आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत ने मुख्य रूप से टायर और रबड़ उत्पादों के विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले चीन और जापान से आयातित रसायन की डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। वाणिज्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
अतुल लिमिटेड द्वारा व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) को इस संबंध में की गई शिकायत के आधार पर यह जांच की गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ‘रेसोरसिनॉल’ का सस्ता आयात घरेलू उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है।
डीजीटीआर ने अधिसूचना में कहा, ‘‘आवेदक की ओर से दाखिल आवेदन और पेश किए गए शुरुआती सबूतों के आधार पर संबंधित सामान की डंपिंग के बारे में संतुष्ट होने के बाद... प्राधिकारी इसके साथ ही डंपिंग-रोधी जांच शुरू कर रहे हैं।’’
जांच के दौरान डीजीटीआर यह निर्धारित करेगा कि चीन और जापान से निर्यात किए जा रहे ‘रेसोरसिनॉल’ की डंपिंग हो रही है या नहीं, उसकी मात्रा कितनी है तथा उसका घरेलू उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
अगर जांच में यह साबित होता है कि डंपिंग के कारण घरेलू उद्योग को वास्तविक क्षति हुई है, तो डीजीटीआर आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश कर सकता है।
हालांकि, ऐसे शुल्क लगाने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय द्वारा लिया जाता है।
‘रेसोरसिनॉल’ का उपयोग मुख्य रूप से टायर और रबड़ उत्पादों के विनिर्माण आदि के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल लकड़ी चिपकाने के लिए, रंग, औषधियों और प्रसाधन सामग्री के निर्माण में भी होता है।