में और धीरे-धीरे भोजन करना बेहतर माना जाता है।
मसालेदार, तला हुआ और ज्यादा वसायुक्त भोजन भी एसिडिटी को बढ़ा सकता है। इसके अलावा चाय, कॉफी, शराब, टमाटर और खट्टे फलों का अधिक सेवन भी परेशानी पैदा कर सकता है। जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी होती है, उन्हें इन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
विशेषज्ञ कुछ ऐसे पेय पदार्थों की भी सलाह देते हैं जो पेट को आराम पहुंचाते हैं। कैमोमाइल, अदरक और मुलेठी की हर्बल चाय पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को शांत करने में मदद कर सकती है। पर्याप्त पानी पीना और समय पर सोना भी राहत देता है।
डॉक्टरों का मानना है कि एसिडिटी कोई मामूली समस्या नहीं है। शुरुआत में इसे नियंत्रित कर लिया जाए तो आगे चलकर गंभीर एसिड रिफ्लक्स और अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है। सही खानपान, नियमित दिनचर्या और समय पर चिकित्सा सलाह ही लंबे समय तक पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है।