मिस्र के कलाकारों का सूरजकुंड में जलवा: हस्तशिल्प और आभूषणों को मिली पहचान

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 12-02-2026
Egyptian artists shine at Surajkund: Handicrafts and jewelry gain recognition
Egyptian artists shine at Surajkund: Handicrafts and jewelry gain recognition

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

39वें अंतर्राष्ट्रीय सुरजकुंड क्राफ्ट्स मेले में मिस्र, इस साल का पार्टनर कंट्री, अपनी समृद्ध पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और अनोखी डिज़ाइन के साथ दर्शकों का मन मोह रहा है। मिस्र के पवेलियन में हाथ से बने रंग-बिरंगे उत्पाद, पारंपरिक परिधान और प्राचीन शैली के आभूषण देखने को मिल रहे हैं, जो न केवल खूबसूरत हैं बल्कि मिस्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी दर्शाते हैं। मिस्र के ये कलाकार भारत में इस अनुभव का पूरा आनंद ले रहे हैं और उनके हस्तशिल्प को सुरजकुंड मेले में पहचान मिल रही है।

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ़्ट्स फ़ेयर के 39वें संस्करण में एक विशेष आकर्षण था मिस्र की कला और क्राफ़्ट का, जो न केवल प्राचीन काल की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित करता था, बल्कि आज के कारीगरों द्वारा उसे एक नए रूप में प्रस्तुत भी किया गया था। इस प्रदर्शनी में मैंने मिस्र की कला के कुछ अद्वितीय उदाहरण देखे, जो उनकी आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से गहरे तरीके से जुड़े हुए थे। यह सिर्फ एक कला प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि एक यात्रा थी, जो मुझे मिस्र की गौरवमयी सभ्यता और उसकी कला की गहराई में ले गई।

इस प्रदर्शनी में पिरामिडों का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक था। पिरामिड न केवल अपनी भव्यता और संरचनात्मक दृष्टिकोण से, बल्कि अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे थे। प्रदर्शनी में पिरामिडों के छोटे-छोटे मॉडल और मूर्तियाँ प्रदर्शित की गई थीं, जिन्हें कारीगरों ने अत्यंत बारीकी से और प्यार से तैयार किया था। ये पिरामिड प्राचीन मिस्र की समृद्धि, धार्मिकता और विशालता का प्रतीक थे। प्रदर्शनी में आए हुए लोग इन पिरामिडों की सुंदरता और उनके गहरे प्रतीकात्मक अर्थ को लेकर बेहद उत्साहित थे। कई विज़िटर्स ने इन पिरामिडों को अपने घरों या कार्यालयों के लिए स्मारिका के तौर पर खरीदने की इच्छा व्यक्त की। इस प्रकार, पिरामिड मिस्र की कला का अभिन्न हिस्सा बन गए थे और उन्होंने दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया था।

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में इस वर्ष मिस्र के कलाकारों की कला ने दर्शकों का दिल जीत लिया। मेले में सजी मिस्र की पारंपरिक कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ और परिधान प्राचीन सभ्यता की भव्यता और रहस्यमय सौंदर्य को जीवंत करती नज़र आ रहीं हैं। स्टाल्स पर फिरौन, रानी नेफ़रतीती, देवता होरस और अनूबिस की आकर्षक मूर्तियाँ विशेष रूप से चर्चा का विषय रहीं। पत्थर, पीतल और कांसे से बनी ये कलाकृतियाँ मिस्र की हज़ारों वर्ष पुरानी विरासत को दर्शाती हैं। नीले और सुनहरे रंगों का संयोजन इन मूर्तियों को और भी भव्य बनाता है। पिरामिड की आकृतियों, स्फिंक्स और प्राचीन प्रतीकों से सजे शोपीस पर्यटकों को खूब लुभा रहे हैं।
 
