राजस्थान: सिर्फ एक क्लिक में करें पूरे प्रदेश का भर्मण

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari • 1 Months ago
राजस्थान: सिर्फ एक क्लिक में करें पूरे प्रदेश का भर्मण
आवाज द वॉयस/ नई दिल्ली 

89 दिन पहले 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 4 दिसंबर रविवार को राजस्थान पहुंची. भारत जोड़ो यात्रा में राजस्थान वह राज्य है, जहां वे सबसे लंबा सफर करेंगे. 
 
ऐसे में बात करते हैं राजस्थान के उन शहरों की जहां खूबसूरत जगहों पर आप अपनी सर्दी की छुट्टियां बिता सकते हैं.  
 
राजस्थान में घूमने के लिए आपके पास कई बेहतरीन ऑप्शन हैं. ऊंचे पहाड़ों से लेकर रेतीले रेगिस्तानों तक, ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर खूबसूरत झीलों तक, आप कई खूबसूरत स्पॉट्स पर जाकर यादें बना सकते हैं.
 
राजस्थान में सर्दी के मौसम ने दस्तक दे दी है. सर्दी के मौसम में ज्यादातर लोग घूमने का प्लान बनाते हैं. अगर आप भी ऐसा ही कुछ प्लान बना रहे हैं तो एक बार राजस्थान की सैर पर निकलिए. राजस्थान में आपको ऊंचे पहाड़, पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक धरोहर, खूबसूरत झील, रेतीला रेगिस्तान और माइनस तापमान भी मिल जाएगा. आज हम आपको बता रहे हैं राजस्थान की कुछ जगहों के बारे में जहां आपको सर्दी में जाने का एक अलग एहसास होगा. 
 
अजमेर
 
 
अजमेर में ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और 14 कि.मी. की दूरी पर पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के कारण, यहाँ दो संस्कृतियों का समन्वय होता है. 7 वीं शताब्दी में राजा अजयपाल चौहान ने इस नगरी की स्थापना ‘अजय मेरू’ के नाम से की.

माउंट आबू
 
 
राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है माउंट आबू. माउंट आबू को राजस्थान का कश्मीर भी कहा जाता है. सर्दी में ऊंचे पहाड़ों पर स्थित शहर का तापमान माइनस में चला जाता है. माउंट आबू में कई जैन मंदिर खूबसूरत कलाकृति के लिए फेमस हैं. नक्की झील में भी आप बोटिंग का आनंद उठा सकते हैं. माउंट आबू राजधानी जयपुर से करीब 500 किलोमीटर दूर है. आपको सड़क मार्ग से जाना होता है. ऊंचे पहाड़ों के घुमावदार रास्ते एक एडवेंचर का अहसास दिलाते हैं.
 
जोधपुर
 
 
जोधपुर कई नामों से लोकप्रिय है. जोधपुर को सूर्य नगरी भी कहते हैं और नीली नगरी के नाम से भी मशहूर है. जोधपुर राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर भी है. महल, थार के रेगिस्तान का रोमांच भी है. मेहरानगढ़ किला है पहाड़ी की चोटी पर 1200 एकड़ क्षेत्र में बना हुआ है. इसके अलावा तुरजी की बावड़ी 200 मीटर भूमिगत है. उम्मीद भवन में राजस्थान के शाही परिवारों की दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं का संग्रहालय है. खास बात है कि रेगिस्तान में ऊंट की सफारी भी करना एक अलग एडवेंचर देगा. राजस्थान में प्रमुख 4 जगहों के अलावा बीकानेर, अलवर, जयपुर भी घूमने के लिए काफी अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं.
 
उदयपुर
 
 
झीलों की नगरी उदयपुर भी खूबसूरती के लिए विश्व में मशहूर है. उदयपुर में सिर्फ झीलें ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक किलों की भी सैर कर सकते हैं. फतहसागर झील में बोटिंग का अलग ही आनंद है. पिछोला झील किनारे रेस्टोरेंट में डिनर किया जा सकता है. पिछोला के बीच में बने होटल हों या रेस्टोरेंट, आप लेक व्यू के साथ रात भी बिता सकते हैं. खास बात है कि उदयपुर में राजस्थान का सबसे बड़ा जंगल एरिया है. कुछ ऐसे जगह भी है जहां बीच जंगल में कैंप करते हुए रात बिता पा सकते हैं. उदयपुर में टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए सब कुछ उपलब्ध है. 
 
जैसलमेर
 
 
गोल्डन सिटी के नाम से मशहूर जैसलमेर को देश का सबसे बड़ा जिला भी कहा जाता है. जैसलमेर में ज्यादातर पर्यटक सर्दी की छुट्टियां बिताने आते हैं. फरवरी में लगनेवाला 3 दिन का डेजर्ट फेस्टिवल काफी प्रसिद्ध है. फेस्टिवल में फोल्क डांस, फोल्क गाना, नाटक देखने को मिलते हैं, साथ ही मशहूर राजस्थानी खाना, शॉपिंग भी करने को मिलती है. पर्यटन स्थल के तौर पर मशहूर जैसलमेर किला, बड़ा बाग, पटवों की हवेली, थार हेरिटेज संग्रहालय, गादिसर लेक, डेजर्ट नेशनल पार्क सहित अन्य जगह हैं. राजधानी जयपुर से 575 किलोमीटर दूर जैसलमेर हवाई यात्रा, सड़क मार्ग और ट्रेन, तीनों के माध्यम से पहुंचा जा सकता है. 
 
