नई दिल्ली:
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव (स्ट्रेस) लगभग हर व्यक्ति के जीवन का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और बदलती जीवनशैली के कारण अधिकांश लोग किसी न किसी स्तर पर तनाव का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना लंबे समय में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। खासकर हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में यह एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केवल तनाव ही हृदय रोग का एकमात्र कारण नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है। जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो शरीर कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का अधिक उत्पादन करता है। ये हार्मोन शरीर को किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करते हैं, जिससे हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, रक्तचाप बढ़ता है और सांस लेने की गति भी बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह प्रतिक्रिया अल्पकालिक तनाव की स्थिति में सामान्य और उपयोगी होती है, लेकिन यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे तो यही बदलाव शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है और समय के साथ हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक तनाव रहने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, शरीर में सूजन बढ़ सकती है और रक्त शर्करा के स्तर में भी असंतुलन आ सकता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, दीर्घकालिक तनाव उच्च रक्तचाप, धमनियों की क्षति और हृदय पर अतिरिक्त दबाव का कारण बन सकता है। तनाव रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ दुर्लभ मामलों में अत्यधिक भावनात्मक आघात के कारण 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' (टाकोट्सुबो कार्डियोमायोपैथी) जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इसमें हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर पड़ जाती हैं। यह स्थिति अक्सर किसी प्रियजन की मृत्यु, गंभीर मानसिक सदमे या अत्यधिक तनावपूर्ण घटना के बाद देखी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह लोगों को अस्वस्थ जीवनशैली अपनाने की ओर धकेल सकता है। तनाव से राहत पाने के लिए कई लोग धूम्रपान, शराब का सेवन, जंक फूड खाना, अधिक भोजन करना या शारीरिक गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं। पर्याप्त नींद न लेना भी स्थिति को और गंभीर बना देता है। ये सभी आदतें मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को जन्म देती हैं, जो हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
स्वस्थ हृदय के लिए तनाव का प्रभावी प्रबंधन बेहद जरूरी माना जाता है। नियमित व्यायाम, योग, ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेने के अभ्यास और रोजाना टहलना तनाव कम करने में मददगार हो सकते हैं। इसके साथ ही संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, सात से नौ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद और परिवार या मित्रों के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे या इसका असर दैनिक जीवन और स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते तनाव का प्रबंधन न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि हृदय को भी लंबे समय तक स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।