 
मेले में मिस्र के पारंपरिक परिधानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। काले रंग के लंबे परिधान जिन पर हाथ से की गई कढ़ाई, ज्यामितीय डिज़ाइन और धातु के सिक्कों की सजावट की गई है, मिस्र की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। ये परिधान न केवल सुंदर हैं बल्कि वहां की लोककला और परंपराओं की कहानी भी कहते हैं। मिस्र से आए कलाकारों का कहना है कि भारत में उन्हें जबरदस्त सराहना मिल रही है। भारतीय दर्शक मिस्र की प्राचीन सभ्यता, इतिहास और शिल्पकला में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। कई स्टॉलों पर कलाकृतियाँ खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। सूरजकुंड मेला एक बार फिर साबित करता है कि कला और संस्कृति सीमाओं से परे होती है। मिस्र के कलाकारों की यह भागीदारी न केवल उनके शिल्प को पहचान दिला रही है, बल्कि भारत और मिस्र के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी और मजबूत कर रही है। 

मिस्र की कला का एक और प्रमुख पहलू था दीवारों पर पेंटिंग और रिलीफ डिज़ाइनों का प्रयोग, जो विशेष रूप से कब्रों और मंदिरों की सजावट के लिए बनाए जाते थे। इन डिज़ाइनों में अक्सर फ़ैरो, भगवान और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के दृश्य होते थे, जो मिस्र की धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक संरचनाओं को बड़े सुंदर और सजीव तरीके से प्रदर्शित करते थे। इन कला रूपों में सिर्फ सौंदर्य का ही नहीं, बल्कि गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थों का समावेश था।

मिस्र के कलाकारों और उनके हस्तनिर्मित उत्पाद

मिस्र के कलाकारों ने इस मेले में अपने हैंडमेड उत्पादों को प्रदर्शित किया है। असम यासिन ने अपने स्टॉल पर बताया कि उनके प्रोडक्ट्स पूरी तरह से हाथ से बनाए जाते हैं। ये ऊन और कॉटन के लूम पर तैयार किए गए हैं और मिस्र के अलग-अलग हिस्सों से आए रंग-बिरंगे वॉल हैंगिंग और साफ-सफाई के उत्पादों को दर्शकों के सामने पेश किया गया है। उन्होंने साझा किया कि इस बार उनका अनुभव बहुत अच्छा रहा और लोगों ने उनके उत्पादों की खूब सराहना की।

जिहाम खलीफा, सिवा ओएसिस से, ने बताया कि उनकी टीम में 60 स्थानीय महिलाएं हैं, जो पारंपरिक कढ़ाई करती हैं। उन्होंने 400 साल पुराने पारंपरिक डिज़ाइन को आधुनिक कपड़े और लिनन पर पेश किया है। जिहाम ने बताया कि यह उनका तीसरा साल है इस प्रोजेक्ट के साथ और उनका उद्देश्य पारंपरिक कला को आधुनिक रूप में दुनिया के सामने लाना है। मेले में उनके स्टॉल पर भारी भीड़ रही, और लोग उनके उत्पादों की डिज़ाइन और गुणवत्ता की प्रशंसा कर रहे थे, हालांकि कुछ ने कीमत थोड़ी अधिक बताई।

मिस्र के फैशन ब्रांड ज़वाया आर्ट हाउस की मरीयम ने बताया कि उनका उद्देश्य मिस्र की पारंपरिक कला के अलग-अलग “एंगल्स” यानी दृष्टिकोणों को आधुनिक डिज़ाइन में प्रस्तुत करना है। उनके स्टॉल पर पुरुषों और महिलाओं के लिए पारंपरिक परिधान जैसे जालाबीया, अबाया, टेलहम और अन्य पोशाकें प्रदर्शित की गई हैं। उन्होंने बताया कि मिस्र के विभिन्न हिस्सों जैसे नुबिया और सिवा के पारंपरिक डिज़ाइनों को आधुनिक फैब्रिक और रंगों के साथ पेश किया गया है, ताकि युवा और आधुनिक ग्राहक भी इन्हें अपनाएं।

