दिल्ली में Gen Z की इफ्तार: दोस्ती, संस्कृति और साझा परंपरा का नया जश्न

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 11-03-2026
Ramadan 2026: Iftar celebrations are changing in Delhi, with Gen Z Iftar parties becoming a new symbol of brotherhood (IMG: AI)
Ramadan 2026: Iftar celebrations are changing in Delhi, with Gen Z Iftar parties becoming a new symbol of brotherhood (IMG: AI)

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

रमज़ान का महीना आते ही दिल्ली की शामों का रंग बदल जाता है। जैसे ही सूरज ढलने लगता है, मस्जिदों से अज़ान की आवाज़, गलियों में पकते कबाबों की खुशबू और बाजारों की रौनक पूरे शहर के माहौल को खास बना देती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इफ्तार की परंपरा में एक दिलचस्प बदलाव भी देखने को मिल रहा है। दिल्ली की जेन-ज़ी यानी नई युवा पीढ़ी ने इफ्तार को सिर्फ धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे दोस्ती, मेलजोल और सांस्कृतिक साझेदारी के एक सामाजिक उत्सव में बदल दिया है। आज शहर के कई हिस्सों में ऐसी इफ्तार पार्टियां देखने को मिल रही हैं जहां अलग-अलग धर्मों के युवा दोस्त एक साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं, खजूर और फल साझा करते हैं और शाम को एक यादगार अनुभव में बदल देते हैं।

दिल्ली की यही तस्वीर उसे खास बनाती है। ऐसे समय में जब समाज में अक्सर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव या मतभेद की खबरें सामने आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के पार्कों, कैफे और ऐतिहासिक इलाकों में हिंदू-मुस्लिम दोस्त साथ बैठकर इफ्तार करते दिखाई देते हैं। यह नज़ारा शहर की उस गंगा-जमुनी तहज़ीब को सामने लाता है जिसकी पहचान सदियों से साझा संस्कृति और आपसी सम्मान रही है। कई युवाओं के लिए यह सिर्फ इफ्तार नहीं बल्कि दोस्ती का जश्न है, जहां रोज़ा खोलने की परंपरा के साथ-साथ भाईचारे और एकता का संदेश भी दिखाई देता है।

हरी घास पर एक लंबा सफेद कपड़ा सलीके से बिछा है, जिस पर खजूर, फल, पकौड़े, जूस, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स सजाए गए हैं। इफ़्तार का वक्त होते ही दिल्ली की Sunder Nursery में दोस्त और परिवार इकट्ठा होने लगते हैं। पीछे ऐतिहासिक स्मारकों पर ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी पड़ती है और बच्चों की हंसी, बातचीत और हल्की चहल-पहल से पूरा माहौल जीवंत हो उठता है।
 
रमज़ान के दौरान अब दिल्ली में इफ़्तार मनाने का तरीका भी बदल रहा है। जहां पहले लोग पारंपरिक रूप से Jama Masjid या जामिया नगर की गलियों में इफ़्तार के लिए जुटते थे, वहीं अब कई युवा और परिवार खुले बागों में पिकनिक-स्टाइल इफ़्तार को पसंद कर रहे हैं। इसी वजह से Lodhi Garden और सुंदर नर्सरी जैसे पार्क रमज़ान की शामों में नई इफ़्तार डेस्टिनेशन बनते जा रहे हैं। 
 

 
 

 

 
 
 
 
 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 
 
 

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इन दिनों दिल्ली में युवाओं के बीच इफ्तार के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में निजामुद्दीन इलाके में स्थित Sunder Nursery का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है। ऐतिहासिक मकबरों, हरे-भरे लॉन और शांत वातावरण से घिरा यह हेरिटेज पार्क शाम के समय बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। रमज़ान के दौरान यहां का माहौल और भी खास हो जाता है। कई युवा अपने दोस्तों के साथ यहां पिकनिक मैट लेकर आते हैं और घास पर बैठकर इफ्तार करते हैं। किसी के बैग में खजूर होती है तो कोई फल और जूस लेकर आता है, तो कोई घर से समोसे या सैंडविच लेकर पहुंचता है। पार्क के भीतर मौजूद Fab Cafe जैसे कैफे भी इस दौरान युवाओं से भरे रहते हैं, जहां लोग हेल्दी स्नैक्स और पेय पदार्थों के साथ इफ्तार का आनंद लेते हैं। इफ्तार के बाद अक्सर युवा पार्क में टहलते हैं, तस्वीरें लेते हैं और देर तक बातचीत करते हुए समय बिताते हैं। सोशल मीडिया पर साझा की जा रही तस्वीरों और वीडियो ने भी इस जगह को जेन-ज़ी के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

