ईद 2026: चांदनी चौक से सरोजिनी तक: कहां सजवाएं इस बार अपनी मेहंदी

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 19-03-2026
Delhi is decked up in the moonlight, with crowds flocking to the markets for mehndi.
Delhi is decked up in the moonlight, with crowds flocking to the markets for mehndi.

 

अर्सला खान/नई दिल्ली 

चांद रात की आहट के साथ दिल्ली की शामों में एक अलग ही चमक उतर आई है। रोजा खोलने के बाद जैसे ही लोग घरों से बाहर निकलते हैं, बाजारों की रफ्तार तेज हो जाती है। रोशनी से सजी गलियां, दुकानों के बाहर उमड़ती भीड़ और हर चेहरे पर त्योहार की तैयारी साफ दिखती है। इसी हलचल के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा सुनाई देता है। इस बार मेहंदी कहां से लगवाएं।
 

पुरानी दिल्ली का चांदनी चौक हर साल की तरह इस बार भी चांद रात का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। शाम ढलते ही यहां की तंग गलियां जिंदा हो उठती हैं। फुटपाथों पर छोटे छोटे स्टॉल सज जाते हैं। कुर्सियों पर बैठी लड़कियां अपने हाथ आगे बढ़ाए इंतजार करती नजर आती हैं। मेहंदी आर्टिस्ट तेजी से काम करते हैं। लेकिन हर डिजाइन में बारीकी साफ दिखती है। अरबी पैटर्न, फूलों की बेल और पारंपरिक मोटिफ यहां सबसे ज्यादा बन रहे हैं। भीड़ इतनी होती है कि कई बार अपनी बारी आने में लंबा वक्त लग जाता है। फिर भी लोग यहां से लौटना नहीं चाहते।
 
 
दूसरी ओर लाजपत नगर मार्केट में माहौल थोड़ा अलग है। यहां मेहंदी लगवाना एक व्यवस्थित अनुभव बन जाता है। दुकानों के बाहर सजे बोर्ड और कुर्सियों पर बैठे प्रोफेशनल आर्टिस्ट नजर आते हैं। यहां आने वाली लड़कियां डिजाइन को लेकर ज्यादा सजग दिखती हैं। मोबाइल स्क्रीन पर सेव किए गए पैटर्न दिखाए जाते हैं। फिर उसी के मुताबिक काम होता है। ब्राइडल और हैवी डिजाइन के लिए यह बाजार खास पसंद किया जा रहा है। कीमत ज्यादा है, लेकिन संतोष भी उतना ही मिलता है।
 
 
 
कम बजट में स्टाइल तलाशने वालों के लिए सरोजिनी नगर मार्केट की रौनक अलग ही है। यहां सब कुछ तेजी से होता है। मेहंदी भी। खरीदारी भी। युवतियां दोस्तों के साथ आती हैं। जल्दी डिजाइन चुनती हैं और कुछ ही मिनटों में हाथ सजा लेती हैं। छोटे और ट्रेंडी पैटर्न यहां ज्यादा देखे जा रहे हैं। सादगी में स्टाइल ढूंढने वालों के लिए यह जगह अब भी पहली पसंद बनी हुई है।
 
 
चांद रात की असली रूह को महसूस करना हो तो जामा मस्जिद इलाका का रुख किया जाता है। यहां सिर्फ मेहंदी नहीं लगती। यहां त्योहार सांस लेता है। इत्र की खुशबू हवा में घुली रहती है। खाने की दुकानों से उठती महक लोगों को रोक लेती है। और मेहंदी के स्टॉल इस पूरे माहौल को पूरा करते हैं। परिवारों के साथ आई लड़कियां यहां बैठकर आराम से मेहंदी लगवाती हैं। बातचीत होती है। हंसी गूंजती है। और वक्त जैसे ठहर जाता है।
 
 
इस बार एक और बदलाव साफ नजर आ रहा है। मेहंदी के डिजाइन अब सिर्फ बाजार तय नहीं कर रहे। Instagram पर देखे गए पैटर्न तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लड़कियां पहले वहां से डिजाइन चुनती हैं। फिर उसी को अपने हाथों पर उतारती हैं। इससे हर हाथ पर एक नई कहानी बनती है।
 
 
चांद रात दरअसल इंतजार की रात है। लेकिन यह सिर्फ चांद देखने का इंतजार नहीं। यह अपने आप को संवारने का वक्त भी है। मेहंदी की खुशबू इस एहसास को और गहरा कर देती है। दिल्ली के बाजार हर साल इस एहसास को और खूबसूरत बना देते हैं। इस बार भी वही रंग है। वही भीड़ है। और वही चमक। फर्क सिर्फ इतना है कि हर हाथ पर इस बार एक नया डिजाइन है और हर चेहरे पर एक नई खुशी।