नई दिल्ली
अंडा लंबे समय से सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर अंडा शरीर को ऊर्जा देने के साथ मांसपेशियों और दिमाग के विकास में भी मदद करता है। लेकिन जब बात कोलेस्ट्रॉल की आती है, तो सबसे पहले अंडे की जर्दी पर सवाल उठने लगते हैं। कई लोग मानते हैं कि जर्दी खाने से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और हृदय रोग का खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोग अक्सर अंडे की जर्दी खाना बंद कर देते हैं।
हालांकि पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंडे की जर्दी में कोलेस्ट्रॉल जरूर होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को इससे पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
एक अंडे की जर्दी में लगभग 200 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। वहीं अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक एक स्वस्थ व्यक्ति रोजाना लगभग 300 मिलीग्राम तक कोलेस्ट्रॉल ले सकता है। इसी कारण बहुत से लोग सोचते हैं कि अंडे की जर्दी सीधे नुकसान पहुंचाती है।
लेकिन हाल के कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में केवल आहार कोलेस्ट्रॉल ही जिम्मेदार नहीं होता। विशेषज्ञ बताते हैं कि संतृप्त वसा यानी सैचुरेटेड फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाता है।
सरल शब्दों में समझें तो तला भुना खाना, प्रोसेस्ड फूड, अधिक मक्खन, घी और जंक फूड शरीर के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकते हैं। ऐसे में सिर्फ अंडे की जर्दी छोड़ देना कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण का पूरा समाधान नहीं माना जाता।
अंडे की जर्दी में कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी12, फोलेट, सेलेनियम और कई जरूरी मिनरल्स होते हैं। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आंखों की सेहत बनाए रखने और दिमाग को सक्रिय रखने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह जर्दी छोड़ देता है, तो वह इन जरूरी पोषक तत्वों से भी वंचित हो सकता है। इसलिए संतुलन बनाना ज्यादा जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति रोजाना चार अंडों की सफेदी और दो जर्दी तक खा सकता है। वहीं जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, वे चार सफेदी और एक जर्दी का सेवन कर सकते हैं।
इसके साथ ही नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और संतुलित आहार भी बेहद जरूरी है। अगर व्यक्ति केवल जर्दी छोड़ दे लेकिन बाकी खानपान असंतुलित रहे, तो कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।
पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि अंडे को दुश्मन की तरह देखने के बजाय संतुलित मात्रा में खाना चाहिए। उबले अंडे या कम तेल में बने अंडे ज्यादा बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। इसलिए जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, मधुमेह या गंभीर कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार ही अंडे का सेवन करना चाहिए।
कुल मिलाकर, अंडे की जर्दी को पूरी तरह छोड़ देना जरूरी नहीं है। सही मात्रा, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सेवन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है।