फरहान इसराइली / जयपुर
गुलाबी नगरी जयपुर में पाक महीने रमज़ान का स्वागत होने जा रहा है। इस बार रमज़ान फरवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की संभावना है, चांद दिखाई देने पर रोज़े 17 या 18 फरवरी से रखे जा सकते हैं। करीब तीन दशक बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब रमज़ान फरवरी में पड़ रहा है। साल 1995 में 1 फरवरी को पहला रोज़ा रखा गया था। गुलाबी नगरी का ऐतिहासिक परकोटा, रामगंज, घाटगेट, चार दरवाजा और एमडी रोड की गलियों में फिर से रमज़ान के मौके पर रौनक और रोशनी देखने को मिल रही है।

शहर के बाजारों में अब तक की तैयारी तेज़ हो चुकी है। शाम होते ही इन गलियों में चहल-पहल बढ़ जाती है। रामगंज बाजार में दुकानों के बाहर रंग-बिरंगी टोपी, खजूर के ढेर और इत्र की खुशबू ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। स्थानीय व्यापार मंडल ने रोशनी और सजावट की जिम्मेदारी संभाली है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि भीड़ तो है, लेकिन खरीदारी का उत्साह पहले जैसा नहीं है।
रमज़ान की सबसे पहचान वाली चीज़ों में से एक खजूर इस बार 15 से 20 फीसदी महंगे हो गए हैं। थोक व्यापारी अब्दुल जमील के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट की बढ़ती लागत और इंपोर्ट ड्यूटी में वृद्धि के कारण कीमिया खजूर की कीमत पिछले साल 180 रुपये प्रति किलो थी, जो इस साल 220-240 रुपये तक पहुंच गई है। ग्राहक अब कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं या सस्ती किस्मों की तलाश में हैं।
जौहरी बाजार की फ्रूट मंडी में इस बार 28 किस्म के खजूर उपलब्ध हैं, जिनमें सऊदी अरब, ईरान, इराक और मोरक्को से आने वाले डेगलेट नूर, मेडजूल, बरही, कीमिया, अंबर, अजवा, सफावी और मजाफाती शामिल हैं। कीमतें 100 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक हैं। अजवा खजूर सबसे महंगा और लोकप्रिय माना जाता है।
खरीदारी करने आए शेख अबरार ने कहा कि रमज़ान बरकतों का महीना है। इबादत में कमी नहीं करेंगे, लेकिन खर्च सीमित करना पड़ रहा है। पहले वे 5 किलो खजूर खरीदते थे, अब केवल 2 किलो ही खरीद पा रहे हैं। वहीं रेशमा बानो बताती हैं कि तेल और चीनी की बढ़ती कीमतों ने सेहरी और इफ्तार का बजट बिगाड़ दिया है। पकौड़े और तली हुई चीज़ें भी महंगी हो गई हैं, फिर भी बच्चों की पसंद का ध्यान रखा जा रहा है।
रामगंज में जमात के मरकज़ के पास पुराने बाजार की दुकानों में रमज़ान के मौके पर खास रौनक है। ‘अल इब्राहिम इम्पेरियम’ की संचालक मोहम्मद सालेह बताते हैं कि दुकान पर 300 से अधिक तरह के इत्र उपलब्ध हैं। ऊद, अरबियन फ्रेगरेंस, वेस्टर्न नोट्स और मिक्स खुशबू ग्राहकों को लुभा रही हैं।

सालेह के मुताबिक, रमज़ान में ऊद की मांग बढ़ जाती है और लोग लंबी टिकने वाली खुशबू पसंद करते हैं। उनकी दुकान पर 10 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक की टोपी भी उपलब्ध हैं। मौलाना स्टाइल, जिन्ना टोपी, अफगानी, कश्मीरी और जाली टोपी जैसी डिज़ाइन इस रमज़ान में लोगों की पसंद में शामिल हैं। हिजाब की कीमत 100 से 200 रुपये तक है। छोटे बॉक्स पैक में कुरान मजीद भी तोहफे के रूप में उपलब्ध हैं।
