नई दिल्ली
लहसुन भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध में भी लहसुन के कुछ संभावित स्वास्थ्य लाभ सामने आए हैं। इसमें मौजूद सल्फर यौगिक रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसके सभी स्वास्थ्य लाभों को लेकर अभी और शोध की आवश्यकता है।
लहसुन के औषधीय गुणों के लिए मुख्य रूप से इसमें मौजूद सक्रिय यौगिक जिम्मेदार माने जाते हैं। इनमें एलिसिन सबसे प्रमुख है। जब लहसुन की कलियों को काटा, कुचला या चबाया जाता है, तो उनमें मौजूद एंजाइम की क्रिया से एलिसिन बनता है। यह यौगिक अस्थिर होता है और अधिक समय तक अपने मूल रूप में नहीं रहता। डायलील डाइसल्फाइड और एस-एलिल सिस्टीन जैसे अन्य यौगिक भी लहसुन के संभावित स्वास्थ्य लाभों में योगदान देते हैं।
आइए जानते हैं लहसुन के कुछ प्रमुख फायदे।
लहसुन में कैलोरी की मात्रा कम होती है, जबकि इसमें कई उपयोगी पोषक तत्व पाए जाते हैं। लगभग तीन ग्राम लहसुन की एक कली में करीब 4.5 कैलोरी, 0.2 ग्राम प्रोटीन और एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है।
इसके अलावा, लहसुन में मैंगनीज, विटामिन बी6, विटामिन सी, सेलेनियम और थोड़ी मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है। हालांकि, आमतौर पर लहसुन का सेवन कम मात्रा में किया जाता है, इसलिए इससे मिलने वाले पोषक तत्वों की कुल मात्रा भी सीमित रहती है।
लहसुन में मौजूद कुछ यौगिकों में रोगाणुरोधी और एंटीवायरल गुण पाए गए हैं। कुछ अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि लहसुन के अर्क का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े कुछ पहलुओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
2016 के एक अध्ययन में एज्ड गार्लिक एक्सट्रेक्ट (AGE) के संभावित लाभों का मूल्यांकन किया गया। इसमें पाया गया कि तीन महीने तक इसका सेवन करने वाले प्रतिभागियों में सर्दी-जुकाम के लक्षणों की गंभीरता कम हो सकती है।
हालांकि, इन परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि लहसुन सर्दी-जुकाम को निश्चित रूप से रोकता या ठीक करता है। इस विषय पर अभी और व्यापक शोध की जरूरत है।
उच्च रक्तचाप हृदय रोग और स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लहसुन के सप्लीमेंट उच्च रक्तचाप वाले लोगों में रक्तचाप कम करने में मदद कर सकते हैं।
2020 में प्रकाशित शोध-समीक्षा में भी लहसुन के सप्लीमेंट के सेवन और रक्तचाप में कमी के बीच संबंध पाया गया। वहीं, 2019 के एक अध्ययन में लहसुन के एलिसिन यौगिक के संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई।
वैज्ञानिकों के अनुसार, लहसुन के कुछ सक्रिय यौगिक रक्त वाहिकाओं को शिथिल करने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। फिर भी, लहसुन को रक्तचाप की निर्धारित दवाओं का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
लहसुन का एक अन्य संभावित लाभ कोलेस्ट्रॉल के स्तर से जुड़ा है। कुछ शोधों में पाया गया है कि लहसुन के सप्लीमेंट कुल कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकते हैं।
2018 की एक शोध-समीक्षा में इस संभावित लाभ का उल्लेख किया गया। वहीं, 2016 के एक अध्ययन में दो महीने से अधिक समय तक लहसुन के सप्लीमेंट लेने वाले कुछ प्रतिभागियों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी देखी गई।
हालांकि, इसका प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता। लहसुन के सेवन से एचडीएल यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि होने के ठोस प्रमाण भी सीमित हैं। इसी तरह, ट्राइग्लिसराइड के स्तर पर इसका प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है।
लहसुन को सामान्य भोजन का हिस्सा बनाना अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है। लेकिन अधिक मात्रा में कच्चा लहसुन खाने से पेट में जलन, गैस, मतली या अन्य पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। लहसुन के सप्लीमेंट रक्त को पतला करने वाली दवाओं के साथ भी परस्पर प्रभाव डाल सकते हैं।
इसलिए उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को केवल लहसुन के भरोसे अपनी दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार ही बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।