दिल्ली में अगर रमज़ान की असली रौनक देखनी हो तो जामिया नगर के पास स्थित Zakir Nagar की गलियों का रुख करना पड़ता है। जैसे ही इफ्तार का समय करीब आता है, यह इलाका एक बड़े फूड मार्केट में बदल जाता है। छोटी-छोटी दुकानों और ठेलों पर तरह-तरह के पकवान सज जाते हैं और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यहां मिलने वाले सीख कबाब, निहारी, हलीम, चिकन रोल और शामी कबाब जैसे पकवान खाने के शौकीनों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं। मीठे में फिरनी, शाही टुकड़ा और खजूर से बनी मिठाइयां भी खूब पसंद की जाती हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले लोगों में सिर्फ रोज़ा रखने वाले ही नहीं होते, बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी आते हैं जो अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ इफ्तार का अनुभव साझा करना चाहते हैं। कई कॉलेज के छात्र-छात्राएं अपने दोस्तों के साथ यहां पहुंचते हैं और स्ट्रीट फूड का स्वाद लेते हुए रमज़ान की रौनक का हिस्सा बनते हैं।

दिल्ली का दिल कहे जाने वाला Connaught Place भी इन दिनों जेन-ज़ी की इफ्तार पार्टियों का नया अड्डा बनता जा रहा है। गोलाकार बाजार, रोशन इमारतें और कैफे-रेस्टोरेंट की लंबी कतारें इस जगह को युवाओं के लिए हमेशा से आकर्षक बनाती रही हैं। रमज़ान के दौरान कई दोस्त यहां इफ्तार के लिए मिलते हैं और उसके बाद कैफे में बैठकर घंटों बातचीत करते हैं। कुछ लोग डेट शेक, कबाब प्लेटर या हल्के स्नैक्स के साथ रोज़ा खोलते हैं, जबकि कई लोग इफ्तार के बाद डिनर के लिए रुक जाते हैं। इस इलाके का खुला माहौल और देर रात तक रहने वाली रौनक इसे युवाओं के लिए एक सामाजिक मिलन स्थल बना देती है।

 
 

 

 
 
 
 
 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 
 
 

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अगर पारंपरिक माहौल में इफ्तार का अनुभव लेना हो तो पुरानी दिल्ली का Jama Masjid इलाका आज भी सबसे खास माना जाता है। रमज़ान के दौरान यहां की गलियां देर रात तक लोगों से भरी रहती हैं। मस्जिद के आसपास खाने के स्टॉल, कबाब की दुकानों और मिठाई की खुशबू से पूरा इलाका महकता रहता है। यहां का मशहूर रेस्टोरेंट Karim's मुगलई खाने के लिए लंबे समय से प्रसिद्ध है और रमज़ान के दौरान यहां इफ्तार के समय बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसके अलावा आसपास की दुकानों पर बिरयानी, कबाब, शीरमाल, रूह अफज़ा और शाही टुकड़ा जैसे पकवानों का स्वाद लेने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते हैं। पुरानी दिल्ली का यह इलाका सिर्फ खाने के लिए ही नहीं बल्कि अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए भी खास है, जहां सदियों से चली आ रही परंपराएं आज भी जीवित दिखाई देती हैं।

कई युवा ऐसे भी हैं जो भीड़भाड़ से दूर शांत माहौल में इफ्तार करना पसंद करते हैं और इसके लिए वे शहर के बड़े पार्कों का रुख करते हैं। दिल्ली का ऐतिहासिक Lodhi Garden ऐसे लोगों के लिए एक पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। हरियाली से घिरे इस पार्क में लोग परिवार और दोस्तों के साथ बैठकर सादगी से इफ्तार करते हैं। कोई खजूर और फल लेकर आता है तो कोई जूस या हल्का नाश्ता। इफ्तार के बाद लोग पार्क में टहलते हैं और शांत माहौल में समय बिताते हैं। इस तरह के पिकनिक-स्टाइल इफ्तार का चलन खासकर युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।

 

 
 

 

 
 
 
 
 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 
 
 

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दरअसल, दिल्ली में जेन-ज़ी की ये इफ्तार पार्टियां सिर्फ खाने या सोशल मीडिया की तस्वीरों तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे एक बड़ा सामाजिक संदेश भी छिपा है। अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमि से आने वाले युवा जब एक साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं, तो वे सिर्फ एक परंपरा का पालन नहीं कर रहे होते बल्कि आपसी सम्मान, दोस्ती और सांस्कृतिक समझ को भी मजबूत कर रहे होते हैं। ऐसे छोटे-छोटे अनुभव ही शहर की साझा संस्कृति को जीवित रखते हैं। रमज़ान की इन शामों में दिल्ली की जो तस्वीर सामने आती है, वह यह बताती है कि तमाम चुनौतियों और मतभेदों के बावजूद इस शहर की पहचान आज भी विविधता, सहिष्णुता और गंगा-जमुनी तहज़ीब से जुड़ी हुई है। यहां इफ्तार की दावत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भाईचारे, एकता और इंसानियत का उत्सव बन जाती है।