नई दिल्ली। मौसम में बदलाव का असर केवल हमारी त्वचा और सेहत पर ही नहीं, बल्कि दिमाग और सिर पर भी पड़ सकता है। गर्मी से बरसात या बरसात से सर्दी की ओर बढ़ते मौसम में कई लोगों को अचानक सिरदर्द की शिकायत होने लगती है। कभी सिर भारी महसूस होता है, तो कभी माथे या सिर के एक हिस्से में तेज दर्द शुरू हो जाता है। कुछ लोगों में मौसम बदलने के साथ माइग्रेन की समस्या भी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव, हवा में नमी की मात्रा, वायुमंडलीय दबाव में बदलाव और शरीर में पानी की कमी जैसे कई कारण सिरदर्द को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, हर सिरदर्द के लिए मौसम को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। इसके पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मौसम बदलने पर सिरदर्द क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं और किन परिस्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
1. वायुमंडलीय दबाव में बदलाव
मौसम बदलने के साथ वातावरण में हवा का दबाव भी घटता-बढ़ता रहता है। कुछ लोग इस बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
चिकित्सा पत्रिका करंट पेन एंड हेडेक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वायुमंडलीय दबाव में उतार-चढ़ाव माइग्रेन से पीड़ित कुछ लोगों में सिरदर्द का कारण बन सकता है। हालांकि, मौसम और माइग्रेन के बीच संबंध को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।
2. तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव
कभी तेज गर्मी और अचानक ठंडक या फिर ठंड के बाद तापमान बढ़ने से कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।
विशेष रूप से गर्म मौसम में शरीर से पसीने के जरिए अधिक पानी निकलता है। यदि इसकी भरपाई नहीं की जाए, तो सिरदर्द होने की आशंका बढ़ जाती है।
3. शरीर में पानी की कमी
निर्जलीकरण यानी डिहाइड्रेशन सिरदर्द का एक प्रमुख कारण हो सकता है। गर्म और उमस भरे मौसम में शरीर पसीने के जरिए पानी खोता है।
यदि पर्याप्त पानी नहीं पिया जाए, तो सिरदर्द के साथ थकान, चक्कर आना, अधिक प्यास लगना और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
4. हवा में नमी, धूल और प्रदूषण
मौसम बदलने पर वातावरण में नमी, धूल और प्रदूषण का स्तर भी बदल सकता है। इन परिस्थितियों में एलर्जी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कुछ लोगों में धूल, धुएं या प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से सिरदर्द या माइग्रेन के लक्षण बढ़ सकते हैं। वहीं, एलर्जी के कारण नाक बंद होने और चेहरे पर दबाव महसूस होने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।
5. नींद और दिनचर्या में बदलाव
मौसम बदलने के दौरान लोगों की नींद, खानपान और शारीरिक गतिविधियों में भी बदलाव आ सकता है।
पर्याप्त नींद नहीं लेना, लंबे समय तक भूखे रहना, भोजन छोड़ देना या चाय-कॉफी का सेवन अचानक कम कर देना भी सिरदर्द की वजह बन सकता है।
मौसम बदलने के दौरान होने वाला हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता। दोनों के लक्षणों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं।
अमेरिकन माइग्रेन फाउंडेशन के अनुसार, तनाव से संबंधित सिरदर्द में आमतौर पर माथे, कनपटियों या सिर के पिछले हिस्से में दबाव और जकड़न महसूस होती है। यह दर्द हल्का या मध्यम हो सकता है और आमतौर पर इसके साथ उल्टी नहीं होती।
इसके विपरीत माइग्रेन का दर्द अक्सर अधिक तीव्र होता है। यह सिर के एक तरफ हो सकता है, हालांकि कई बार दोनों तरफ भी महसूस होता है।
माइग्रेन के दौरान मतली, उल्टी, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। कुछ मरीजों को दर्द शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमकती रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं या शरीर में झुनझुनी जैसे लक्षण भी महसूस होते हैं। इसे माइग्रेन ऑरा कहा जाता है।
कई लोग माथे या चेहरे में दर्द होने पर इसे साइनस का सिरदर्द मान लेते हैं। हालांकि, हर बार ऐसा नहीं होता।
साइनस से जुड़ी समस्याओं में नाक बंद होना, चेहरे पर दबाव महसूस होना और नाक से गाढ़ा स्राव निकलना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कई बार जिस सिरदर्द को लोग साइनस की समस्या समझते हैं, वह वास्तव में माइग्रेन हो सकता है।
इसलिए बार-बार सिरदर्द होने पर स्वयं बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें। खासकर गर्मी और उमस के दौरान पानी का सेवन पर्याप्त रखें। हालांकि, किडनी या हृदय संबंधी बीमारी के कारण तरल पदार्थ सीमित रखने की सलाह मिली हो, तो डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।
समय पर भोजन करें: लंबे समय तक भूखे रहने और भोजन छोड़ने से बचें। नियमित अंतराल पर संतुलित आहार लेने से कुछ लोगों में सिरदर्द की समस्या कम हो सकती है।
नींद पूरी करें: रोजाना लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। वयस्कों के लिए सामान्यतः सात से नौ घंटे की नींद उपयोगी मानी जाती है।
चाय-कॉफी का सेवन संतुलित रखें: कैफीन का सेवन अचानक बहुत कम करने या बंद करने से भी सिरदर्द हो सकता है। यदि इसे कम करना चाहते हैं, तो धीरे-धीरे मात्रा घटाएं।
तेज धूप और प्रदूषण से बचें: अत्यधिक गर्मी, तेज धूप, धुएं और धूल के संपर्क में आने से बचने की कोशिश करें, विशेष रूप से यदि इनसे पहले भी सिरदर्द बढ़ता रहा हो।
सिरदर्द का रिकॉर्ड रखें: सिरदर्द कब शुरू हुआ, कितनी देर रहा, मौसम कैसा था, आपने क्या खाया और कितनी नींद ली, जैसी जानकारियां लिखकर रखें। इससे डॉक्टर को सिरदर्द का संभावित कारण समझने में मदद मिल सकती है।
अधिकांश सामान्य सिरदर्द गंभीर नहीं होते, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
यदि सिरदर्द अचानक बेहद तेज शुरू हो, जीवन का सबसे गंभीर सिरदर्द महसूस हो, या इसके साथ बोलने में परेशानी, हाथ-पैर में कमजोरी, बेहोशी, भ्रम या अचानक देखने में दिक्कत हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
इसी तरह बुखार के साथ गर्दन में अकड़न या सिर में चोट लगने के बाद होने वाले तेज सिरदर्द को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
यदि 50 वर्ष की उम्र के बाद पहली बार नए प्रकार का सिरदर्द शुरू हुआ है, दर्द लगातार बढ़ रहा है या पहले के सिरदर्द से अलग महसूस हो रहा है, तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं।
कभी-कभार होने वाले हल्के सिरदर्द में दर्द निवारक दवाएं राहत दे सकती हैं, लेकिन बिना सलाह के इनका बार-बार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अत्यधिक उपयोग से उल्टा सिरदर्द बढ़ने की समस्या भी हो सकती है।
मौसम में बदलाव कुछ लोगों के लिए सिरदर्द या माइग्रेन का ट्रिगर बन सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार मौसम ही जिम्मेदार है।
शरीर में पानी की कमी, तनाव, अनियमित नींद, खानपान की गड़बड़ी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी सिरदर्द की वजह हो सकती हैं।
इसलिए सिरदर्द को केवल मौसमी परेशानी समझकर नजरअंदाज करने के बजाय उसके लक्षणों और बार-बार होने की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद, संतुलित खानपान और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।