नई दिल्ली
केला भारत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है। यह सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है—क्या रोजाना केला खाना सुरक्षित है? क्या इससे ब्लड शुगर बढ़ता है? और क्या मधुमेह रोगी केला खा सकते हैं? आइए सरल शब्दों में समझते हैं।
एक केले में कितनी शुगर होती है?
एक मध्यम आकार (लगभग 118 ग्राम) के केले में करीब 14 ग्राम प्राकृतिक शर्करा और लगभग 27 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसमें मौजूद शुगर मुख्य रूप से फ्रक्टोज, ग्लूकोज और सुक्रोज के रूप में होती है। हालांकि यह शुगर प्राकृतिक है और केले में फाइबर, विटामिन बी6, पोटेशियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं।
केले में मौजूद फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा करता है, जिससे ज्यादातर स्वस्थ लोगों में ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
क्या केला ब्लड शुगर बढ़ाता है?
हाँ, केला खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो शरीर में ग्लूकोज में बदलते हैं। लेकिन यह वृद्धि सामान्यतः नियंत्रित और धीरे-धीरे होती है।ध्यान देने वाली बात यह है कि केले की परिपक्वता (पकने की अवस्था) भी मायने रखती है।
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कच्चे या हल्के हरे केले में अधिक "रेजिस्टेंट स्टार्च" होता है, जो धीरे पचता है और ब्लड शुगर को कम तेजी से बढ़ाता है।
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ज्यादा पके केले में स्टार्च शुगर में बदल जाता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है।
क्या केला वजन बढ़ाता है?
एक मध्यम केले में लगभग 100–110 कैलोरी होती हैं। अगर इसे संतुलित मात्रा में खाया जाए तो यह वजन नहीं बढ़ाता। लेकिन अगर आप रोजाना कई केले खाएं या उन्हें दूध, पीनट बटर या हाई-कैलोरी खाद्य पदार्थों के साथ लें, तो कुल कैलोरी बढ़ सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है।
रोज कितने केले खाना सुरक्षित है?
अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन एक मध्यम आकार का केला खाना सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। यह ऊर्जा, पोटेशियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है।
क्या मधुमेह रोगी केला खा सकते हैं?
मधुमेह रोगी केला खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। बेहतर होगा कि:
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कम पके केले चुनें
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एक बार में आधा या छोटा केला लें
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इसे प्रोटीन या फाइबर युक्त भोजन के साथ खाएं
गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को भी पोटेशियम की अधिक मात्रा के कारण केला सीमित मात्रा में खाना चाहिए।
निष्कर्ष: रोजाना एक केला अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित और लाभकारी है, बशर्ते संतुलित आहार और नियंत्रित मात्रा का ध्यान रखा जाए।