दौसा: प्राकृतिक रूप से सुन्दर
 
 
जयपुर से लगभग 55 कि.मी. दूरी पर बसा यह एक प्राचीन नगर है. राष्ट्रीय राजमार्ग 11 पर स्थित दौसा का नाम ’देव नगरी’ भी है. पूर्व कच्छवाहा राजपूत राजवंश का यह मुख्यालय था तथा इसका पुरातात्विक महत्व भी है. शहर की हलचल से दूर, ग्रामीण अनुभव प्रदान करता है दौसा. दौसा ज़िले के प्रमुख आकर्षण और दर्शनीय स्थलों का आनंद लें - राजस्थान में सदैव कुछ नया देखने को मिलता है.
 
जयपुर
 
 
जयपुर की स्थापना सन् 1727 में की गई थी. आमेर के राजा जयसिंह द्वितीय द्वारा इस शहर का निर्माण करवाया गया. बढ़ती आबादी और पानी की कमी के कारण उन्होंने अपनी राजधानी को आमेर से इस नए शहर जयपुर में स्थानान्तरित कर दिया.
 
चित्तौड़गढ़
 
 
राजपुताने का गौरव, शौर्य और बलिदान की स्थली - चित्तौड़। चारणों द्वारा गाई गई शौर्य गाथाओं में आज भी यहाँ की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं. चित्तौड़गढ़ का क़िला, 180 मीटर ऊँची पहाड़ी पर बना और 700 एकड़ में फैला सर्वोत्तम तथा सबसे बड़ा क़िला है.
 
डूंगरपुर
 
 
यहाँ के पहाड़ों में, नायाब हरे रंग का संगमरमर निकलता है, जो कि दुनियाँ भर की इमारतों में जड़ा जाता है. अरावली पहाड़ियों की तलहटी में बसा यह शहर, एक तरफ कठोर और जंगली है तो दूसरी तरफ उपजाऊ मैदानों से भरा है.
 
बीकानेर
 
 
‘रेगिस्तानी जहाज़’ यानी ऊँट। दुनियाँ का सबसे बड़ा ऊँट अनुसंधान और प्रजनन केन्द्र बीकानेर में है। बीकानेर की स्थापना सन् 1488 ई. में, राठौड़ राजकुमार राव बीकाजी ने की थी.
 
 
 
अलवर
 
 
यह शहर राजस्थान का सिंहद्वार है और आदिकाल में मत्स्य देश के नाम से भी जाना जाता है. यहीं पर महाभारत के शक्तिशाली नायक पांडवों ने 13 वर्षों तक निर्वासन के अन्तिम वर्ष बिताए थे.
 
राजसमन्द
 
 
मार्बल उत्पादन के लिए पहचान बनाने वाले राजसमन्द ज़िले में सुन्दर झीलें, अलौकिक महल, ऐतिहासिक वास्तुकला और वन्य जीव अभ्यारण्य पार्क भी हैं.
 
बांसवाड़ा
 
 
राजस्थान के सुदूर दक्षिणांचल में अरावली की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित बांसवाड़ा की स्थापना महारावल जगमालसिंह ने की. वागड़ (बांसवाड़ा - डूंगरपुर) - मेवाड़, मालवा एवं गुजरात की संस्कृति का संगम स्थल है.
 
बूंदी
 
 
सागर, कुण्ड और बावड़ियों का शहर सुख, चैन और सुक़ून की तलाश में नोबेल पुरस्कार विजेता रूडयार्ड किपलिंग ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘‘किम’’ का कुछ अंष, बून्दी में सुखमहल के शांत वातावरण में बैठकर लिखा.
 
झालावाड़
 
 
सन् 1791 ए.डी. में घने जंगलों के बीच ‘छावनी उमेदपुरा’ नाम से एक सैनिक छावनी स्थापित की थी, कोटा स्टेट के दीवान राजपूत झाला जालिम सिंह ने.
 
पुष्कर
 
 
बावन घाटों से सजी पुष्कर झील और ब्रह्मा जी के प्रसिद्ध मंदिर के लिए, पुष्कर सिर्फ राजस्थान और भारत में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी पहचाना जाता है.
 
कोटा
 
 
चम्बल नदी के पूर्वी तट पर बसा कोटा नगर राजस्थान के प्रमुख शैक्षणिक, औद्योगिक तथा पर्यटन महत्व का केन्द्र है.
 
भरतपुर
 
 
पर्यटकों के लिए भरतपुर मूलतः पक्षी विहार है. भरतपुर का नाम भगवान श्रीरामचन्द्र जी के भ्राता ’भरत’ के नाम पर रखा गया. दूसरे भाई लक्ष्मण, भरतपुर के राज परिवार के कुलदेवता के रूप में प्रतिष्ठित है.
 
सवाई माधोपुर
 
 
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने वाला रणथम्भौर का क़िला, ऐतिहासिक और रोमांचक है. विन्ध्या और अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र क़िले, मंदिर और रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के लिए, पर्यटकों की पहली पसंद है.
 
नागौर
 
 
जंगलादेश के नाम से जाना जाने वाला नगर, नागौर, उत्तर पश्चिम मारवाड़ में स्थित है. महाभारत समय में इसे जंगलादेश कहते थे.