प्रजनन की समस्या का सामना कर रहे पुरुषों को योग से हो सकता है फायदा: एम्स

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 19-06-2026
Yoga can benefit men facing fertility issues: AIIMS
Yoga can benefit men facing fertility issues: AIIMS

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्रजनन की समस्या का सामना कर रहे पुरुषों को योग से काफी फायदा हो सकता है और उनके डीएनए के नुकसान में कमी आ सकती है।
 
रविवार को मनाये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ योग' में प्रकाशित यह जानकारी इस बात की पुष्टि करती है कि योग जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें पुरुषों की प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
 
पुरुष प्रजनन समस्या से दुनिया भर में 15 प्रतिशत से अधिक दंपति प्रभावित हैं। प्रजनन अक्षमता के कुल मामलों में से लगभग आधे मामलों के लिए पुरुषों से जुड़े कारक ही जिम्मेदार हैं।
 
शोधकर्ता डॉ. प्रभाकर तिवारी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. रीमा दादा और अंजलि यादव के नेतृत्व में किये गए इस अध्ययन में, शुरुआती प्रजनन समस्या वाले पुरुषों पर 12 हफ्ते के व्यवस्थित योग सत्र के असर का मूल्यांकन किया गया। इसमें ‘सीमिनल ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस‘, शुक्राणु की गुणवत्ता और डीएनए पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया गया।
 
शरीर रचना विभाग की प्रोफेसर डॉ. दादा ने कहा कि पुरुषों में बिना किसी स्पष्ट कारण के होनी वाली प्रजनन की समस्या बढ़ रही है। इसका संबंध अस्वस्थ जीवनशैली, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, तनाव, प्रदूषण, सूक्ष्म-नैनोप्लास्टिक के संपर्क में आने और शादी व बच्चे पैदा करने में देरी से है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘इससे माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचता है और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जिससे शुक्राणु का डीएनए खराब हो सकता है... ऐसे खराब डीएनए वाले शुक्राणु का संबंध बांझपन, बार-बार गर्भपात, बाल्यावस्था में होने वाले कैंसर और जटिल न्यूरोसाइकियाट्रिक विकास से होता है।’’
 
इस अध्ययन में 25-40 साल की उम्र के कुल 78 पुरुषों को शामिल किया गया। इनमें से 42 पुरुषों ने 12 हफ्ते का सत्र पूरा किया, जिसमें हफ्ते में पांच दिन और रोज एक घंटे तक योगासन और प्राणायाम आदि शामिल था।
 
शोधकर्ताओं ने पाया कि इसके बाद प्रजनन क्षमता से जुड़े कई अहम पैमानों में काफी सुधार हुआ।
 
इस अध्ययन में, ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ और ‘ऑक्सीडेटिव डीएनए’ क्षति में भारी कमी देखी गई।