West Bengal Babri Masjid Controversy: सुवेंदु अधिकारी बोले, ‘बाबर का नाम नहीं चलेगा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-02-2026
West Bengal Babri Masjid Controversy: Suvendu Adhikari said, 'Babar's name will not work.
West Bengal Babri Masjid Controversy: Suvendu Adhikari said, 'Babar's name will not work.

 

पूर्व मिदनापुर / मुर्शिदाबाद 

पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित ‘बाबरी मस्जिद’ नाम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें मंदिर या मस्जिद निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मुगल शासक बाबर के नाम का इस्तेमाल स्वीकार नहीं होगा।

पूर्व मिदनापुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा, “हिंदू मंदिर बनाएं या मुसलमान मस्जिद बनाएं, इससे कोई समस्या नहीं है। लेकिन बाबर का नाम लिखने नहीं दिया जाएगा। आने वाले दिनों में भाजपा बंगाल से बाबर का नाम हटाने का अभियान चलाएगी।”

मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण की घोषणा

इस बीच, जन उन्नयन पार्टी (JUP) के प्रमुख Humayun Kabir ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में एक नई मस्जिद के निर्माण की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की है, जिसे वह ‘बाबरी मस्जिद’ नाम देना चाहते हैं।

कबीर ने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा, “मैं बहुत खुश हूं। दो वर्षों में यह मस्जिद बनकर तैयार हो जाएगी। मंदिर बनाना ठीक है, लेकिन अगर मुसलमान मस्जिद बनाना चाहें तो विरोध क्यों?” उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद के साथ-साथ एक अस्पताल और विश्वविद्यालय के निर्माण की भी योजना है।

सियासी आरोप-प्रत्यारोप

इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने हुमायूं कबीर पर तंज कसते हुए कहा कि “मंदिर-मस्जिद की राजनीति करने में कबीर और भाजपा में कोई अंतर नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

 बढ़ता राजनीतिक तनाव

‘बाबरी मस्जिद’ नाम को लेकर उठे इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। एक ओर भाजपा इसे ऐतिहासिक संदर्भ और भावनाओं से जोड़कर देख रही है, वहीं दूसरी ओर जेडीयूपी इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बता रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति में अक्सर संवेदनशील बन जाते हैं। ऐसे में प्रशासन और राजनीतिक दलों के लिए संतुलन बनाए रखना अहम होगा, ताकि सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ नाम को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है, क्योंकि सभी प्रमुख दल इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट कर रहे हैं।