इसी बाजार में ‘हुमा परफ्यूम’ चलाने वाले अतीक अहमद पिछले 16 सालों से कारोबार कर रहे हैं। उनके पास 250 से 300 तरह की खुशबू हैं। रमज़ान में ग्राहक नई खुशबू की तलाश करते हैं। गुच्ची फ्लोरा, गुच्ची गिल्टी, सीआर7 और हवास जैसे इंटरनेशनल नोट्स इस समय में ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। चंदन-केसर इत्र की मांग सभी समुदायों में बनी रहती है। अतीक ग्राहकों को मुगलकालीन शैली की चमड़े की बोतलों में इत्र देने की भी सुविधा देते हैं।
रमज़ान में मिठाइयों की भी विशेष मांग होती है। रामगंज की 85 साल पुरानी मौलाना हलवाई की दुकान इस समय में खास पहचान रखती है। यहां के गुलाब जामुन और हलवे खाड़ी देशों तक भेजे जाते हैं। मूंग, अखरोट, पाइनेपल, घीया, अंडा, चना और मैंगो हलवा की खास मांग रहती है। केसर और नूरानी हलवा भी दुबई तक निर्यात किए जाते हैं। शुद्ध मावा, देसी घी और इलायची से तैयार ये मिठाइयाँ रमज़ान में खास स्थान रखती हैं।
इफ्तार और सेहरी के समय रामगंज और घाटगेट की गलियों में अलग ही माहौल नजर आता है। शीरमाल रोटी की भारी मांग होती है। यह रोटी दूध और मेवों से बनी होती है और बिना सालन के भी लोगों को पसंद आती है। दुकानों पर टंगी यह शाही रोटी सैलानियों को भी आकर्षित करती है।
महंगाई के बावजूद जयपुर के बाजारों में उत्साह और तैयारी कम नहीं है। ट्रैफिक और भीड़ का दबाव इस बात का संकेत है कि अकीदत और परंपरा की गर्माहट आर्थिक चुनौतियों पर भारी पड़ रही है। रोजेदार अपनी क्षमता के अनुसार तैयारी में जुटे हैं। व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि जैसे-जैसे ईद करीब आएगी, कारोबार में तेजी आएगी। प्रशासन से यह उम्मीद की जा रही है कि आवश्यक सामान की कालाबाजारी पर सख्ती की जाएगी, ताकि रमज़ान की रौनक सभी के लिए सहज और सुलभ बनी रहे।
.jpeg)
रामगंज स्थित अर्श टेक्सटाइल के संचालक अयान खान ने बताया कि इस बार रमज़ान के लिए खास कलेक्शन लाया गया है। सफेद कुर्ता-पायजामा से लेकर कढ़ाईदार डिजाइन ट्रेंड में हैं। रिटेल और होलसेल दोनों में कपड़े उपलब्ध हैं। कीमतें 35 रुपये प्रति मीटर से शुरू होकर 5000 रुपये तक जाती हैं। सामान्य कुर्ता-पायजामा 200-350 रुपये में मिल सकते हैं, जबकि बेहतर क्वालिटी 1000-2000 रुपये में उपलब्ध है। खान के अनुसार, शुरुआत में लोग राशन पर ध्यान देते हैं, लेकिन ईद नजदीक आने पर कपड़ों की बिक्री में तेजी आती है। अर्श टेक्सटाइल और अन्य दुकानों पर नई वैरायटी सज चुकी है, जिससे बाजार रमज़ान की तैयारियों के लिए पूरी तरह जीवंत नजर आ रहा है।
इस तरह, जयपुर में रमज़ान की तैयारियाँ उत्साह, परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण हैं। महंगाई के बावजूद, शहर के बाजारों में रौनक, खुशबू और मिठास बरकरार है, और रोजेदार इबादत और खरीदारी दोनों में संतुलन बनाए हुए हैं।