जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय सोमवार को किश्तवाड़ नाबालिग दुष्कर्म-मौत मामले की सुनवाई करेगा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 29-08-2026
Jammu and Kashmir High Court to hear Kishtwar minor rape-death case on Monday
Jammu and Kashmir High Court to hear Kishtwar minor rape-death case on Monday

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय 15 वर्षीय आदिवासी लड़की का कथित तौर पर उसके स्कूल शिक्षक द्वारा यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या करने के मामले की जांच अपराध शाखा से कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा।
 
किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके निवासी पीड़िता के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपिका पुष्कर नाथ ने शनिवार को यह याचिका दाखिल की।
 
नाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया, ‘‘मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।’’
 
उन्होंने कहा कि याचिका में अनुरोध किया गया है कि 20 अगस्त को नाबालिग की मौत से पहले हुई घटनाओं के पूरे क्रम की स्वतंत्र जांच के लिए मामले को अपराध शाखा को सौंपा जाए। इन घटनाओं में कथित तौर पर पंचायत का दखल और उसके पिता पर समझौता करने के लिए दबाव डालने की कोशिश भी शामिल है।
 
पुलिस ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई है और अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें स्कूल के प्रधानाध्यापक (जो मुख्य आरोपी हैं), एक नर्स और जिला अस्पताल किश्तवाड़ में तैनात दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मी शामिल हैं। सरकार ने शिक्षक को निलंबित कर दिया है, जबकि दिहाड़ी कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया है।
 
नाथ ने कहा, ‘‘हमने न केवल नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म की, बल्कि उसके बाद हुई उन सभी घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है, जिनकी वजह से उसकी मौत हुई। पंचायत का कथित दखल, मामले में समझौता करने के लिए पीड़िता के पिता पर डाला गया दबाव और उन दूसरे लोगों की भूमिका, जिन्होंने शायद मामले को दबाने में मदद की या कोशिश की, इन सभी की बारीकी से जांच होनी चाहिए।’’
 
उन्होंने कहा कि पंचायत का कथित दखल एक अहम पहलू है जिस पर तुरंत जांच की आवश्यकता है, विशेषतौर पर उन आरोपों पर कि लड़की के गरीब और अनपढ़ पिता पर मामले में समझौता करने का दबाव डाला गया, चुप रहने के लिए पैसे की पेशकश की गई और कथित तौर पर एक सादे पन्ने पर उनके अंगूठे के निशान लिए गए।
 
उन्होंने कहा, ‘‘इन आरोपों को कोई अलग-थलग या इत्तेफाक से हुई घटना नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब ये आरोप नाबालिग के गर्भवती होने का पता चलने के बाद सामने आए।’’
 
याचिका के मुताबिक गर्भावस्था की जानकारी होने पर मुख्य आरोपी से जुड़े कथित लोग सक्रिय हुए और एक पंचायत बुलाई गई।
 
याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे चुप रहने और समझौता करने के लिए ‘फटकारा गया और दबाव डाला गया’, जबकि बदले में पैसे की पेशकश भी की गई।