खर्राटों की समस्या: अनदेखी नहीं, समझदारी ज़रूरी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-02-2026
Snoring problem: Don't ignore it, understanding is crucial.
Snoring problem: Don't ignore it, understanding is crucial.

 

नई दिल्ली

रात में आने वाले खर्राटों को अक्सर लोग थकान या गहरी नींद का सामान्य संकेत मान लेते हैं, लेकिन यह धारणा हमेशा सही नहीं होती। लगातार और तेज़ खर्राटे श्वसन तंत्र से जुड़ी किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। यह न केवल आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं, बल्कि लंबे समय में शरीर के लिए जोखिम भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए खर्राटों को मामूली परेशानी समझकर नज़रअंदाज़ करने के बजाय, इसके कारणों और नियंत्रण के तरीकों को समझना ज़रूरी है।

खर्राटे क्यों आते हैं?

सोते समय जब नाक और गले के रास्ते हवा का प्रवाह आंशिक रूप से बाधित हो जाता है, तो आसपास के नरम ऊतकों में कंपन पैदा होता है—इसी से खर्राटों की आवाज़ आती है। नाक बंद होना, टॉन्सिल्स की सूजन, जीभ का अत्यधिक ढीलापन या गर्दन के आसपास नरम ऊतकों का बढ़ना वायुमार्ग को संकरा कर सकता है। गहरी नींद में मांसपेशियों का अधिक शिथिल होना इस समस्या को और बढ़ा देता है। अगर रात में ऑक्सीजन का स्तर बार-बार गिरता है, तो यह उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी परेशानियों, स्ट्रोक, मधुमेह और दिनभर थकान जैसे जोखिम बढ़ा सकता है।\

कब सतर्क होना चाहिए?

यदि खर्राटों के साथ घुटन महसूस हो, सांस रुक-रुक कर चले, हांफना पड़े, सुबह सिरदर्द रहे, मुंह सूखा लगे या दिन में अत्यधिक नींद आए—तो यह संकेत हैं कि चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। ऐसे लक्षणों को टालना ठीक नहीं।

खर्राटों को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय

  1. वजन संतुलन बनाए रखें: गर्दन और ऊपरी वायुमार्ग में अतिरिक्त चर्बी सांस की राह को संकुचित कर सकती है। थोड़ी-सी वजन कमी भी खर्राटों की तीव्रता घटा सकती है।

  2. सोने की सही मुद्रा अपनाएं: पीठ के बल सोने पर जीभ पीछे की ओर झुक सकती है। करवट लेकर सोने से वायुमार्ग खुला रहता है और सांस लेना आसान होता है।

  3. नियमित नींद की दिनचर्या: तय समय पर सोना-जागना गले की मांसपेशियों को संतुलित रखता है। अनियमित नींद से मांसपेशियां ढीली पड़ती हैं और खर्राटे बढ़ते हैं।

  4. नाक की समस्या का समाधान: एलर्जी, साइनस या नाक बंद रहने पर मुंह से सांस लेनी पड़ती है, जिससे खर्राटे बढ़ते हैं। नाक की सफाई और एलर्जी नियंत्रण मददगार हो सकता है।

  5. जीवनशैली में सुधार: धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना, सोने से पहले भारी भोजन न करना भी लाभकारी है।

निष्कर्ष:
खर्राटे सिर्फ शोर नहीं, शरीर का चेतावनी संकेत भी हो सकते हैं। समय रहते कारणों की पहचान और छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर न केवल खर्राटों को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि बेहतर नींद और समग्र स्वास्थ्य भी पाया जा सकता है।