यूएई की टी20 वर्ल्ड कप 2026 की टीम पर नजर डालें तो बल्लेबाजी क्रम से लेकर ऑलराउंड और गेंदबाजी विभाग तक भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति दिखाई देती है। टीम की कमान मोहम्मद वसीम के हाथों में है, लेकिन शीर्ष क्रम में मयंक कुमार जैसे खिलाड़ी टीम को स्थिरता देते हैं।
हरियाणा में जन्मे मयंक राजेश कुमार दाएं हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव अभी सीमित है, लेकिन घरेलू टी20 मुकाबलों में उन्होंने उपयोगी पारियां खेली हैं। उनका स्ट्राइक रेट और तकनीकी संतुलन यूएई के शीर्ष क्रम को मजबूती देता है।
विकेटकीपर बल्लेबाज आर्यंश शर्मा भी टीम की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। युवा आर्यंश ने वनडे और टी20 दोनों प्रारूपों में उपयोगी योगदान दिया है। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनका औसत और स्ट्राइक रेट इस बात का संकेत है कि वे तेज खेल के अनुकूल खुद को ढाल चुके हैं। विकेट के पीछे उनकी फुर्ती और मध्यक्रम में उनकी उपयोगिता यूएई के लिए संतुलन का काम करती है।

ऑलराउंड विभाग में हर्षित कौशिक और ध्रुव पराशर जैसे खिलाड़ी टीम की रीढ़ कहे जा सकते हैं। हर्षित कौशिक बाएं हाथ के बल्लेबाज और स्लो लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज हैं। उन्होंने सीमित मौकों में उपयोगी पारियां खेली हैं और जरूरत पड़ने पर किफायती गेंदबाजी भी की है।
वहीं ध्रुव पराशर का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय है। दाएं हाथ के ऑफब्रेक गेंदबाज ध्रुव ने टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 30 से अधिक विकेट हासिल किए हैं। उनका इकोनॉमी रेट और स्ट्राइक रेट दर्शाता है कि वे मध्य ओवरों में विपक्षी बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं। साथ ही वे निचले क्रम में उपयोगी रन भी जोड़ सकते हैं।
गेंदबाजी आक्रमण में सिमरनजीत सिंह का अनुभव यूएई के लिए बड़ी पूंजी है। बाएं हाथ के स्पिनर सिमरनजीत ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में प्रभावशाली औसत के साथ विकेट झटके हैं। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4 विकेट लेकर आया है, जो यह दिखाता है कि वे मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। बड़े टूर्नामेंट में अनुभव की अहमियत को देखते हुए सिमरनजीत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

यूएई की टीम में मोहम्मद फरीद, मुहम्मद जोहैब, अलीशान शराफू और अन्य खिलाड़ियों का भी योगदान है, लेकिन भारतीय मूल के खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के संतुलन को खास बनाती है। दिलचस्प यह है कि ये सभी खिलाड़ी अलग-अलग भूमिकाओं में हैंI कोई ओपनर है, कोई ऑलराउंडर, तो कोई प्रमुख गेंदबाज। यदि ये खिलाड़ी सामूहिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करें तो यूएई की टीम किसी भी मजबूत प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दे सकती है।
हालांकि यह भी सच है कि टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसी दिग्गज टीमों के सामने यूएई को कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा। अनुभव, संसाधन और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के लिहाज से इन टीमों की तुलना में यूएई अभी विकास के दौर में है। लेकिन टी20 क्रिकेट की प्रकृति ऐसी है कि एक अच्छा दिन किसी भी टीम को जीत दिला सकता है। ऐसे में यूएई की यह मिश्रित और बहुसांस्कृतिक टीम टूर्नामेंट में सरप्राइज पैकेज साबित हो सकती है।
यूएई की क्रिकेट संरचना लंबे समय से प्रवासी खिलाड़ियों पर आधारित रही है। देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा प्रवासी समुदाय से आता है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों की संख्या काफी अधिक है। यही कारण है कि घरेलू क्रिकेट ढांचे में भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भागीदारी स्वाभाविक रूप से अधिक है। यह विविधता यूएई क्रिकेट की पहचान बन चुकी है। टीम चयन में प्रतिभा को प्राथमिकता दी जाती है, और इसी का परिणाम है कि विभिन्न पृष्ठभूमि के खिलाड़ी एक साथ राष्ट्रीय ध्वज के लिए खेलते दिखाई देते हैं।
खेल के मैदान पर धर्म या राष्ट्रीय मूल से अधिक महत्वपूर्ण प्रदर्शन होता है। यूएई की टीम इसका उदाहरण है, जहां अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के खिलाड़ी एकजुट होकर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भारतीय मूल के इन खिलाड़ियों के लिए यह दोहरी जिम्मेदारी जैसा है—एक ओर वे अपने कौशल से यूएई को गौरवान्वित करना चाहते हैं, दूसरी ओर उनकी जड़ें भारतीय क्रिकेट संस्कृति से जुड़ी हैं, जिसने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में यूएई की असली परीक्षा तब होगी जब वह मजबूत टीमों के खिलाफ दबाव की परिस्थितियों में उतरेगी। क्या शीर्ष क्रम स्थिर शुरुआत देगा? क्या ऑलराउंडर संतुलन बनाए रख पाएंगे? क्या गेंदबाज डेथ ओवरों में किफायती रहेंगे? इन सवालों के जवाब टूर्नामेंट के दौरान ही मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि टीम में मौजूद भारतीय मूल के खिलाड़ियों की भूमिका निर्णायक होगी।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूएई अपने प्रमुख खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालने में सफल रहता है, तो वह कम से कम कुछ मुकाबलों में उलटफेर कर सकता है। खासकर स्पिन गेंदबाजी और ऑलराउंड क्षमता टीम की ताकत हो सकती है। छोटे प्रारूप में सामूहिक प्रदर्शन ही सफलता की कुंजी होता है।
कुल मिलाकर, यूएई की टी20 वर्ल्ड कप 2026 टीम केवल एक क्रिकेट स्क्वॉड नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट की बदलती तस्वीर का प्रतीक है। यह टीम दिखाती है कि खेल सीमाओं से परे है और प्रतिभा किसी एक पहचान की मोहताज नहीं होती। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बहुरंगी संयोजन मैदान पर कितना प्रभाव छोड़ पाता है और क्या वर्ल्ड कप के मंच पर कोई नई कहानी लिख पाता है।





