नई दिल्ली
सिरदर्द आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बेहद आम समस्या बन चुका है। कभी तेज धूप, कभी तनाव, तो कभी कम पानी पीना—इन सभी कारणों से सिरदर्द हो सकता है। लेकिन कई लोग माइग्रेन और निर्जलीकरण यानी शरीर में पानी की कमी से होने वाले सिरदर्द के बीच अंतर नहीं समझ पाते। यही वजह है कि सही इलाज में देरी हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों समस्याओं के लक्षण कुछ हद तक मिलते-जुलते जरूर हैं, लेकिन इनके कारण, प्रभाव और उपचार पूरी तरह अलग होते हैं।
निर्जलीकरण से होने वाला सिरदर्द तब शुरू होता है जब शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है। पानी की कमी के कारण मस्तिष्क हल्का सिकुड़ने लगता है, जिससे उसके आसपास मौजूद संवेदनशील झिल्लियों पर दबाव पड़ता है। यही दबाव सिरदर्द का कारण बनता है। आमतौर पर यह दर्द माथे या सिर के दोनों तरफ महसूस होता है। दर्द हल्का या मध्यम हो सकता है और अक्सर धड़कन जैसा महसूस होता है। अच्छी बात यह है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बाद यह सिरदर्द 30 मिनट से दो घंटे के भीतर ठीक हो सकता है।
हाल ही में प्रकाशित कई शोधों में यह बात सामने आई है कि शरीर के वजन का केवल 1 से 2 प्रतिशत पानी कम होने पर भी मस्तिष्क की कार्यक्षमता और मनोदशा पर असर पड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी भी हो सकती है।
दूसरी तरफ माइग्रेन एक सामान्य सिरदर्द नहीं, बल्कि तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गंभीर समस्या है। इसमें मस्तिष्क के भीतर रासायनिक और विद्युत गतिविधियों में बदलाव होता है, जिसके कारण तेज और धड़कन वाला दर्द शुरू होता है। माइग्रेन का दर्द आमतौर पर सिर के एक तरफ अधिक होता है और यह इतना तेज हो सकता है कि व्यक्ति का सामान्य काम करना मुश्किल हो जाए।
माइग्रेन के साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं। जैसे तेज रोशनी से परेशानी होना, आवाज से चिढ़ महसूस होना, मतली आना या उल्टी होना। कई लोगों को सिरदर्द शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमक, धुंधलापन या अजीब दृश्य दिखाई देते हैं, जिसे ‘ऑरा’ कहा जाता है। माइग्रेन का दौरा 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक रह सकता है और केवल पानी पीने से इसमें राहत नहीं मिलती।
विशेषज्ञ बताते हैं कि निर्जलीकरण वाला सिरदर्द आमतौर पर गर्म मौसम, अधिक पसीना आने, कम पानी पीने, शराब या अत्यधिक कैफीन के सेवन से जुड़ा होता है। वहीं माइग्रेन तनाव, नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव और कुछ खाद्य पदार्थों से भी ट्रिगर हो सकता है।
हालांकि पानी की कमी माइग्रेन को भी बढ़ा सकती है। इसलिए रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना दोनों समस्याओं से बचाव का आसान तरीका माना जाता है। सामान्यतः वयस्कों को प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है।
अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो, बुखार, गर्दन में अकड़न, कमजोरी, बोलने में परेशानी या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर पहचान और इलाज ही गंभीर समस्याओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।