नई दिल्ली
चावल भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। देश के ज्यादातर परिवारों में चावल नियमित रूप से खाया जाता है। लेकिन मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए चावल का चुनाव और उसकी मात्रा खास मायने रखती है। अक्सर ऐसे लोगों को सफेद चावल की जगह लाल या भूरे चावल खाने की सलाह दी जाती है। इसकी वजह इनमें मौजूद फाइबर और दूसरे पोषक तत्व हैं। हालांकि, क्या लाल चावल खाने से ब्लड शुगर हमेशा बेहतर नियंत्रित रहता है? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है।
लाल चावल में आमतौर पर चोकर की परत मौजूद रहती है, जिसके कारण इसमें फाइबर अधिक हो सकता है। इसके अलावा, इसमें कुछ खनिज और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं। इसके विपरीत, सफेद चावल की मिलिंग और पॉलिशिंग के दौरान चोकर की परत हट जाती है। इससे फाइबर की मात्रा कम हो जाती है।
इस लिहाज से लाल चावल पोषण के मामले में बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इसे खाने से रक्त शर्करा अचानक बढ़ेगी ही नहीं या डायबिटीज नियंत्रित हो जाएगी। लाल और सफेद, दोनों तरह के चावल में कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसलिए इनकी मात्रा, पकाने का तरीका और भोजन के साथ खाई जाने वाली दूसरी चीजें भी महत्वपूर्ण हैं।
लाल चावल में फाइबर होने के कारण यह कुछ लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसका ग्लाइसेमिक प्रभाव चावल की किस्म, प्रसंस्करण, पकाने के तरीके और खाने की मात्रा के अनुसार बदल सकता है।
2021 में प्रकाशित एक पीयर-रिव्यूड अध्ययन में प्रीडायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज वाले वयस्कों में ब्राउन राइस और सफेद चावल के प्रभावों की जांच की गई। अध्ययन में सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस खाने से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज या HbA1c में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं पाया गया। HbA1c पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत रक्त शर्करा स्तर का संकेत देता है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ब्राउन राइस और लाल चावल एक ही चीज नहीं हैं। दोनों साबुत अनाज के विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनके पोषण और प्रभाव में अंतर संभव है। इसलिए ब्राउन राइस पर हुए शोध के निष्कर्षों को सीधे लाल चावल पर लागू नहीं किया जा सकता।
इसका मतलब यह नहीं कि लाल चावल का पोषण संबंधी महत्व नहीं है। बल्कि यह समझना जरूरी है कि सिर्फ चावल बदलने से डायबिटीज पर उल्लेखनीय नियंत्रण की गारंटी नहीं मिलती।
कुछ बड़े अध्ययनों और समीक्षाओं में अधिक मात्रा में सफेद चावल खाने और टाइप-2 डायबिटीज के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। खासकर उन आहारों में, जिनमें साबुत अनाज और फाइबर की मात्रा कम होती है।
2022 में प्रकाशित एक समीक्षा में चावल के सेवन और चयापचय स्वास्थ्य से जुड़े अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें सफेद चावल के अधिक सेवन और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच संबंध की चर्चा की गई। हालांकि, इस तरह के अवलोकन संबंधी अध्ययन यह साबित नहीं करते कि सफेद चावल अकेले ही डायबिटीज का कारण है।
व्यक्ति की आनुवंशिक प्रवृत्ति, वजन, शारीरिक गतिविधि, संपूर्ण खानपान और जीवनशैली भी इस जोखिम को प्रभावित करते हैं।
चावल की कोई एक निश्चित मात्रा सभी मधुमेह रोगियों के लिए उपयुक्त नहीं होती। यह व्यक्ति की ऊर्जा जरूरत, दवाओं, शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर नियंत्रण पर निर्भर करता है। डायबिटीज होने का अर्थ यह भी नहीं कि चावल पूरी तरह छोड़ दिया जाए।
कुछ व्यावहारिक बदलाव मददगार हो सकते हैं:
मात्रा का ध्यान रखें: प्लेट का अधिकांश हिस्सा चावल से न भरें। अपनी जरूरत के अनुसार सीमित मात्रा लें।
प्रोटीन शामिल करें: चावल के साथ दाल, राजमा, चना, अंडा, मछली या पनीर जैसे विकल्प रखें।
सब्जियों को प्राथमिकता दें: पालक, पत्ता गोभी, बीन्स, लौकी और दूसरी बिना स्टार्च वाली सब्जियां भोजन में शामिल करें।
ब्लड शुगर पर नजर रखें: डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन के बाद रक्त शर्करा की जांच कर सकते हैं।
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन का प्लेट मेथड एक उपयोगी शुरुआती तरीका है। इसमें आधी प्लेट बिना स्टार्च वाली सब्जियों, एक चौथाई प्रोटीन और शेष एक चौथाई कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों के लिए रखी जाती है। हालांकि, इसे व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार समायोजित करना चाहिए।
चावल पकाने के बाद उसे ठंडा करने से उसमें प्रतिरोधी स्टार्च (रेजिस्टेंट स्टार्च) की मात्रा बढ़ सकती है। यह स्टार्च सामान्य स्टार्च की तुलना में छोटी आंत में कम पचता है। कुछ अध्ययनों में इससे भोजन के बाद रक्त शर्करा की प्रतिक्रिया में कमी के संकेत मिले हैं।
लेकिन इसका प्रभाव हर व्यक्ति और चावल की हर किस्म में समान नहीं होता। ठंडा करने से चावल के कार्बोहाइड्रेट खत्म नहीं होते और न ही उसकी मात्रा की अनदेखी की जा सकती है।
खाद्य सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है। पके हुए चावल को जल्द से जल्द ठंडा करके फ्रिज में रखें। उन्हें लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न छोड़ें और खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें। चावल को सुरक्षित तरीके से ठंडा और संग्रहित करना महत्वपूर्ण है।
डायबिटीज के मरीज संतुलित आहार में सफेद चावल भी शामिल कर सकते हैं। हालांकि, यदि उपलब्ध हो तो कम प्रसंस्कृत, फाइबर युक्त अनाज चुनना उपयोगी हो सकता है। लाल चावल के अलावा ब्राउन राइस, जौ, दलिया, दालें और दूसरे साबुत अनाज भी अच्छे विकल्प हैं।
निष्कर्ष: पोषण के लिहाज से लाल चावल को सफेद चावल पर बढ़त मिल सकती है, विशेषकर फाइबर के मामले में। लेकिन ब्लड शुगर नियंत्रण के लिए सिर्फ रंग नहीं, बल्कि चावल की किस्म, मात्रा, पूरा भोजन और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं। व्यक्तिगत खानपान की योजना के लिए डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।