आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे ने शनिवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान के प्रति भारत के नजरिए में “बहुत बड़ा बदलाव” दिखाया, क्योंकि इन हमलों में न केवल सीमा के पास मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, बल्कि पड़ोसी देश के अंदर मौजूद उनके समर्थकों को भी निशाना बनाया गया।
वडोदरा में ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि एक साल पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उठाए गए कदम ने यह साबित कर दिया कि आतंकवादियों को मदद पहुंचाने वाले लोग, चाहे वे कहीं भी छिपे हों, भारतीय कार्रवाई से बच नहीं सकते।
सेना के 28वें प्रमुख रहे नरवणे ने कहा, “पहलगाम हमले के बाद किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक बहुत जरूरी कदम था।”
उन्होंने उरी और पुलवामा समेत पूर्व में हुए आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले भारत की सैन्य कार्रवाई का मुख्य जोर ज्यादातर सीमा के पास मौजूद आतंकवादियों के ठिकानों पर ही होता था।
जनरल (सेवानिवृत्त) नरवणे ने कहा, “लेकिन इस बार, जो हमले किए गए, उनमें उनके समर्थकों और उन्हें मदद देने वालों को निशाना बनाया गया - चाहे वे कहीं भी हों। ये हमले सिर्फ नियंत्रण रेखा के पास ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों - जैसे मुरीदके और बहावलपुर - में भी किए गए, जहां से उन्हें यह मदद मिलती है।”