पारंपरिक मिस्री आभूषणों का आकर्षण

मिस्र के पवेलियन में प्रदर्शित पारंपरिक आभूषण इस मेले का सबसे बड़ा आकर्षण बने हुए हैं। रानिया हेलल ने बताया कि उनके आभूषण पूरी तरह से हाथ से बनाए जाते हैं। ये सोने और धातु में प्लेट किए गए हैं, और इन पर पारंपरिक नक़्क़ाशी और एनेमलिंग की गई है। इसके साथ ही वे जेन्युइन लेदर के वॉलेट्स, बेल्ट और बैग भी बनाती हैं, जिनमें मिस्र की विभिन्न सांस्कृतिक और पारंपरिक कढ़ाई के डिज़ाइन दिखाए गए हैं।

मुझे यह देखना बहुत रोचक लगा कि कारीगर किस तरह विभिन्न मटीरियल्स से काम कर रहे थे। मिस्र के कारीगरों ने अलबास्टर, फ़ाइन्स (ग्लेज़्ड सिरेमिक), सोना, लकड़ी और पपीरस जैसी सामग्रियों से अत्यंत आकर्षक और बारीकी से नक्काशी किए हुए सामान बनाए थे। इन सामग्रियों का उपयोग केवल कला की सुंदरता को बढ़ाने के लिए नहीं था, बल्कि यह भी दर्शाता था कि उन दिनों के कारीगरों के पास तकनीकी कौशल और ज्ञान की गहरी समझ थी।

सूरजकुंड में प्रदर्शित ज्वेलरी और ताबीज़ ने मिस्र की कला का एक और खूबसूरत पहलू प्रस्तुत किया। सोने, चांदी और सेमी-प्रेशियस पत्थरों से बनाई गई ज्वेलरी का डिज़ाइन बेहद आकर्षक था। इनमें स्कारब और सुरक्षा देने वाले देवताओं की आकृतियाँ होती थीं, जो मिस्रवासियों के धार्मिक विश्वासों का प्रतीक मानी जाती थीं। ये ताबीज़ न केवल सुंदरता में समृद्ध थे, बल्कि उनका गहरा आध्यात्मिक और सुरक्षा का अर्थ भी था। 

आभूषणों में प्राकृतिक पत्थरों का प्रयोग किया गया है, जिनमें लैपिस लाज़ुली, रोज क्वार्ट्ज और गार्नेट शामिल हैं। इन पत्थरों को पारंपरिक तकनीकों से काटा और तराशा गया है। नेकलेस, कंगन, अंगूठी, झुमके और पेंडेंट पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं। विशेष रूप से नीले, हरे और भूरे पत्थरों के उत्पाद महिलाओं में बहुत लोकप्रिय हैं।

मिस्र के कलाकारों ने बताया कि यह उनकी पहली बार भारत आने का अनुभव है, और वे भारतीय दर्शकों और पर्यटकों से बहुत उत्साहित हैं। दर्शक उनकी कला और डिज़ाइन की बहुत सराहना कर रहे हैं। कपड़ों की कला भी मिस्र की सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा रही है। प्रदर्शनी में मैंने देखा कि मिस्र के कारीगर उच्च गुणवत्ता वाले लिनन का इस्तेमाल करते थे, जो न केवल दफ़नाने के लिए बल्कि रोज़मर्रा के जीवन में भी उपयोगी था। यह कपड़ा गर्मी में आरामदायक था, जो मिस्र के कठोर मौसम के अनुकूल था।

इसके अलावा, कांच से बने आइटम्स भी प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण थे। इन कांच के वस्त्रों को मेटल ऑक्साइड से रंगा जाता था, जिससे वे चमकीले और आकर्षक हो जाते थे। यह एक नई कला शैली का उदाहरण था, जो मिस्र की कारीगरी और उत्कृष्टता को दर्शाता था। 

मिट्टी के बर्तनों का संग्रह भी प्रदर्शनी में अत्यधिक आकर्षक था। प्रदर्शनी में बिना ग्लेज़ वाले लाल मिट्टी के बर्तन और नीले-ग्लेज़ वाले सजावटी बर्तन शामिल थे, जो कार्यात्मक होने के साथ-साथ अपनी सुंदरता और रंग के कारण भी बहुत आकर्षक थे। ये बर्तन मिस्र के कारीगरों की कला और सौंदर्यबोध को प्रदर्शित करते थे।

