वायनाड भूस्खलन: बचाव अभियान दूसरे दिन भी जारी, तीन की मौत, पांच लापता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 08-07-2026
Wayanad landslides: Rescue operation continues for the second day; three dead, five missing.
Wayanad landslides: Rescue operation continues for the second day; three dead, five missing.

 

वायनाड (केरल)

 केरल के वायनाड जिले में कल्लाडी सुरंग निर्माण स्थल पर हुए भीषण भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान दूसरे दिन भी युद्धस्तर पर जारी है। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कम से कम पांच लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने वायनाड जिले के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले 24 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी दी है।

मंगलवार सुबह करीब 11:15 बजे मेप्पाडी ग्राम पंचायत के कल्लाडी सुरंग निर्माण क्षेत्र में लगभग 200 मीटर के दायरे में अचानक भूस्खलन हुआ। हादसे के बाद निर्माण स्थल का बड़ा हिस्सा 7 से 10 फीट गहरे मलबे में दब गया, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर और कर्मचारी प्रभावित हुए।

आईएमडी के अनुसार, वायनाड में बुधवार को अलग-अलग स्थानों पर 24 घंटे के दौरान 7 से 11 सेंटीमीटर तक वर्षा हो सकती है। मौसम विभाग ने पूरे केरल में व्यापक बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई है। 9 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चल सकती हैं।

राहत एवं बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), केरल पुलिस, अग्निशमन एवं बचाव सेवा, सिविल डिफेंस, जिला प्रशासन तथा स्थानीय स्वयंसेवक संयुक्त रूप से जुटे हुए हैं। बचाव कार्य को तेज करने के लिए प्रभावित क्षेत्र को चार अलग-अलग जोनों में विभाजित किया गया है।

पहले दिन के अभियान में 65 एनडीआरएफ जवान, 100 पुलिसकर्मी, 158 अग्निशमन एवं सिविल डिफेंस कर्मी, यूएलसीसीएस (उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) के 52 कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। मलबे में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए दो स्निफर डॉग और दो कैडवर डॉग भी तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मजदूरों को निर्माण स्थल तक लाने वाली एक बस भी मलबे के नीचे दब गई है, हालांकि हादसे के समय उसमें कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। भूस्खलन से मीनाक्षी पुल के पास स्थित एक मकान और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा है।

कन्नूर रेंज के डीआईजी कार्तिक के ने बताया कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मृतकों की पहचान, पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं, जबकि बचाव दल का मुख्य उद्देश्य अभी भी लापता लोगों का पता लगाना है।

हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान मध्य प्रदेश के ऑपरेटर चंद्रा बान, बिहार के सिविल फोरमैन विकास कुमार और झारखंड के श्रमिक अनमोल के रूप में हुई है। वहीं लापता लोगों में हिमाचल प्रदेश के निर्माण प्रबंधक विक्रम राणा, इंजीनियर राहुल, बिहार के एक्सकेवेटर ऑपरेटर मोहम्मद इमरान, पश्चिम बंगाल के सर्वेयर राकेश गुचैत तथा उत्तर प्रदेश के सर्वेयर अजहरुद्दीन अंसारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ अन्य लोगों के भी लापता होने की आशंका है।

प्रशासन ने प्रभावित 23 परिवारों के कुल 76 लोगों को मेप्पाडी स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में बनाए गए राहत शिविर में स्थानांतरित किया है। शिविर में भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। घायलों में से तीन लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि पांच अन्य का इलाज जारी है।

राहत कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए दुर्घटनास्थल के 500 मीटर के दायरे में आम लोगों, स्वयंसेवकों और निजी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिला प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने और सूचनाओं के समन्वय के लिए जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है। वहीं राज्य सरकार ने घटना की जांच के साथ-साथ बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।