आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
जब लोग माफी मांगते हैं, तो वे केवल अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहे होते। वे यह भी जाहिर करते हैं कि वे जिम्मेदारी, नैतिकता, सामाजिक और नैतिक मानदंडों तथा दूसरों के साथ अपने संबंधों को किस तरह समझते हैं। ये सभी बातें अलग-अलग सांस्कृतिक परिवेश में काफी भिन्न हो सकती हैं।
विदेशी भाषा में माफी मांगने पर हमें होने वाला अपराधबोध और शर्म का एहसास अलग हो सकता है। हालांकि, माफी मांगना संवाद का बेहद जटिल रूप है और इसे केवल उन शब्दों से नहीं समझा जा सकता, जिनका हम इस्तेमाल करते हैं।
एक ही संस्कृति के भीतर भी लोग अलग-अलग हालात में अलग-अलग तरह से माफी मांगते हैं। उदाहरण के लिए, समयसीमा तक काम पूरा नहीं कर पाने पर किसी विद्यार्थी को अपने प्रोफेसर से माफी मांगनी हो तो केवल “माफ कीजिए” कहना पर्याप्त नहीं होगा। उसे समयसीमा चूकने की बात स्वीकार करनी होगी, अपनी गलती की जिम्मेदारी लेनी होगी और प्रोफेसर-विद्यार्थी के संबंध को ध्यान में रखते हुए सम्मानपूर्वक अपनी बात रखनी होगी।
चाहे माफी जीवनसाथी से मांगी जाए, दोस्त से, सहकर्मी से या किसी अजनबी से-हर स्थिति के अपने कुछ अनकहे नियम और अपेक्षाएं होती हैं।