मूर्तियाँ मिस्र की कला का एक अभिन्न हिस्सा थीं। इनकी नक्काशी इतनी बारीक और प्रभावशाली थी कि ये मूर्तियाँ उस समय की कला और धार्मिक विचारधाराओं को जीवंत कर देती थीं। खासतौर पर ग्रेट स्फिंक्स जैसी विशाल पत्थर की मूर्तियाँ, जो मिस्र की महानता और उसकी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक मानी जाती हैं, मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया। 

मिस्र के हस्तशिल्प का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

मिस्र की आभूषण और हस्तशिल्प कला न केवल सुंदर और आकर्षक है, बल्कि इसमें ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी समाहित है। मिस्र की पारंपरिक कला में फ़राओनिक युग के प्रतीक और डिज़ाइन शामिल हैं। इन डिज़ाइनों और तकनीकों को आज भी आधुनिक उत्पादों में जीवित रखा गया है। कलाकारों का कहना है कि मिस्र की आभूषण कला की वैश्विक पहचान है और यह न केवल सुंदर है बल्कि संस्कृति और इतिहास का प्रतीक भी है।

भारतीय दर्शकों की प्रतिक्रिया

सुरजकुंड मेले में मिस्र के पवेलियन को देखने आए भारतीय और विदेशी पर्यटक उनके उत्पादों और आभूषणों की अद्वितीय कारीगरी की खूब सराहना कर रहे हैं। विभिन्न रंगों, डिज़ाइनों और पारंपरिक तकनीकों वाले उत्पाद दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटक पारंपरिक डिज़ाइन के साथ आधुनिक फिनिश और स्टाइल से प्रभावित हैं।

कलाकारों का अनुभव

असम यासिन, जिहाम खलीफा, मरीयम ज़वाया और रानिया हेलल सभी ने साझा किया कि मेले का अनुभव बहुत उत्साहजनक और आनंदमय रहा। भीड़ के बावजूद दर्शकों का उत्साह और उनके उत्पादों में रुचि ने सभी को प्रेरित किया। कलाकारों के अनुसार, यह मंच उनके देश की सांस्कृतिक और कला विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इस प्रकार, 39वें अंतर्राष्ट्रीय सुरजकुंड क्राफ्ट्स मेले में मिस्र की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और आभूषण ने दर्शकों और पर्यटकों का मन मोह लिया है। मिस्र के पवेलियन में आने वाले लोग न केवल सुंदर और रंग-बिरंगे उत्पाद देख रहे हैं, बल्कि मिस्र की समृद्ध कला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को भी करीब से अनुभव कर रहे हैं। इस मेले में मिस्र की भागीदारी ने निश्चित रूप से भारत और मिस्र के बीच सांस्कृतिक और कलात्मक संबंधों को और मजबूत किया है।

आज भी, मिस्र की कला और क्राफ़्ट की परंपराएँ जीवित हैं। काहिरा के खान अल-खलीली जैसे बाजारों में पपीरस पेंटिंग, अलबास्टर नक्काशी, और ज्वेलरी जैसी वस्तुएं बिकती हैं। इन पारंपरिक कारीगरी में सैंडल, बैग, मेटलवर्क और लकड़ी के बारीक काम भी जारी हैं, जो मिस्र की कला और संस्कृति को आज भी जीवित रखते हैं।

सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ़्ट्स फ़ेयर में मिस्र की कला और क्राफ़्ट ने प्राचीन संस्कृति और आधुनिक कारीगरी का अद्वितीय मिश्रण प्रस्तुत किया। यह प्रदर्शनी न केवल मिस्र की सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित थी, बल्कि यह दर्शकों को उस कला के महत्व और प्रभाव को समझने का अवसर भी प्रदान करती थी। यह एक अविस्मरणीय अनुभव था, जिसने मुझे मिस्र की संस्कृति और कला की महानता से परिचित कराया और साथ ही, दुनिया भर में कला की सजीवता और विविधता का अहसास कराया। 

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